सऊदी अरब के तेल संयंत्रों पर हमला : ईरान के खि़लाफ़ जंग को जायज़ ठहराने के लिए तनाव बढ़ाया

14 सितम्बर, 2019 को सऊदी अरब राज्य द्वारा चलायी जा रही अरामको कंपनी के दो प्रमुख तेल संयंत्रों पर ड्रोन द्वारा हमला हुआ जिसके बाद दोनों को बंद करना पड़ा। इन तेल संयंत्रों के बंद हो जाने से तेल उत्पादन में अस्थायी तौर पर भारी कटौती हुई है।

बिना कोई सबूत पेश किये अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने ऐलान कर दिया कि यह हमला ईरान द्वारा आयोजित किया गया है। इसके तुरंत बाद पोम्पियो ईरान के खि़लाफ़ संभावित सैनिकी हमले की तैयारी करने के लिए सऊदी अरब चले गए। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के ऊपर और अधिक आर्थिक प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया।

ईरान की सरकार ने सऊदी अरब के तेल क्षेत्रों पर हुए हमलों में अपना हाथ होने से साफ इंकार कर दिया है। साथ ही ईरान ने अमरीका द्वारा उस पर और ज्यादा आर्थिक प्रतिबंध लगाने की घोषणा की भी निंदा की है। अमरीका के दुश्मनी भरे रवैये और ईरान पर लगाये जा रहे आर्थिक प्रतिबंधों के चलते ईरान ने अमरीका के बातचीत के प्रस्ताव ठुकरा दिया है। ईरान ने ऐलान किया है कि यदि कोई देश उस पर हमला करता है तो वह उसे मुंहतोड़ जवाब देगा।

सऊदी अरब के तेल कारखानों पर ड्रोन द्वारा हमले ऐसे वक्त पर हुए हैं जब अमरीका फारस की खाड़ी में हमलावर तरीके से सैनिक तैनात कर रहा है और ईरान पर सैनिक हमले को जायज़ ठहराने के लिए तमाम तरह की भड़काऊ कार्यवाहियां आयोजित कर रहा है। इन भड़काऊ कार्यवाहियों में शामिल है, जापानी और रूसी तेल वाहक जहाजों पर अनजान ताक़तों द्वारा बम लगाना। इस तरह के हर एक हादसे के बाद अमरीका ने तुरंत ईरान को ज़िम्मेदार बताया है। ईरान ने बार-बार इन हादसों में अपना हाथ होने से साफ इनकार किया है और साथ ही साथ उसने साफ तौर से यह भी कहा है कि वह किसी भी हमलावर ताक़त से अपने इलाके के जल क्षेत्र और हवाई क्षेत्र की हिफ़ाज़त करेगा।

अमरीकी साम्राज्यवाद तेल संपदा से समृद्ध पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका पर अपना सम्पूर्ण वर्चस्व जमाने की योजना के मुताबिक काम करता आया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उसने इस इलाके के देशों के बीच आक्रामक युद्ध और गुटवादी गृहयुद्ध भड़काता आया है। अपनी इसी योजना को अंजाम देने के लिए वह जानबूझकर इस इलाके के देशों के बीच दुश्मनी भड़काता आया है। इराक और लिबिया की बर्बादी, सिरिया और यमन में गृहयुद्ध, यह सब कुछ अमरीकी रणनीति को लागू किये जाने का नतीजा है।

अंतर्राष्ट्रीय इजारेदार कंपनियों के नियंत्रण वाली मीडिया के हवाले से आ रही कुछ ख़बरों के अनुसार, यमन के “हैती बागियों” ने तथाकथित तौर से सऊदी अरब के तेल के कुओं पर हमले की ज़िम्मेदारी स्वीकार की है। अमरीका और सऊदी अरब यमन में एक ऐसी सत्ता बनाने की कोशिश करते आये हैं जो उनके इशारों पर काम करे। पिछले चार वर्षों से उन्होंने यमन पर खूनी गृहयुद्ध थोपा है। अमरीकी समर्थन के साथ सऊदी अरब की सरकार ने यमन पर बर्बर आर्थिक प्रतिबंध लगाये हुए हैं और उसके कई शहरों और गांवों को हवाई बमबारी और मिसाइल हमलों से बर्बाद कर दिया है। इन हमलों में एक लाख से अधिक पुरुष, महिला और बच्चे मारे जा चुके हैं। यमन के सशस्त्र बल जो इन हमलों का विरोध कर रहे हैं उन्हें अमरीका और सऊदी सरकार “ईरान समर्थित बागी” होने का दावा करती रहती है।

सऊदी अरब के तेल कारखानों पर हमले के तुरंत बाद अमरीकी विदेश मंत्री ने ऐलान किया कि यमन के सशस्त्र बलों के पास इस तरह के हमले करने की क़ाबिलियत नहीं है और इन हमलों के लिए ईरान ही ज़िम्मेदार है। इससे यह साफ होता है कि अमरीकी एक बनी-बनायी पटकथा के अनुसार काम कर रहा है, जिससे ईरान की घेराबंदी और उसपर सैनिकी हमले को जायज़ ठहराया जा सके। पश्चिम एशिया में अपनी रणनीति को पूरा करने के रास्ते में अमरीका ईरान के लोगों को एक मुख्य रुकावट के रूप में देखता है। इसलिए वह लगातार ईरान को अकेला करने की कोशिश करता रहता है। जबकि सऊदी अरब ने ऐलान किया है कि वह अभी इन हमलों की तहकीक़ात कर रहा है, लेकिन इस सबके बावजूद अमरीका ने एक बार फिर ईरान को हमले के लिए ज़िम्मेदार ठहराने का फैसला किया है।

