कामरेड शेखर कापुरे के देहांत पर हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी शोक व्यक्त करती है!

25 सितम्बर, 2019 की सुबह को कामरेड शेखर कापुरे का देहांत टिटवाला, मुबंई में उनके निवास स्थान पर हो गया। वे 59 वर्ष के थे और “एस.के.” के नाम से लोकप्रिय थे।

Comrade SK

1998 में जब से वे पार्टी के साथ जुड़े थे, उस समय से 20 वर्ष से अधिक समय के लिए वे कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के लड़ाकू साथी बने रहे। उनका जन्म महाराष्ट्र के नांदेड जिले में खुशनूर में हुआ था। यहां से अपनी स्कूल की शिक्षा और स्नातक की पढ़ाई करने के बाद वे कानून की पढ़ाई करने के इरादे से मुंबई आए। यहां पर पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने एक गारमेंट फैक्ट्री में पार्ट टाइम काम करना शुरू कर दिया ताकि वे अपने कॉलेज की फीस और रहने-खाने का खर्चा पूरा कर सकें। लेकिन गारमेंट फैक्ट्री में मज़दूरों के काम की दयनीय हालत को देखते हुए, जल्द ही उन्होंने मज़दूरों को इन हालातों के ख़िलाफ संगठित करना शुरू कर दिया। वे इस काम में इतने व्यस्त हो गए कि उन्होंने पढ़ाई छोड़कर अपना पूरा समय मज़दूरों को संगठित करने में समर्पित कर दिया। अपने अन्य लड़ाकू साथियों के साथ मिलकर 1998 में उन्होंने लड़ाकू गारमेंट मज़दूर संघ (एल.जी.एम.एस.) की स्थापना की।

गारमेंट मज़दूरों के संघर्ष के दौरान उनकी मुलाक़ात अपनी जीवन संगिनी लता के साथ हुई, जो कि एल.जी.एम.एस. की एक अगुवा लड़ाकू सदस्य थीं।

गारमेंट उद्योग के चालाक मालिकों के साथ संघर्ष में एस.के. और उनके साथियों को कई बार फैक्ट्री इंस्पेक्टर, प्रोविडेंट फण्ड कमिश्नर और श्रम न्यायालयों के चक्कर काटने पड़े। यह बेहद थकाने वाला काम था और इसके लिए संयम और निष्ठा की ज़रूरत पड़ती थी। लेकिन पार्टी की अगुवाई में एल.जी.एम.एस., मज़दूरों के अधिकारों के लिए बिना कोई समझौता किये लड़ने वाले संगठन बतौर जाना जाने लगा। 125 से अधिक गारमेंट कारखानों के मज़दूर एल.जी.एम.एस. में संगठित हुए। कामरेड एस.के. ने अन्य अगुवा साथियों के साथ मिलकर अपनी पहल शक्ति, कुशलता और ईमानदारी के साथ एल.जी.एम.एस. को अगुवाई दी। एस.के. ने जिस अडिगता और जूनून के साथ मज़दूरों के संघर्षों को अगुवाई दी, उससे उन्हें मज़दूरों का ढेर सारा प्यार और वफ़ादारी हासिल हुई।

एस.के. को मार्क्सवाद और लेनिनवाद को सीखने और समझने का जुनून था और पार्टी द्वारा आयोजित अध्ययन सत्रों में वे पूरे जोश के साथ हिस्सा लेते थे। मार्क्स, एंेगल्स, लेनिन और स्टालिन के लिए उनके दिल में गहरा आदर था। वे इस बात को बार-बार गर्व से दोहराते थे कि किस तरह से मज़दूर वर्ग के इन महान शिक्षकों ने आज से 100 वर्ष से भी अधिक समय पहले पूंजीवादी शोषण का सटीक विश्लेषण प्रस्तुत किया था, जो कि आज भी उतना ही प्रासंगिक है।

एस.के. न केवल गारमेंट मज़दूरों के साथ हो रही नाइंसाफी के ख़िलाफ़ पूरे जूनून के साथ लड़ते थे बल्कि पार्टी ने उन्हें जहां कहीं संघर्ष संगठित करने के लिए भेजा, वहां उन्होंने पूरी ईमानदारी के साथ अपना फ़र्ज़ निभाया। उन्होंने वर्ली, उल्हासनगर, भिवंडी और उसके आस-पास के गांवांे में राशन की व्यवस्था को सुधारने के लिए कई संघर्षों को अगुवाई दी। उन्होंने सबसे पहले टिटवाला में रेलवे पैसेंजर एसोसिएशन की स्थापना करने में अगुवाई दी और टिटवाला स्टेशन पर लोगों के लिए व्यवस्था में सुधार के लिए संघर्ष किया। डोम्बिवली, कल्याण, बदलापुर और दिवा स्टेशन पर भी पार्टी की अगुवाई में इस तरह के आंदोलन खड़े करने में उन्होंने अपनी भूमिका अदा की। लोगों के संघर्षों में वे हमेशा आगे रहते थे और जब कभी उनके सामने पुलिस समेत कोई अन्य रुकावट आती तो वे अपने बरसों के अनुभव का इस्तेमाल करते हुए इन रुकावटों का पार कर जाते और अधिकारियों को लोगों की मांग पर गौर करने के लिए मजबूर कर देते।

उनके क्रांतिकारी जज़्बे से सभी वाकिफ थे और पार्टी की मीटिंगों में अपने इस जज़्बे को क्रांतिकारी गीतों और कविताओं के रूप में पेश करते, जिनमें हिन्दोस्तान के मेहनतकश लोगों की दुःख, तकलीफों के साथ-साथ उनकी आकांक्षाएं झलकती थीं और सुनने वालों के दिल को छू जाती थी।

उनकी इस असामयिक मृत्यु से कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी ने मज़दूर वर्ग का एक ऐसा योद्धा खो दिया है, जिसने हमेशा मज़दूरों और सभी मेहनतकशों के हक़ में, एक मानवीय समाज का निर्माण करने के लिए संघर्ष किया है। वे अपने पीछे अपनी जीवन संगिनी और कामरेड को छोड़ गए हैं जिन्होंने उनकी बीमारी की हालत में अंतिम सांस तक उनकी देखभाल की, ताकि वे हर बार ठीक होकर पार्टी के एक सैनिक बतौर लगातार काम करते रहें।

पार्टी के सभी कामरेड और ख़ास तौर से वे कामरेड जिन्हें उनके साथ क़रीब से काम करने का मौका मिला है, वे कामरेड एस.के. की खुशनुमा और आशावादी मौजूदगी को नहीं भूला पायेंगे।

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Oct 16-31 2019    Voice of the Party    2019   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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