मणिपुर की यूनियन सलाहकार के साथ साक्षात्कार

भारतीय खाद्य निगम के ठेका मज़दूरों पर अत्याचार व शोषण

कंज्यूमर अफेयर्स फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन लेबरर्स वेलफेयर एसोसियेशन (सी..एफ. एंड पी.डी.एल.डब्ल्यू..) मणिपुर की सलाहकार, हिजम कविता देवी से मज़दूर एकता लहर ने साक्षात्कार किया।

Manipur FCI contract workers protest
Manipur FCI contract workers protest

मज़दूर एकता लहर (...): हाल ही में भारतीय खाद्य निगम (एफ.सी.आई.) के डेपुटी जनरल मैनेजर (डी.जी.एम.) ने आप पर जानलेवा हमला किया। आप इसके बारे में बताएं।

कविता देवी (.दे.): यह बात 21 अक्तूबर की है। कंज्यूमर अफेयर्स फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन लेबरर्स फेमिली एसोसियेशन के बैनर तले, एक प्रतिनिधिमंडल डी.जी.एम. को विज्ञप्ति देने के लिये इंफाल स्थित एफ.सी.आई. मुख्यालय पहुंचा। मेरे साथ 45 महिलाएं थीं। ये सभी महिलाएं, हमारी यूनियन सी..एफ. एंड पी.डी.एल.डब्ल्यू.. से जु़ड़े परिवारों की सदस्य हैं।

हमारे फेमिली एसोसिएशन में महिला मज़दूर और उनके परिजनों के अलावा पुरुष मज़दूरों की पत्नियां और परिजन भी शामिल हैं। लोडिंग-अनलोडिंग का काम करने वाले पुरुष मज़दूरों की इतनी कम तनख्वाह है कि उनकी पत्नियों को घर चलाने में मुश्किल आती है। वे भी संघर्ष में हिस्सा लेती हैं। इसके चलते, यह फेमिली एसोसियेशन अस्तित्व में आया।

खैर, हम कार्यालय पहुंचे तो डी.जी.एम. नहीं थे। उनके सहायक ने विज्ञप्ति ली। थोड़ा इंतजार करने के बाद डी.जी.एम. आए। हम उनके कमरे में पहुंचे।

3 महिलाएं मेरे साथ थीं। मैंने उन्हें सभी समस्यायें बतायीं। उन्होंने अंग्रेजी में बात शुरू की। हमें ‘गेट आउट’ होने को कहा। साथी महिलाओं ने उसके अंहकारी भाव वाले स्वर का विरोध किया। इसी बहस में डी.जी.एम. ने अचानक मुझ पर पिस्तौल तान दी। मैं खुद और अपने साथियों के बचाव में, उसका हाथ पकड़ने में सफल रही। यह आधे मिनट या उससे अधिक का संघर्ष था और इसके बाद उन्होंने मुझ पर निशाना साधने की कोशिश की। इस गुत्थम-गुत्था में मैं पिस्तौल की दिशा को छत की ओर मोड़ने में सफल रही और गोली छत पर जा लगी। फायरिंग की आवाज़ सुनकर दूसरे कर्मचारी आ गए। पुलिस आयी। मीडिया आयी। खैर, पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। 25 अक्तूबर को उसकी बेल हुई।

अब, डी.जी.एम. एस. जेम्स और उसके समर्थक अधिकारी हमारी यूनियन पर दबाव डाल रहे हैं कि इस जानलेवा हमले की शिकायत को वापस ले लें। जबकि हमारी यूनियन उसे सज़ा दिए जाने की मांग कर रही है।

...: किन-किन मांगों को लेकर महिलाएं एफ.सी.आई. कार्यालय गयी थीं?

.दे.: हमारी मुख्य मांग है कि समान काम के लिये समान वेतन दिया जाए। ठेकेदार अपने प्रतिनिधियों के ज़रिए, लोडिंग-अनलोडिंग काम को आउटसोर्स करना बंद करे। गोदामों के अंदर यूनियन से जुड़े मज़दूरों को धमकाने वाले प्रबंधन के गुंडों को बाहर निकाल दिया जाए। एफ.सी.आई. में फैले भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जाये, आदि।

