मुम्बई में रेल मज़दूरों ने निजीकरण तथा नयी पेन्शन योजना का विरोध किया

18 अक्तूबर, 2019 को मुम्बई में सैकड़ों रेल मज़दूरों ने निजीकरण की तरफ बढ़ाये जा रहे रेल मंत्रालय के क़दमों का तथा मज़दूर-विरोधी नयी पेन्शन योजना (एन.पी.एस.) का विरोध किया। यह विरोध प्रदर्शन आल इंडिया ट्रैकमेन्टेनर्स यूनियन (ए.आई.आर.टी.यू), इंडियन रेलवेज़ सिग्नल एंड टेलिकॉम मेन्टेनर्स यूनियन (आई.आर.एस.टी.एम.यू), वेस्टर्न रेलवे एम्पलाइज़ मूवमेंट फार ओल्ड पेन्शन स्कीम (डब्ल्यू.आर.ई.एम.ओ.एस.) तथा रेल मज़दूर यूनियन (आर.एम.यू.) ने आयोजित किया था।

Rail workers
Rail workers

विरोध कार्यक्रम की शुरुआत में सुबह 10 से 11 बजे तक लोअर परेल रेलवे इंस्टीट्यूट में रेल मज़दूरों की जनसभा हुई। कामरेड अवनीश कुमार, ए.आई.आर.टी.यू के राष्ट्रीय प्रवक्ता, कामरेड सुशांत पांडा, आई.आर.एस.टी.एम.यू के सचिव तथा कामरेड आलोक प्रकाश डब्ल्यू.आर.ई.एम.ओ.एस. के सचिव ने सभा को संबोधित किया। उन्होंने घोषणा की कि रेलवे मज़दूर न निजीकरण को मानेंगे और न ही एन.पी.एस. को। उन्होंने कहा कि एन.पी.एस. उन मज़दूरों के लिए लागू किया गया था जिन्होंने 2004 के बाद रेल सेवा में प्रवेश किया था। आज रेल मज़दूरों में उनकी कुल संख्या तकरीबन 40 प्रतिशत है और यह बहुत ज़रूरी है कि हम एन.पी.एस. के खि़लाफ़ अपना आंदोलन और मजबूत करें।

कामगार एकता कमिटी (के.ई.सी.) के सचिव कामरेड मैथ्यू ने कहा कि सरकार सिर्फ रेलवे का ही नहीं, बल्कि एयर इंडिया, बी.एस.एन.एल., बी.पी.सी.एल., इत्यादि का भी निजीकरण करने जा रही है। वे पूर्णतः उन नीतियों को लागू कर रहे हैं जो 150 बड़े इजारेदार पूंजीवादी घरानों के हित में हैं। उनका विरोध करने के लिए हमें सिर्फ सब मज़दूरों की एकता ही नहीं बनानी होगी बल्कि हमें यात्रियों के बीच भी जाना पड़ेगा और उन्हें समझाना होगा कि कैसे रेल का निजीकरण उनके हितों के खि़लाफ़ है। उन्होंने विरोध करने वाली सब यूनियनों से आह्वान किया कि वे कामगार एकता कमिटी द्वारा शुरू की गई मुहिम से जुड़ जाएं तथा यात्रियों के बीच प्रचार करें। इस प्रस्ताव का सबने बड़े उत्साह के साथ अनुमोदन किया।

जनसभा के बाद सब मज़दूरों ने लोअर परेल वर्कशॉप के चीफ मैकेनिकल इंजीनियर्स आफिस तक जलूस निकाला और अपनी मांगें पेश कीं। वहां से वे मुम्बई सेंट्रल के डिविजनल रेलवे प्रबंधक के कार्यालय पर गये और दोपहर के 1 से 2 बजे तक उन्होंने अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा।

भारतीय रेल के मज़दूरों की जायज़ मांगों का मज़दूर एकता लहर समर्थन करती है।

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Nov 1-15 2019    Struggle for Rights    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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