परेल रेलवे वर्कशाप बंद करने के खि़लाफ़ मज़दूरों का विरोध

अक्तूबर 2017 में रेलवे बोर्ड ने मुम्बई के परेल वर्कशॉप को बंद करके उसकी जगह पर एक यात्री टर्मिनस बनाने का प्रस्ताव रखा था। वहां के मज़दूर तभी से इस मज़दूर-विरोधी, समाज-विरोधी प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं।

4 अक्तूबर, 2019 को मध्य रेलवे के जनरल मैनेजर ने रेलवे बोर्ड को ठोस प्रस्ताव दिये कि: 1) आज जो कार्य परेल वर्कशॉप में हो रहे हैं, उनको माटुंगा, जबलपुर तथा कुर्दुवाडी जैसे वर्कशॉपों में स्थानांतरित किये जाएं, 2) आज वहां जो 2500 मज़दूर कार्यरत हैं, उन्हें माटुंगा (मुम्बई) तथा बडनेरा (जो महाराष्ट्र के अमरावती जिले में स्थित है) में स्थानांतरित किया जाए।

परेल वर्कशॉप के मज़दूं ने तुरंत ‘लोको कारखाना (परेल) बचाव समिति’ का गठन किया। सेंट्रल रेलवे मज़दूर यूनियन, एस.सी. एंड एस.टी. एसोसिएशन, रेल कामगार सेना, सेंट्रल रेलवे इंजीनियर्स एसोसिएशन, महाराष्ट्र नव-निर्माण रेल कामगार सेना, ओ.बी.सी. एसोसिएशन तथा रेल मज़दूर यूनियन सहित मज़दूरों की सभी प्रमुख यूनियनें इस झंडे तले एक साथ आईं।

11 अक्तूबर को इस समिति के झंडे तले परेल वर्कशॉप के सैकड़ों मज़दूरों ने मुम्बई के चीफ मैकेनिकल इंजीनियर के आफिस तक जुलूस निकाला, जनरल मैनेजर ने रेलवे बोर्ड को जो प्रस्ताव दिये थे, उनका विरोध किया तथा ज्ञापन पेश किया। इसके खिलाफ़ 14 अक्तूबर को नेशनल रेलवे मेन्स यूनियन ने वर्कशॉप के भीतर एक प्रदर्शन किया।

मज़दूरों के द्वारा पेश किया गया ज्ञापन स्पष्ट करता है कि अधिकारियों की चाल न केवल मज़दूर-विरोधी है, बल्कि समाज-विरोधी भी है।

परेल वर्कशॉप सेंट्रल रेलवे का सबसे पुराना वर्कशॉप है, जिसे 1879 में स्थापित किया गया था। इसे इंजनों की मरम्मत के लिए स्थापित किया गया था, लेकिन 2005 से नैरो गेज तथा ब्राड गेज, दोनों के लिए वहां इंजन निर्माण शुरू हुआ। 140 टन कावन्स शेल्डन डी.बी.डी. क्रेनों का सामयिक ओवरहाल, नैरो गेज हेरिटेज इंजन निर्माण, डिब्बों तथा इंजनों के लिए 8,000 व्हील सेट निर्माण, इत्यादि कार्य यहां किये जाते हैं, जिन्हें करने की क़ाबिलियत हिन्दोस्तान के किसी और वर्कशॉप में नहीं है।

अभी हाल ही में रेलवे ने परेल वर्कशाप में आई.सी.एफ. कोचों की मरम्मत के लिए 50 करोड़ रुपये खर्च किये हैं। और एल.एच.बी. कोचों की मरम्मत के लिए 88 करोड़ रुपये पारित किये हैं। इन कोचों का इस्तेमाल 10 साल पहले सेंट्रल रेलवे में शुरू हुआ था। सेंट्रल रेलवे को इसकी सख्त ज़रूरत है।

अधिकारी इतनी महत्वपूर्ण वर्कशॉप को क्यों बंद कर रहे हैं? वे जनता का इतना पैसा क्यों बर्बाद कर रहे हैं? टर्मिनस बनाने के लिए जो पूर्व तैयारी आवश्यकता है, वह शुरू भी नहीं हुई है जैसे भूमि संपादन, करोल के ओवरब्रिज को और चौड़ा बनाना, इत्यादि। परेल वर्कशॉप के 2,500 मज़दूरों के तथा उनकी यूनियनों के साथ मशवरा किये बिना वे आगे बढ़ रहे हैं। इससे उनके सच्चे इरादे स्पष्ट होते हैं।

भूमि के अलावा परेल वर्कशॉप में 1140 करोड़ रुपये की संपत्ति है। मुम्बई शहर के बीचों-बीच उसकी 45 एकड़ ज़मीन है, जिसका मूल्य 10,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है। मज़दूरों ने समझ लिया है कि बड़े-बड़े पूंजीवादी बिल्डरों की लालची नज़र उस ज़मीन पर है और रेलवे अधिकारी उनकी ताल पर नाच रहे हैं।

इस वर्कशॉप से सटी हुई जो रेलवे कॉलोनी है, उसमें मज़दूरों के 600 परिवारों के रहने का प्रावधान है। टर्मिनस के लिए उन घरों को भी गिराया जाएगा। उन मज़दूरों को वैकल्पिक जगह देने के लिये रेलवे के पास कोई भी योजना नहीं है। इसका मतलब है कि मुम्बई में पहले से ही रेल मज़दूरों के लिए रहने की जगह की कमी है जिसमें और वृद्धि हो जाएगी। विशेष तौर पर इंजन चालक, स्टेशन मास्टर, गार्ड जैसे आपातकालीन कर्मचारियों के लिए बहुत ज़रूरी है कि उनके रहने की जगह मुख्यालय के नजदीक हो।

डॉक्टर आंबेडकर रोड मुम्बई की एक प्रमुख सड़क है, जो वर्कशॉप के समीप है और पहले से ही उस पर भारी ट्रैफिक रहता है। वहां अगर रेल टर्मिनस आ जाएगा तो यह समस्या और गहरी हो जाएगी। रेलवे ने खुद ही जो अंतरराष्ट्रीय सलाहकार नियुक्त किये थे, उनके मुताबिक नये टर्मिनस बहुत ज्यादा भीड़वाले शहर के बीच में नहीं, बल्कि उपनगरों में बनाने की ज़रूरत है, क्योंकि अधिकतम लोग वहीं रहते हैं। परेल में अगर टर्मिनस बनाया जाएगा तो बारिश का पानी इकट्ठा होने की समस्या और गहरी हो जाएगी।

मज़दूर एकता लहर रेलवे मज़दूरों की जायज़ मांगों का पूरा समर्थन करती है और उन्हें आह्वान करती है कि बड़े पूंजीवादी रियल स्टेट डेवेलेपर के खुदगर्ज़ हितों के लिए एक पूरे कार्यरत वर्कशॉप को बंद करने की अधिकारियों की योजना का वे एकजुट होकर विरोध करें।     

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Nov 1-15 2019    Struggle for Rights    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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