वेतन संहिता विधेयक के विरोध में

संपादक महोदय,

मज़दूर एकता लहर के 1 से 15 अगस्त के अंक में प्रकाशित वेतन संहिता विधेयक के बारे में पढ़ा और उससे पता लगा कि न्यूनतम वेतन की परिभाषा बहुत अन्यायपूर्ण है तथा यह करोड़ों-करोड़ों मज़दूरों और किसानों के शोषण का कानून है। मैं पार्टी का आभारी हूं कि बहुत ही उचित समय पर विधेयक के ऊपर बहुत ही अच्छा विश्लेषण प्रस्तुत किया है। यह अंक इस मायने में भी महत्व का है क्योंकि सरकार ने जो न्यूनतम वेतन की राशि निर्धारित की है वह प्रत्येक दिन 178 रुपये यानी महीने के लिये 4,680 रुपये है, जबकि 7वें वेतन आयोग ने जो राशि निर्धारित की थी वह 18,000 रुपये प्रतिमाह थी। अगर इस विधेयक को लागू किया जाता है तो हम समझ सकते हैं कि क्या होगा। बड़े स्वामित्व वाली कंपनी या संस्था को मज़दूर को प्रताड़ित करने का आसान मौका मिल जायेगा।

आज की मौजूदा महंगाई की बात की जाये तो दाल की क़ीमत 120 से 150 रुपये, खाद्य तेल 120 से 150 और अन्य सामानों का जो दैनिक जीवन में उपयोग करते हैं, वे काफी महंगे होते जा रहे हैं। 178 रुपये के हिसाब से दैनिक मज़दूरी देश के 90 प्रतिशत असंगठित क्षेत्रों में कार्यरत मज़दूरों को प्रभावित करेगा। यदि 178 रुपये प्रतिदिन मज़दूरी मिलती है तो वह व्यक्ति अपने परिवार को किस तरह से चला पायेगा।

आज दिहाड़ी मज़दूरों की जो स्थिति है वह ऐसी है कि महीने में 10 से 12 दिन काम मिलता है तथा 200 से 300 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मज़दूरी मिलती है। उन्हें महीने में 2,400 से 3,600 रुपये मिलते हैं। इसका मतलब है कि 5 सदस्यों के परिवार की बात करें तो 1 सदस्य के पीछे दिन का कुल 24 रुपया आमदनी होती है। इतनी कम आमदनी में वह परिवार कैसे गुजर-बसर कर पायेगा। कठिन काम करने वाले मज़दूरों को 2,600 से 3,000 कैलरीज उर्जा युक्त भोजन की आवश्यकता होती है पर मिलता है 24 रुपया। वह कैसे 24 रुपये में 3 टाईम का भोजन जुटा पायेगा।

इसलिये मज़दूरों, कब तक चुप बैठोगे?

छीनी शिक्षा हम से, छीना स्वास्थ, अब मार रहे हैं पेट पर लात!

सही मज़दूरी तभी मिलेगी, जब सरकार पर दबाब बनेगा!

कमरे की हवा से थोडा बाहर निकलिये, चिलचिलाती धूप, ठिठुरती ठंड और मूसलाधार वर्षा में निकलिये तब मालूम पड़ेगा कि देश का रेल मज़दूर क्या कर रहा है और उसका कैसे शोषण हो रहा है।

भारतीय रेल का एक कर्मचारी

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Oct 1-15 2019    Letters to Editor    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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