वेतन संहिता विधेयक के मुद्दे पर दिल्ली के ओखला में अभियान

2 सितम्बर से लेकर 13 सितम्बर 2019 तक कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के कार्यकर्ताओं ने ‘वेतन संहिता विधेयक’ और ‘कार्यस्थल पर सुरक्षा, स्वास्थ्य और काम की हालतें संहिता विधेयक’ के मुद्दे पर ओखला औद्योगिक क्षेत्र के कई मुख्य केन्द्रों और मज़दूर बस्तियों में जन अभियान चलाया। अभियान के दौरान सैकड़ों पुरुष और महिला मज़दूरों ने प्रस्तुत की जा रही बातों को ध्यान सुना और कार्यकर्ताओं के साथ सवाल-जवाब किये।

Okhla Campaign
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कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के कार्यकर्ताओं ने समझाया कि श्रम कानूनों को तथाकथित “सरल” बनाने के नाम पर सरकार ने संसद के बीते सत्र में जो बिल पास किया, वह पूरी तरह मज़दूर-विरोधी है और पूंजीपति मालिकों के पक्ष में हैं। वेतन संहिता विधेयक के तहत मज़दूरों का न्यूनतम वेतन प्रति दिन 178 रुपये और मासिक 4628 रुपये तय किया गया है। यह अनेक राज्यों में इस समय मौजूद न्यूनतम वेतन से बहुत कम है। यह देशभर के मज़दूरों की लंबित मांग, कि प्रतिमाह 18,000 रुपये न्यूनतम वेतन लागू किया जाये, का घोर हनन है। इसके अलावा, इस बिल में कहा गया है कि महंगाई भत्ते में एक साल की जगह पर अब 5 साल में एक बार संशोधन होगा। इसका मतलब है कि पांच साल तक सरकार जो भी महंगाई बढ़ायेगी उसे मज़दूरों को 5 साल तक झेलना पड़ेगा।

वेतन संहिता विधेयक खेत मज़दूरों सहित देश के 90 प्रतिशत मज़दूरों को अपने दायरे से बाहर रखता है, और यह विधेयक केवल उन्हीं उद्यमों पर लागू होगा जहां कम से कम 10 मज़दूरों का नाम वेतन सूची में दर्ज़ है। यह विधेयक आई.टी. मज़दूरों, “ मेनेजर” और “सुपरवाइजर” इत्यादि कहे जाने वाले मज़दूरों को भी अपने दायरे से बाहर रखता है। 48 घंटों से अधिक काम कराने की इजाज़त देता है। जबकि मज़दूर हर दिन 12 घंटे और सप्ताह में 6 दिन काम करने के लिए मजबूर हैं। कार्यस्थल पर सुरक्षा, स्वास्थ्य और काम की हालतें संहिता विधेयक मज़दूरों की काम की मौजूदा घटिया हालतों को एक कानूनी मान्यता देता है। यह महिलाओं के रात्रि पाली में काम करने को भी कानूनी मान्यता देता है, कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा की कोई भी गारंटी नहीं देता है।

कोई मज़दूर प्रबंधन के खि़लाफ़ शिकायत नहीं कर सकता है और न ही ट्रेड यूनियनों की मदद ले सकता है। ट्रेड यूनियनों की भूमिका को पूरी तरह से ख़त्म कर दिया गया है।

अभियान के तहत मज़दूरों को समझाया गया कि हिन्दोस्तान में लोकतंत्र नहीं है यह पूंजीतंत्र है इसलिये ये सभी कानून बदलते जा रहे हैं ताकि देशी-विदेशी पूंजीपति मज़दूरों का शोषण करके बेशुमार मुनाफ़ा बना सकें। श्रम कानून विधेयक लोक-विरोधी, समाज-विरोधी, राष्ट्र-विरोधी, मज़दूर और किसान-विरोधी हैं। इन्हीं पूंजीवादी नीति के चलते हमारे देश के सरमायदार दुनिया के सरमायदारों के बराबर हो गये हैं और हमारे देश की पूंजी दूसरे देश में लगा रहे हैं ताकि वहां के मज़दूरों का शोषण कर सकें। वक्ता ने बताया कि देश की दौलत के 70 प्रतिशत पर एक प्रतिशत पूंजीपतियों का कब्ज़ा है और उत्पादन के साधनों पर चंद पूंजीवादी घरानों का कब्ज़ा है। वे ही फैसला करते हैं कि किसकी सरकार बनेगी। वे ही देश की संसद से लेकर अर्थव्यवस्था को चलाते हैं। इसलिये सारे कानून इन्हीं के पक्ष में बनाये जाते हैं। इसमें हम मज़दूरों की मांगों की कोई सुनवाई नहीं होती।

मज़दूर वर्ग को सभी उत्पादन के साधनों को अपने हाथों में लेना होगा। यही एक रास्ता है जिससे मज़दूर वर्ग और किसानों की दुर्दशा को दूर किया जा सकता है।

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वेतन संहिता विधेयक    Sep 16-30 2019    Struggle for Rights    Privatisation    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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