स्वतंत्रता दिवस पर पार्टी की केन्द्रीय समिति द्वारा प्रकाशित बयान पर पाठकों से प्राप्त प्रतिक्रिया

संपादक महोदय,

मैं यह पत्र, मज़दूर एकता लहर में छपे बयान के संदर्भ में लिख रहा हूं। जो स्वतंत्रता दिवस की 70वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रकाशित किया गया है। जिसका शीर्षक है ‘हिन्दोस्तान को असली आज़ादी पाने के लिये साम्राज्यवादी व्यवस्था से नाता तोड़ना होगा!’

इस बयान को पूरा पढ़ने के बाद यह स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है कि इस समय देश के मज़दूरों, किसानों, मेहनतकश लोगों तथा तमाम दबे-कुचले लोगों की स्थिति बहुत ख़राब है। जबकि देश चंद्रयान भेज रहा है, देश में स्वास्थ्य पर्यटन बढ़ रहा है और ऐसी अनेक उपब्धियां हैं। इसके बावजूद भी हमारे देश के किसान को आत्महत्या करनी पड़ रही है। देश में एक बड़ी आबादी को दो-जून की रोटी नसीब नहीं होती।

देश में मज़दूरों को न्यूनतम वेतन से वंचित किया जा रहा है। सरकार नये श्रम कानूनों के ज़रिये मज़दूरों के अधिकारों को छीनने का काम कर रही है।

मज़दूरों और किसानों के संघर्षों को कुचलने के लिये पुलिस द्वारा जुल्म ढाया जा रहा है। बेगुनाह मज़दूरों को अपनी यूनियन बनाने के लिये जेलों में ठूंसा जा रहा है। न्यूनतम वेतन की मांग करने वालों को बिना किसी नोटिस या सूचना के नौकरी के बर्खास्त कर दिया जा रहा है।

70 वर्षों की आज़ादी के बाद हमारे देश में केवल पूंजीपतियों की दौलत में ही तरक्की हुई है। यह तरक्की इतनी अधिक हो गई कि अब वे साम्राज्यवादी बनने का सपना देखने लगे हैं। साम्राज्यवादियों के साथ मिलकर उनके बाज़ारों में निवेश कर रहे हैं। अमरीकी साम्राज्यवाद के साथ अनेक रणनैतिक गठबंधन बना रहे हैं।

इस बयान को पढ़कर यह स्पष्ट साबित होता है कि मज़दूरों और मेहनकश लोगों पर हो रहे अन्याय और शोषण के लिये पूंजीवादी व्यवस्था ज़िम्मेदार है। यह व्यवस्था और इसकी सरकारें मज़दूरों और मेहनतकशों के शोषण के ज़रिये पूंजीपतियों के मुनाफ़ों को बढ़ाने के लिये वचनबद्ध हैं।

अंग्रेजों के जाने के बाद पूंजीपति वर्ग ने कांग्रेस पार्टी के ज़रिये सत्ता पर कब्ज़ा किया। पूंजीपति वर्ग ने अपनी योजनाओं को पेश किया। इन योजनाओं को आने वाली सभी सरकारों ने लागू किया है। चाहे वह भाजपा हो, कांग्रेस पार्टी हो या फिर पार्टियों का कोई गठबंधन।

बयान का समापन करते हुये बताया गया है कि अपने देश को संकट से निकालने के लिये, हमें साम्राज्यवादी व्यवस्था से नाता तोड़ना होगा। मज़दूरों और किसानों की हुकूमत स्थापित करनी होगी। राज्य सत्ता को लोगों के नियंत्रण में लाना होगा।

इस ज्ञानपूर्ण बयान को जारी करने के लिये मैं पार्टी को धन्यवाद देता हूं।

आपका पाठक

रोशन सिंह, बलिया

उत्तर प्रदेश


प्रिय संपादक

हिन्दोस्तान में हर साल स्वतंत्रता दिवस के अवसर को बहुत ही ज़ोर- शोर से मनाया जाता है, बडे़-बडे़ वादे किये जाते हैं। जो भी पार्टी सत्ता में होती है वह अपनी पीठ थप-थपाना चाहती है और दूसरी पार्टियों की निंदा करती है, यह हमारे देश की परंपरा हो चुकी है। मैं 40 सालों से ये देखती आ रही हूं। अंग्रेजों से आज़ादी मिल गई और हम गुलामी से आज़ाद हो गये हैं, यही आम जनता की सोच है।

क्या हमें आज वे सभी सुविधायें प्राप्त हैं? जो एक इन्सान बतौर जीने के लिये भौतिक सुविधाओं जैसे कि पीने का साफ पानी, घर, साफ-सुथरी सड़क, बिजली, परिवहन आदि, जो हर इन्सान को उपलब्ध होने चाहिये। इसके अलावा जीवन-यापन करने के लिये हर हाथ को काम, हर बच्चे को शिक्षा, हर इन्सान के लिये स्वास्थ्य सुविधा, सभी को वाज़िब दाम में खाने लायक राशन, इन सभी चीज़ों को उपलब्ध कराना राज्य का फर्ज़ है। मगर इन्हीं चीज़ों की ज़रूरतों के लिये हर दिन आम अवाम को संघर्ष करना पड़ता है। एक इन्सान की पूरी ज़िंदगी इन्हीं चीज़ों को पाने के लिये ख़त्म हो जाती है पर ये चीज़ें नहीं मिल पाती हैं। इन सारी चीज़ों से वंचित जनता पर दिन-ब-दिन हमले बढ़ते जा रहे हैं और जब कोई भी व्यक्ति राज्य के खि़लाफ़ आवाज़ उठाने की कोशिश करता है उसको देशद्रोही या फिर आतंकवादी करार दिया जाता है।

पिछले सौ साल से मज़दूर अपने हक़ों के लिये लड़़ रहे हैं पर आज भी उनकी हालतें कुछ अच्छी नहीं हैं। काम के घंटे 8 होने चाहियें और साथ ही लंबे संघर्ष के बाद जो न्यूनतम वेतन का अधिकार हासिल किया है उसको भी छीना जा रहा है। काम की जगह पर महिलायें आज भी सुरक्षित नहीं हंै। अपने कर्ज़ को न चुका पाने के कारण हर साल सैकड़ों किसान आत्महत्या करने को मजबूर होते हैं। आये दिन बाढ़, सूखा और तुफानों के कारण हजारों लोग मर जाते हैं पर इसका जवाबदेह कोई नहीं होता। पूंजीवाद साम्राज्यवाद की ओर अग्रसर है। इसमें हम सबको समझना होगा कि जब तक इस व्यवस्था को उखाड़कर एक नई व्यवस्था को क़ायम नहीं करेंगे तब तक हम सही माइने में स्वतंत्र और खुषहाल नहीं होंगे। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मज़दूर एकता लहर में छपा पार्टी की केंद्रीय समिति का बयान हमें रूबरू करता है कि 70 सालों में हमारी हालतें कहां से कहां तक पहुंची हैं।

मीरा, दिल्ली

Tag:   

Share Everywhere

Sep 1-15 2019    Letters to Editor    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

(Click thumbnail to download PDF)

5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

(Click thumbnail to download PDF)

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

(Click thumbnail to download PDF)

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)