निजी कंपनी और बिजली विभाग के खिलाफ़ क्रमिक भूख हड़ताल जारी

राजस्थान के हनुमानगढ़ की नोहर तहसील में बिजली कंपनियों की लूट के खि़लाफ़ चलाया जा रहा संघर्ष अब और तेज़ हो गया है। अब बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति की अगुवाई में 13 सितंबर से एस.डी.एम. कार्यालय के समक्ष क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर दी गई है। समिति ने निर्णय लिया है कि गांव-गांव में घर-घर जाकर हस्ताक्षर अभियान चलाया जायेगा। पहले चरण में 10,000 हस्ताक्षरों के साथ मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा जायेगा।

संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो आम जनता को सड़क पर उतरकर आंदोलन करने के लिये मजबूर होना पड़ेगा।

अपने संघर्ष को आगे बढ़ाते हुये समिति ने इस संदर्भ में ऊर्जा विनियामक आयोग के अध्यक्ष को एक पत्र लिखकर अपनी मांगों पर ध्यान देने को कहा है। पत्र में कहा गया है कि बिजली की दरों में की जाने वाली बढ़ोतरी को तुरंत रोक दिया जाये।

Serial hunger strike

समिति की ओर से लिखे पत्र में यह मांग की गई है कि स्थाई शुल्क के नाम पर की जा रही पैसे की वसूली पर तुरंत रोक लगाई जाये। 200 यूनिट बिजली मुफ्त मुहैया कराई जाये। कंपनी द्वारा लगाये गये तेज़ चलने वाले मीटरों की जगह पर सही मीटर लगाये जायें।

समिति का कहना है कि राजस्थान में किसी भी पार्टी की सरकार रही हो उसने निजीकरण को बढ़-चढ़कर बढ़वा दिया है। लोगों पर निजी कंपनियों द्वारा लादे जा रहे मनमाने शुल्कों पर कोई कार्यवाही नहीं की है। बिजली विभाग ने तीनों निजी कंपनियों को फायदा पहंुचाने के लिये पूरे राजस्थान में बिजली की दरों में बढ़ोतरी की है।

समिति की मांग है कि यह बढ़ोतरी तुरंत रोकी जाये। यह राजस्थान की किसान आबादी और अधिकांश बेरोज़गार मज़दूरों पर भारी बोझ है। दरों में बढ़ोतरी के लिये यह बहाना दिया जा रहा है कि कंपनियों को घाटा हो रहा है। लेकिन सच तो यह है कि इन कंपनियों ने नुकसान को कम करने के लिये कोई क़दम नहीं उठाया। बिजली के सामानों की खरीदी में होने वाले घोटालों को कम करने के लिये भी कोई क़दम नहीं उठाया।

विदित रहे कि इस संघर्ष की शुरुआत में 4 सितंबर से 12 सितंबर तक गोगामेढ़ी स्थित बिजली दफ्तर के सामने धरना दिया गया। मांग की गई कि सरकार लोगों की समस्याओं पर ध्यान देते हुये इन कंपनियों की मनमानी पर रोक लगाये। सरकार बिजली विभाग को आदेश दे कि निजी कंपनियां राजस्थान के उपभोक्ताओं से मनमाना वसूली बंद करें।

धरने में रोज़ाना सैकड़ों लोग हिस्सा ले रहे हैं। वे अपने संघर्ष को मांगें पूरी होने तक चलाने के लिये अडिग हैं। संघर्ष समिति के नेताओं सहित लोक राज संगठन के सर्व हिन्द उपाध्यक्ष हनुमान प्रसाद शर्मा सहित, संगठन के सदस्य इसमें लगातार शामिल हो रहे हैं और संघर्ष को अपना समर्थन प्रकट कर रहे हैं।

लोगों की मांग है कि :

  • सिक्युरिटी राशि (अतिरिक्त प्रतिभूति राशि) के नोटिस को विभाग तुरंत निरस्त करे।
  • स्थाई सेवा शुल्क के रूप में वसूली जा रही राशि को तत्काल बंद किया जाये।
  • प्रत्येक परिवार के लिये 200 यूनिट तक बिजली मुफ्त दी जाये।
  • बिजली बिलों में भारी अनियमितताओं के तुरंत ठीक किया जाये।
  • ख़राब और तेज़ गति से चलने वाले बिजली के मीटरों को बदला जाये। ऐसे घटिया मीटर बनाने वाली कंपनी के खि़लाफ़ कार्यवाही की जाये।
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क्रमिक भूख हड़ताल    Oct 1-15 2019    Struggle for Rights    Privatisation    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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