तमिलनाडु के सरकारी डॉक्टरों की सफल हड़ताल

तमिलनाडु के सरकारी डॉक्टरों ने 25 अक्तूबर, 2019 से 1 नवम्बर तक हड़ताल की। उनके मांगपत्र पर सरकार सहानुभूति से विचार करेगी, इस आश्वासन के बाद डॉक्टर अपने काम पर वापस लौटे। हड़ताल करने वाले डॉक्टर फेडरेशन ऑफ़ गवरमेंट डॉक्टर्स एसोसियेशन्स (फोग्डा) से जुड़े हैं। हड़ताल पर उतरने का इतना कड़ा क़दम उन्हें तब लेना पड़ा जब सरकार द्वारा अगस्त में किये वादों को पूरा नहीं किया गया। फोग्डा और राज्य के स्वास्थ्य सचिव के बीच वार्ता में सरकार डॉक्टरों की मांगों के प्रति उदासीन थी। हड़ताल के दौरान डॉक्टरों ने आपत्कालीन सेवाओं को जारी रखा, जबकि हस्पतालों में भर्ती व आऊट पेशेंट मरीजों को कुछ परेशानी झेलनी पड़ी।

TN Doctors on strike

डॉक्टरों के मांगपत्र में निम्नलिखित चार मांगें शामिल हैं।

  1. केन्द्र सरकार के डॉक्टरों के साथ वेतन समानता लाओ! फोग्डा के डॉक्टरों ने ध्यान दिलाया है कि तमिलनाडु में काफी कम वेतनमान होने की वजह से बहुत से डॉक्टरों को प्राईवेट प्रेक्टिस करनी पड़ती है।
  2. डी..सी.पी. को लागू करो! डायनेमिक एडवांसमेंट ऑफ़ करीयर प्रोग्रेशन (डी..सी.पी.) योजना के तहत डॉक्टरों को सेवाकाल के 4थे, 9वें और 13वें साल में समयबद्ध पदोन्नति होगी जो रिक्त पदों की संख्या पर निर्भर नहीं होगी। इस योजना को केन्द्र सरकार के मंत्रालयों व विभागों को सेवा देने वाले डॉक्टरों के लिये 2008 में लागू किया गया था। फोग्डा चाहता है कि यह योजना राज्य के सरकारी डॉक्टरों पर भी लागू की जाये।
  3. मरीजों व डॉक्टरों की संख्या में अनुपात बनाये रखने के लिये डॉक्टरों की नियुक्तियां करो! जबकि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में छात्रों की और मरीजों की संख्या पिछले 15 वर्षों से लगातार बढ़ती जा रही है, सरकार ने डॉक्टरों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं की है। इसकी वजह से डॉक्टरों व हस्पताल के अन्य कर्मचारियों पर बोझ बढ़ा है। फोग्डा ने मांग की है कि मरीजों पर अच्छे इलाज के लिये डॉक्टरों की नियुक्तियां की जायें ताकि मरीजों व डॉक्टरों की संख्या का अनुपात ठीक बना रहे।
  4. उच्च शिक्षा के लिये सरकारी डॉक्टरों के लिये निर्धारित कोटा दो!

डॉक्टरों के प्रति राज्य सरकार का रुख़ शत्रुतापूर्ण रहा है। 26 अक्तूबर की विफल वार्ता के बाद सरकार ने एक और वार्ता को बढ़ावा नहीं दिया। स्वास्थ्य मंत्री ने घोषणा कर दी कि अगर डॉक्टर काम पर वापस नहीं आते तो ये उनकी सेवा में विच्छेद माना जायेगा। आंदोलन को नेतृत्व देने वाले डॉक्टरों के तबादले के आर्डर निकाले गये। सेलम में एक सभा को संबोधित करते हुए, 31 अक्तूबर को स्वास्थ्य मंत्री ने हड़ताल करने वाले डॉक्टरों के बारे में कहा कि, ”अगर वे काम पर वापस नहीं आते तो उन्हें उनके पदों से निकाला जायेगा और उनके पदों को पर दूसरों को नियुक्त किया जायेगा। करीब 10,017 डॉक्टरों ने पहले से ही नौकरी के लिये आवेदन दिये हुए हैं।“ मुख्य मंत्री ने डॉक्टरों पर कड़ी कार्यवाई करने की धमकी दी। मद्रास उच्च अदालत में, किसी मरीज के नाम पर एक मामला दायर किया गया जिसमें अदालत से विनती की गयी है कि वह सरकार को आदेश दे कि वह डॉक्टरों की हड़ताल को समाप्त करे। परन्तु डॉक्टर अटल रहे और अंत में 1 नवम्बर को मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री, दोनों ने यह आश्वासन दिया कि डॉक्टरों की मांगों पर ध्यान दिया जायेगा। आश्वासन मिलने के बाद ही डॉक्टरों ने हड़ताल वापस ली। सरकार ने उनके खि़लाफ़ सेवा विच्छेद के आदेशों को भी वापस लिया है।

हालांकि डॉक्टरों की यह हड़ताल सफल रही है, अभी संघर्ष ख़त्म नहीं हुआ है। यह ज़रूरी है कि डॉक्टर चैकन्ने रहें ताकि सरकार उनको दिये आश्वासनों को पूरा करने को फिर नज़रंदाज़ न करे। मज़दूर एकता लहर तमिलनाडु के डॉक्टरों को अपनी मांगों की पूर्ति के लिये शुभकामनाएं देती है।

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फेडरेशन ऑफ़ गवरमेंट डॉक्टर्स एसोसियेशन्स (फोग्डा)    Nov 16-30 2019    Struggle for Rights    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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