...: अपनी यूनियन के बारे में बताएं।

.दे.: एफ.सी.आई. और सी..एफ. एंड पी.डी के गोदामों में ठेका मज़दूरों की यूनियन नहीं थी। न्यूनतम वेतन, मुआवज़ा, पीएफ, ग्रेच्युटी, ये सब उनके लिए बहुत दूर की बात हैं। उदाहरण के लिए संगाइप्रोउ गोदाम सबसे बड़ा गोदाम है। यहां 50 किलोग्राम भार वाले प्रत्येक बोरे की लोडिंग और अनलोडिंग करने वाले प्रत्येक मज़दूर को 4 रुपए मिलते थे। सी..एफ. एंड पी.डी.एल.डब्ल्यू.. में संगठित होकर, मज़दूरों के संघर्ष करने के बाद, प्रति बोरा लोडिंग-अनलोडिंग का 8 रुपए मिलने लगा। आज भी जिन एफ.सी.आई. गोदामों के मज़दूर यूनियन से जुड़े नहीं हैं, वहां सिर्फ 1.50 रुपया मिलता है।

जिरीबाम स्थित एफ.सी.आई. गोदाम में, सितम्बर महीने में मज़दूरों को तनख्वाह 3,000 रुपए से कम मिली है। हालांकि मणिपुर राज्य के अनुसार, 390 रुपये दिहाड़ी होनी चाहिए। अगर एक मजदूर 20 दिन भी काम करता है तो उसका वेतन 7000 रुपए होना चाहिए। लेकिन उसे 3000 से कम वेतन मिलता है। आप शोषण और लूट की इस हालत का अंदाज़ा लगा सकते हैं।

...: मणिपुर में कितने ऐसे गोदाम हैं?

.दे.: मणिपुर में दो तरह के गोदाम हैं। एक केन्द्र सरकार वाली एफ.सी.आई. के तो दूसरे, राज्य सरकार के तहत, कंज्यूमर अफेयर्स फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन विभाग (सी..एफ. एंड पी.डी.) के। दोनों के गोदाम साथ-साथ हैं। एफ.सी.आई. के गोदाम संगाइप्रोउ, उर्खुल, जिरीबाम (रेल से जु़ड़े सबसे बड़े गोदाम), कोइरेंगेइ (किराए), सेनापति आदि पर हैं। स्वोंबुंग और बिश्नुपुर गोदाम चालू नहीं हैं। साथ ही साथ, सी..एफ. एंड पी.डी. के गोदाम हैं - जिरीबाम, संगाइप्रोउ और चूड़ाचंद्रपुर। इन गोदामों पर लोडिंग और अनलोडिंग का काम होता है। हमारी यूनियन तीन जगह काम करती है। पहला, संगाइप्रोउ एफ.सी.आई. गोदाम में। जिरीबाम में दो जगह हैं जहां हमारे सदस्य काम करते हैं, एक है एफ.सी.आई. जिरीबाम डिपो और रेल हेड जिरीबाम। दोनों कुछ मीटर की दूरी पर हैं लेकिन दोनों अलग हैं। संगाइप्रोउ में, एफ.सी.आई. और सी..एफ. एंड पी.डी., दोनों में मिलाकर 154 मज़दूर हैं। जबकि जीरीबाम एफ.सी.आई. गोदाम और रेल हेड पर 100 से ज्यादा मज़दूर हैं।

...: काम के हालातों के बारे में बताएं।

.दे.: इन गोदामों में काम की हालत बहुत खराब है। बोरों को गोदामों में ऊंची जगह से निकालकर लोड करना या ट्रक को अनलोड करना, यह बेहद परिश्रम वाला काम है। यह मज़दूरों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है। यह काम उनकी हड्डियों पर असर डालता है। बोरों से निकलने वाले तत्व सांस के ज़रिए शरीर में पहुंचकर मज़दूर को अस्थमा और टीबी का शिकार बनाकर छोड़ते हैं। कभी-कभी मज़दूर अंदरूनी जख्म का शिकार बन जाता है। इसका कोई मुआवज़ा नहीं मिलता है।

...: यूनियन को किन-किन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है?

.दे.: गोदाम मणिपुर के दूर-दराज़ के इलाकों में होते हैं। एफ.सी.आई. और सी..एफ. एंड पी.डी. के अधिकारी और ठेकेदार मनमर्ज़ी चलाते हैं। कुल 4 ठेकेदार हैं। इस शोषण और लूट में केन्द्र सरकार और राज्य सरकार दोनों शामिल हैं। मज़दूरों को कानूनी अधिकारों से वंचित किया जाता है। यूनियन को मणिपुर की भौगोलिक और राजनीतिक जटिलता का सामना करना पड़ रहा है। हम और गोदामों के मज़दूरों को यूनियन से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

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भारतीय खाद्य निगम के मज़दूरों का संघर्ष    Nov 16-30 2019    Struggle for Rights    Rights     2019   

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