कोल इंडिया में 100 प्रतिशत एफ.डी.आई. के ख़िलाफ़ मज़दूरों की हड़ताल

ऑल इंडिया कोल वर्कर्स फेडरेशन के नेतृत्व में, कोल इंडिया लिमिटेड (सी.आई.एल.) और सिंगरेनी कोलियरीज के 5 लाख से भी ज्यादा मज़दूरों ने हड़ताल की। यह हड़ताल कोयला खनन में केन्द्र द्वारा 100 प्रतिशत एफ.डी.आई. की अनुमति देने के 24 सितंबर के फैसले के ख़िलाफ़ थी।

Coal workers demonstrating against 100% FDI

असम से सिंगरेनी तक सभी खादानों से कोयले के उत्पादन, परिवहन और प्रेषण के कामों में लगे सभी कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुये। हड़ताल से एक सप्ताह पहले, इंडियन नेशनल माइनवर्कर्स फेडरेशन (आई.एन.टी.यू.सी.), हिंद खदान मज़दूर फेडरेशन (एच.एम.एस.), इंडियन माइनवर्कर्स फेडरेशन (ए.आई.टी.यू.सी.), ऑल इंडियन कोलवर्कर्स फेडरेशन (सी.आई.टी.यू.) और ए.आई.सी.सी.टी.यू. ने कोयला खनन में 100 प्रतिशत एफ.डी.आई. को वापस लेने की अपनी मांग को केंद्रीय खान मंत्रालय के सामने रखा था। भारतीय मज़दूर संघ (बी.एम.एस.), जो एक दिवसीय हड़ताल में शामिल नहीं था, वह इसी मुद्दे पर 23 से 27 सितंबर की तारीख तक पांच दिवसीय हड़ताल कर रहा है। कोल इंडिया, जो एक दिन में लगभग 2 मिलियन टन कोयले का उत्पादन करती है जो देश में सूखे ईंधन के कुल उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा है। इस हलचल के कारण उसका लगभग 15 लाख टन उत्पादन घटने की संभावना है।

उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डी.पी.आई.आई.टी.) ने 18 सितंबर को कोयला उद्योग में (एफ.डी.आई.) मानदंडों में ढील देने के अपने 28 अगस्त के फैसले के बारे में सूचना दी। जिसमें कोयला खान (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 और खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के प्रावधान के अधीन कोयला बेचने, कोयला खनन गतिविधियों और संबंधित प्रसंस्करण अवसंरचना शामिल है। अब, विदेशी कंपनियां इन सभी गतिविधियों में 100 प्रतिशत निवेश कर सकती हैं।

अब तक केवल कोल इंडिया लिमिटेड (सी.आई.एल.) ही हमारे देश में कोयले का खनन या बिक्री कर सकती थी। सी.आई.एल. के साथ, निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां जिनके पास खुद की खदानें हैं, उन्हें भी केवल 25 प्रतिशत कोयला खुले बाज़ार में बेचने की अनुमति थी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मार्च 2019 में राष्ट्रीय खनिज नीति 2019 को मंजूरी दी थी। नीति के विजन स्टेटमेंट में घोषणा की गई है कि “खनिज एक मूल्यवान प्राकृतिक संसाधन है जो अर्थव्यवस्था के मुख्य क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण कच्चा माल है। खनिजों की खोज, निष्कर्षण और प्रबंधन को राष्ट्रीय लक्ष्यों और दृष्टिकोणों द्वारा निर्देशित किया जाना चाहिए। कोशिशें होनी चाहिए की घरेलू उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए, आयात निर्भरता को कम किया जाए और मेक इन इंडिया पहल में ज़ोर दिया जाए।” कोयला खनन में 100 प्रतिशत एफ.डी.आई. की घोषणा इस उल्लेखित विजन के विपरीत है और एक बार फिर हिन्दोस्तानी शासक वर्ग का दोगलापन सामने लाता है। बड़े नीतिगत बयान दिए जाते हैं और असली गतिविधियां ठीक उसके विपरीत होती हैं!

कोयला खनन के क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफ.डी.आई. की अनुमति देने के सरकार के क़दम का कोयला मज़दूरों का विरोध इसलिए जायज़ है क्योंकि यह क़दम दोनों मज़दूर-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी है।  

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Oct 1-15 2019    Struggle for Rights    Privatisation    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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