अपनी मांगों के लिये उत्तर प्रदेश के किसानों का दिल्ली तक जुलूस

उत्तर प्रदेश के हजारों किसानों ने सरकार को अपनी मांगें प्रस्तुत करने के लिये, 21 सितम्बर को, भारतीय किसान संघ (बी.के.एस.) के झंडे तले, दिल्ली की तरफ कूच किया।

UP Caneshugar farmers march to Delhi (file photo)

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों से आये किसान 19 सितम्बर को नोएडा में इकट्ठा हुए। अगली सुबह उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गन्ना किसानों की बकाया राशि न देने व बढ़ते बिजली की दरों पर ध्यान दिलाने के लिये दिल्ली के किसान घाट तक जुलूस प्रदर्शन निकाला। वे ग़ाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली और बागपत से बी.के.एस. के बैनर तले आये थे। उनकी मांग है कि गन्ने की बकाया राशि चार दिनों में मिलनी चाहिये, किसानों के लिये बिजली का बिल घटाकर 100 रुपये प्रति माह किया जाये और खेती के लिये लिया गया पूरा ऋण माफ़ किया जाना चाहिये।

जुलूस प्रदर्शन को उत्तर प्रदेश की सीमा पर रोक दिया गया। बाद में, किसानों ने कृषि मंत्रालय के अधिकारियों से मीटिंग की। किसानों को आश्वासन दिया गया कि केन्द्र सरकार उनकी बकाया राशि का 14 दिन के अंदर भुगतान सुनिश्चित करेगी और उत्तर प्रदेश सरकार को यह हिदायत देगी कि गायों के लिये दैनिक भत्ते को बढ़ाये; कि हिंडन व काली नदी को प्रदूषण-मुक्त करने के लिये अभियान चलाया जायेगा। उन्हें यह भी आश्वासन दिया गया कि फसलों के लिये न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने में उनकी और भागीदारी होगी।

खोखले आश्वासन सुनने के अपने पहले के अनुभव के आधार पर बी.के.एस. ने प्रतिज्ञा ली है कि वे सरकार पर कड़ी निगरानी रखेंगे।

 उत्तर प्रदेश के किसानों की मांगें

  1. सभी किसानों के कर्ज़ों को पूरी तरह माफ़ किया जाये।
  2. किसानों को सिंचाई के लिये निःशुल्क बिजली मिलनी चाहिये।
  3. किसानों को निःशुल्क शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा मिलनी चाहिये।
  4. 60 वर्ष से ऊपर के किसानों व श्रमिकों को 5,000 रुपये प्रति माह की पेंशन मिलनी चाहिये।
  5. फसलों की क़ीमतें किसानों के प्रतिनिधियों के सामने निर्धारित की जानी चाहिये।
  6. किसानों को दुर्घटना बीमा योजना को फ़ायदा मिलना चाहिये।
  7. जो आवारा पशुओं की देखभाल करते हैं, उन्हें 300 रुपये प्रति दिन का मुआवज़ा मिलना चाहिये।
  8. किसानों को गन्ने की खरीदी भुगतान ब्याज के साथ समय पर मिलना चाहिये।
  9. सभी प्रदूषित नदियों को प्रदूषण-मुक्त करना चाहिये।
  10. स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करना चाहिये।
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दिल्ली तक जुलूस    Oct 1-15 2019    Struggle for Rights    Privatisation    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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