सिंचाई की समस्यायें

किसानों का नोहर उपखंड कार्यालय पर प्रदर्शन

मज़दूर किसान व्यापारी संघर्ष समिति की अगुवाई में राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की नोहर तहसील के तहत आने वाले अनेक गांवों के किसानों ने सिंचाई और पानी चोरी की समस्याओं को लेकर 8 अक्तूबर को प्रदर्शन आयोजित किया। यह प्रदर्शन तहसील के उपखंड कार्यालय के समक्ष किया गया। किसानों ने तहसीलदार को सात सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे 1 नवंबर से अनिश्चितकालन धरना शुरू कर देंगे।

बड़ी संख्या में किसान रैली के रूप में उपखंड कार्यालय  पहुंचे। यहां किसानों ने राज्य सरकार व प्रशासन के खि़लाफ़ जमकर नारेबाजी की और अपना रोष प्रकट किया। नारेबाजी के बाद यहां सभा की गई। इस सभा को किसानों के प्रतिनिधियों ने संबोधित किया। सभा को संबोधित करने वालों में शामिल थे, मज़दूर किसान व्यापारी संघर्ष समिति के अध्यक्ष मदन बेनीवाल, लोक राज संगठन के सर्व हिन्द उपाध्यक्ष हनुमान प्रसाद शर्मा, पूर्व सरपंच ओम सहू के साथ-साथ समिति के अनेक किसान नेता।

वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश के अधिकतर क्षेत्रों में जमकर बारिश होने की बात को सरकार खुद मान रही है। बताया जा रहा है प्रदेश के बांधों व नहरों में पर्याप्त पानी भी उपलब्ध है। परन्तु सब कुछ होने बाद भी किसान सिंचाई के पानी को तरस रहे हैं।

किसानों के प्रतिनिधयों ने कहा कि सिंचाई का पानी उपलब्ध होने के बावजूद क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिये पर्याप्त पानी नहीं देना सरकार व प्रशासन की किसाना-विरोधी नीयत को उजागर कर रहा है। किसानों ने कहा कि पानी उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें महीने में एक बार ही सिंचाई का पानी दिया जा रहा है। क्षेत्र में ऐसी कोई फ़सल नहीं है जो महीने के एक बार पानी मिलने पर क़ायम रह सके। ऐसे में पखवाडे़ भर बाद सिंचाई का पानी देने से ही किसान फ़सल का उत्पादन कर सकेगा।

सभा के बाद किसानों ने तहसीलदार को ज्ञापन देकर मांग की कि - अमरसिंह ब्रांच में निर्धारित सिंचाई का पानी दिया जाये, वितरिकाओं की बाउंड्री निकालकर वहां उगे पेड़ हटाये जायें, नहरों व मइनरों की मरम्मत करवाई जाये, सिंचाई के पानी की चोरी पर अंकुश लगाया जाये, न्यायालय के आदेशानुसार शेष रहे मोघों को सही करवाया जाये, डिच माइनर निकालकर आसपास की भूमि को सिंचित किया जाये तथा खालों पर अवैध चिनाई को तोड़ा जाये। किसानों के नेताओं ने तहसीलदार को चेतावनी दी कि यदि मांगें शीघ्र पूरी न नहीं की गईं तो 1 नवंबर से अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जायेगा।

इस मौके पर रघुवीर छींपा, सिकंदर अराई, जुगलाल खाती, रामेश्वर कुम्हार, रज्जाक मोहम्मद, कुंभाराम सिंगाठिया, कन्हैयालाल जैन, कृष्ण नोखवाल, मोहन नुंईया, सुमेर सिंह राजपूत, आदि मौजूद रहे।

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Nohar    Oct 16-31 2019    Struggle for Rights    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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