ऊर्जा के स्रोतों पर अपना कब्ज़ा जमाना, यह दुनिया पर अपना दबदबा बनाये रखने के लिए अमरीकी रणनीति का एक प्रमुख हिस्सा है। पिछले कुछ वर्षों से अमरीका कच्चे तेल और गैस का एक प्रमुख निर्यातक बन गया है। ईरान, रूस और वेनेजुअला जैसे तेल उत्पादक देशों पर अमरीका ने एकतरफा प्रतिबंध थोपे हैं, जिसका विपरीत असर न केवल इन देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है, बल्कि ऐसे देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है जो तेल के आयात करते हैं। सऊदी अरब के तेल कारखानों पर हमले के तुरंत बाद अमरीका ने सऊदी अरब से आने वाले तेल की भरपाई करने के लिए हिन्दोस्तान जैसे तेल का आयातक देशों सामने अपने देश से तेल की आपूर्ति करने का प्रस्ताव रखा। यह बात अमरीका के हित में होगी यदि ईरान और सऊदी अरब जंग में एक दूसरे को और अपनी तेल संपदा को बर्बाद कर दें, जिससे अमरीका वैश्विक तेल बाज़ार में सबसे बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर सके।

अमरीका सऊदी अरब के हुक्मरान गिरोह को पश्चिमी एशिया में सबसे अधिक शक्तिशाली बनने के मंसूबों को हवा देता रहा है। इसी लक्ष्य के मद्देनज़र उसने सऊदी अरब द्वारा यमन पर चलायी रही जंग का समर्थन किया है। काफी समय से वह सऊदी अरब और गल्फ कोऑपरेशन कौंसिल (जी.सी.सी.) को ईरान के खि़लाफ़ जंग छेड़ने के लिए सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करता आया है। सऊदी अरब के हुक्मरानों ने ईरान के खि़लाफ़ अमरीकी आर्थिक प्रतिबंधों का सम्पूर्ण समर्थन किया है। लेकिन इसके साथ-साथ वह जानता है कि ईरान के खि़लाफ़ जंग में उसका देश सबसे आगे की कतार में होगा और इस वजह से उसे भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। ख़बरों के अनुसार हाल ही में अगस्त में सऊदी अरब ने अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प को बताया कि वह ईरान के साथ जंग लड़ने के लिए तैयार नहीं है। इस पृष्ठभूमि में इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता की, झूठे झंडे की कार्यवाही बतौर अमरीका ने ही सऊदी अरब के तेल कारखानों पर हमले आयोजित कराये हों जिससे सऊदी अरब को ईरान के खि़लाफ़ जंग छेड़ने के लिए उकसाया जा सके।

ईरान के राष्ट्रपति हस्सन रौहानी ने, 25 सितम्बर को संयुक्त राष्ट्र की आम सभा को संबोधित करते हुए, उनके देश पर लगाये गए प्रतिबंधों की कड़ी निंदा की। उन्होंने प्रतिबंधों को “एक महान राष्ट्र ... खास तौर पर उसकी महिलाओं और बच्चों ... की मौन हत्या” जैसा बताया। “ईरान इन गुनाहों और गुनहगारों को कभी भी नहीं भूलेगा और कभी भी माफ़ नहीं करेगा”, उन्होंने ऐलान किया।

रौहानी ने दुनिया को सावधान किया कि पश्चिम एशिया “विनाश की कगार” पर है, कि “एक ग़लत क़दम से वहां अग्निकांड शुरू हो सकता है”। उन्होंने सऊदी अरब और उस इलाके के दूसरे देशों से मांग की कि यमन में चल रहे खूंखार गृहयुद्ध को ख़त्म करने में वे ईरान के साथ एकजुट हो जायें। उन्होंने कहा कि “सऊदी अरब की सुरक्षा यमन में हमले को ख़त्म करने से सुनिश्चित होगी, न कि विदेशी ताक़तों को बुलावा देकर”। रौहानी ने ऐलान किया कि “इस इलाके की सुरक्षा तब क़ायम होगी जब अमरीकी सेना यहां से बाहर निकलेगी। अमरीकी हथियारों और दखलंदाज़ी से यहां सुरक्षा क़ायम नहीं होगी।” “अमरीका हमारा पड़ौसी नहीं है”, यह समझाते हुए उन्होंने कहा कि जब किसी घर में आग लगती है तो पड़ौसियों को एक दूसरे की मदद करनी चाहिए। ईरान के राष्ट्रपति ने फारस की खाड़ी के इलाके के सभी देशों से आह्वान किया कि वे ‘उम्मीद के गठबंधन - होरमुज शांति प्रयास’ में एकजुट हो जायें, ताकि फारस की खाड़ी, ओमान समुद्र और होरमुज जलडमरूमध्य के क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा, स्वतंत्र समुद्री यातायात और तेल व अन्य संसाधनों का निर्बाधित परिवहन सुनिश्चित हो सके।

अमरीका पश्चिमी एशिया में एक बड़ा ही ख़तरनाक खेल खेल रहा है। अपने रणनैतिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए वह पूरे इलाके को खूनी जंग में धकेलने की कोशिश कर रहा है। जो राजनीतिक ताक़तें देशों की संप्रभुता और शांति के साथ खड़ा रहना चाहती हैं, उन्हें अमरीकी साम्राज्यवाद द्वारा ईरान के लोगों और उनकी सरकार को आतंकवाद का स्रोत करार देने की कोशिश का पर्दाफाश करना चाहिए और उसकी निंदा करनी चाहिए।

Tag:   

Share Everywhere

Oct 1-15 2019    World/Geopolitics    Privatisation    Rights     War & Peace     2019   

पार्टी के दस्तावेज

thumb

 

पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

(Click thumbnail to download PDF)

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

(Click thumbnail to download PDF)

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)