तेलंगाना सरकार के हमलों के बावजूद परिवहन मज़दूरों का संघर्ष

जैसा कि मज़दूर एकता लहर के पिछले अंक में रिपोर्ट किया गया था, कि तेलंगाना स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन (टी.एस.आर.टी.सी.) के तकरीबन 50,000 मज़दूर 5 अक्तूबर से हड़ताल कर रहे हैं। मज़दूरों की प्रमुख मांगें हैं कि राज्य परिवहन निगम के निजीकरण को रोका जाये, बकाया वेतन का भुगतान किया जाये, 2017 से नियत वेतनमानों में संशोधन किया जाये, बसों के नये बेड़े की खरीद की जाये, महिला मज़दूरों के लिये अतिरिक्त सुविधाओं को बहाल कराने के क़दम लिये जायें, इत्यादि। निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूरों की स्पष्ट मांग को राज्य सरकार हठ से ठुकराती आयी है। सरकार ने घोषणा कर दी है कि जो भी टी.एस.आर.टी.सी. मज़दूर काम पर नहीं लौटते, उनके बारे में माना जायेगा कि उन्होंने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। और, कि अगर वे हड़ताल नहीं बंद करते हैं तो पूरी की पूरी परिवहन सेवा का निजीकरण कर दिया जायेगा।

TSRTC Rally

हैदराबाद के सरूरनगर इन्डोर स्टेडियम में सफल रैली

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हड़ताल तब शुरू हुई जब तेलंगाना की सरकार ने घोषणा की थी कि कुल 10,400 बस मार्गों में से करीब-करीब आधे को निजी हाथों में सौंप दिया जायेगा। सरकार का कहना है कि नया मोटर वाहन कानून (2019), सार्वजनिक परिवहन सेवा को पूरी तरह से सरकार के हाथ में छोड़ता है और उसको इसके बारे में कोई भी निर्णय लेने की ताक़त देता है - निजीकरण करने की भी। सरकार ने मज़दूरों का सितम्बर का वेतन नहीं चुकाया है जबकि मज़दूर सितम्बर महीने में हड़ताल पर भी नहीं थे। मज़दूरों को बहुत ही अनिश्चितता और मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। एक महीने के अंदर ही, कम से कम पांच मज़दूरों ने आत्महत्या कर ली है और एक दर्जन से भी अधिक लोग डिप्रेशन या हृदय गति रुकने की वजह से मर गये हैं।

टी.एस.आर.टी.सी. के मज़दूरों ने सरकार के हमलों के सामने घुटने टेकने से इंकार कर दिया है और बहुत दृढ़ता के साथ संघर्ष को आगे ले जा रहे हैं। उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में, 30 अक्तूबर 2019 को सकला जनूला समरा भेरी में लोगों को बड़ी संख्या में आने का बुलावा दिया था।

30 अक्तूबर के दिन हैदराबाद के सरूरनगर इन्डोर स्टेडियम में एक बहुत ही सफल रैली हुई, जिसमें इतने लोग आये कि स्टेडियम पूरी तरह से भर गया था और दसों हजारों लोगों को अंदर तक आने की जगह नहीं मिली। हजारों लोग स्टेडियम तक पहुंच नहीं पाये क्योंकि पुलिस उन्हें पहले ही हिरासत में ले लिया था। टी.एस.आर.टी.सी. के यूनियनों की संयुक्त एक्शन कमेटी ने खुले स्टेडियम में रैली करने का निर्णय लिया था परन्तु सरकार ने उसे अनुमति नहीं दी। छात्रों व शिक्षकों के संगठनों और विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक संगठनों ने रैली का समर्थन किया और रैली को संबोधित किया। एक के बाद एक वक्ताओं ने तेलंगाना सरकार के परिवहन निगम के निजीकरण की योजना की व उसकी मज़दूर-विरोधी व जन-विरोधी कार्यवाइयों की कड़ी निंदा की।

लोग व्यापक रूप से सरकार का विरोध कर रहे हैं, सरकार ने एक बार फिर हड़ताली मज़दूरों को अंतिम चेतावनी दी है कि उन्हें 5 नवम्बर तक हड़ताल ख़त्म करनी होगी, नहीं तो सभी को नौकरी से निकाल दिया जायेगा। मज़दूरों ने भी ठान ली है कि वे रास्ता रोको व अन्य विरोध प्रदर्शनों के ज़रिये अपने संघर्ष को आगे बढ़ायेंगे। परिवहन मज़दूरों व उनके परिजनों ने घोषणा कर दी है कि वे राज्य के सभी बस डिपुओं के सामने हड़ताल प्रदर्शन करेंगे।

राज्य परिवहन के बस मार्गों के निजीकरण को आगे बढ़ाने के सरकार के हठ ने साबित कर दिया है कि सरकार सिर्फ मुट्ठीभर बड़े पूंजीपतियों के हितों में काम कर रही है। यह तो स्पष्ट है कि सिर्फ उन्हीं बस मार्गों का निजीकरण हो पायेगा जिन पर सर्वाधिक लोग यात्रा करते हैं। इन मार्गों पर निजी आपरेटर आसानी से टिकटों की दर बढ़ा सकते हैं और मोटा मुनाफ़ा कमा सकते हैं। वर्तमान में टी.एस.आर.टी.सी. राज्य के सबसे दूर-दराज़ के इलाकों तक सेवा प्रदान करती है। अगर सभी मज़दूरों को नौकरी से निकाला जाता है और टी.एस.आर.टी.सी. का निजीकरण किया जाता है तो दूर-दराज़ के हजारों छोटे गांव बस सेवाओं से वंचित हो जायेंगे। निजी आपरेटरों के लिये ऐसी जगहों पर बस चलाना घाटे का सौदा होगा। लाखों लोगों को बहुत ही कष्टदायी व असुरक्षित ग्रामीण परिवहन गाड़ियों में जाना पड़ेगा।

तेलंगाना सरकार टी.एस.आर.टी.सी. को जानबूझकर वित्तीय तौर पर कमज़ोर करना चाहती है ताकि बस सेवा के निजीकरण की सफाई दी जा सके। पहले सड़क परिवहन पर सेवा कर 5 से 14 प्रतिशत हुआ करता था जो जी.एस.टी. लागू होने पर 28 प्रतिशत कर दिया गया। डीज़ल की क़ीमतें भी बढ़ती रही हैं। ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने ध्यान दिलाया है कि राज्य सरकार पर परिवहन निगम का 2,700 करोड़ रुपये बकाया था। इसमें से सिर्फ 710 करोड़ रुपयों का भुगतान किया गया है। यह रकम इसीलिये देय थी क्योंकि टी.एस.आर.टी.सी. छात्रों, पत्रकारों, खास ड्यूटी वाले पुलिस कर्मियों, वरिष्ठ नागरिकों तथा अपाहिजों को निशुल्क या रियायत पर यात्रा करने देता था। सरकार पांच वर्षों से निगम को धन राशि से वंचित रखकर उसे घाटे में दिखाने की कोशिश कर रही है। घाटे में दिखा कर वह सिद्ध करने की कोशिश कर रही है कि निगम ”अलाभकारी“ है और इसका निजीकरण करने की ज़रूरत है। केन्द्र सरकार व राज्य सरकारों द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाला यह सार्वजनिक सम्पत्ति को निजी इजारेदारों को सौंपने का एक प्रस्थामिक तरीका है। तेलंगाना में राज्य सड़क परिवहन सेवा दैनिक एक करोड़ लोगों द्वारा इस्तेमाल की जाती है और सरकार की ज़िम्मेदारी बनती है कि वह इसके लिये ज़रूरी वित्तीय सहायता जारी रखे।

मज़दूर एकता लहर सरकार के बड़े पूंजीपतियों के हित में मज़दूर-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी विकास के रास्ते के विरोध में बहादुरी से लड़ने वाले इन मज़दूरों के साथ खड़ी है। हम मांग करते हैं कि सरकार टी.एस.आर.टी.सी. मज़दूरों को बिना शर्त हड़ताल वापस लेने की अंतिम चेतावनी तुरंत वापस ले। सरकार को टी.एस.आर.टी.सी. यूनियनों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी के साथ सकारात्मक वार्ता करनी चाहिये और राज्य परिवहन सेवा के निजीकरण की योजना को ख़ारिज़ करना चाहिये। उसे मज़दूरों का बकाया तुरंत देना चाहिये और उन परिवारों को मुआवज़ा दे जिनके घरों में लंबी हड़ताल की वजह से लोगों की मौत हुई है या बुरी तरह चोट पहुंची है।

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तेलंगाना स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन    Nov 16-30 2019    Struggle for Rights    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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