महान अक्तूबर क्रांति ज़िंदाबाद!

आओ हम हिन्दोस्तान में मज़दूरों और किसानों की हुकूमत स्थापित करने के लिए काम करें!

7 नवंबर, 1917 को रूस के क्रांतिकारी मज़दूरों, किसानों, सैनिकों और नाविकों ने विंटर पैलेस पर धावा बोला और अल्पकालीन सरकार के प्रतिनिधियों को गिरफ़्तार कर लिया। उन्होंने मंत्रालयों, राज्य के केंद्रीय बैंकों के साथ-साथ रेलवे स्टेशनों, पोस्ट एवं टेलीग्राफ ऑफिसों पर कब्ज़ा कर लिया। बोल्शेविक पार्टी की अगुवाई में मज़दूर वर्ग ने रूस में राजनीतिक सत्ता अपने हाथों में ले ली। इस घटना से पूरी दुनिया हिल उठी। दुनियाभर के पूंजीपतियों के दिलों में दहशत फैल गयी। इस घटना ने दुनियाभर के दबे-कुचले लोगों को प्रेरित किया और उन्हें एक उम्मीद दी।

इस क्रांति ने एक नए राज्य को जन्म दिया, जिसने मेहनतकश लोगों को केंद्र में रखा। इस नए सोवियत राज्य ने बड़े पूंजीपतियों की जायदाद को हड़प लिया और बड़े-उद्योग, यातायात, बैंकिंग और व्यापार को सार्वजनिक मालिकी के तहत सामाजिक उद्यम में बदल दिया। इस नए राज्य ने ग़रीब किसानों को स्वेच्छा से अपनी ज़मीनों को एक साथ मिलाकर बड़े पैमाने पर सामूहिक खेतों में बदलने के लिए प्रेरित किया। मेहनतकश जनसमुदाय की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए तमाम वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन और वितरण को एक योजना के तहत लाया गया। एक नयी समाजवादी अर्थव्यवस्था का उदय हुआ जहां न तो बेरोज़गारी थी, न महंगाई और न ही किसी तरह का संकट।

अब न तो कोई शोषक वर्ग था और न ही किसी के लिए कोई विशेषाधिकार थे। हर एक मज़दूर, किसान और सैनिक को वैधनिक निकायों के प्रतिनिधि को चुनने और उन निकायों में चुने जाने का अधिकार था। उनके पास चुने हुए प्रतिनिधि को किसी भी वक़्त वापस बुलाने का भी अधिकार था। सोवियत राज्य ने ऐसे हालात पैदा किये जहां महिलाएं तमाम भेदभावों से मुक्त हो गयीं और उन्हें समाज के हर एक क्षेत्र में बराबरी का दर्ज़ा हासिल हुआ। सोवियत राज्य ने समाज के सभी सदस्यों के लिए शांति, सुख और सुरक्षा की गारंटी दी। सोवियत राज्य ने उन सभी राष्ट्रों और लोगों की एकता को मजबूत किया जिन्होंने समाजवादी व्यवस्था के निर्माण के लिए हाथ मिलाये थे।

सोवियत राज्य के इस पूरे अनुभव ने मानवता को यह एहसास दिलाया कि एक ऐसे समाज का निर्माण किया जा सकता है जहां समाज के सभी सदस्य मानवोचित इज्ज़त की ज़िन्दगी जी सकते हैं। अक्तूबर क्रांति ने एक नए वर्ग, मज़दूर वर्ग को सत्ता में लाते हुए, दुनियाभर के सभी मज़दूरों और सभी दबे-कुचले लोगों को इसी रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया।

आज हमारा देश और सारी दुनिया गहरे संकट के चपेट में फंसे हुए हैं। हर तरफ जंग और जनसंहार फैले हुए हैं। हर जगह मेहनतकश जनसमुदाय आर्थिक गुरबत में जी रहा है। दूसरी ओर कुछ मुट्ठीभर अल्पसंख्यक मेहनतकशों की कड़ी मेहनत से पैदा की गयी सामाजिक दौलात को लूट रहे हैं। समाज की दिशा को तय करने में इस विशाल जनसमुदाय की कोई भूमिका नहीं है। मौजूदा राजनीतिक प्रक्रिया में वे पूरी तरह से हाशिये पर धकेल दिए गए हैं।

मौजूदा व्यवस्था में बुनियादी और गहरे बदलाव की सख़्त ज़रूरत है। इसलिए अक्तूबर क्रांति, श्रमजीवी जनतंत्र और समाजवाद का निर्माण आज हमारे लिए बहुमूल्य सबक देते हैं, बाद में भले ही उस व्यवस्था का विनाश कर दिया गया था।

भूतपूर्व सोवियत संघ में पूंजीवाद की क्रमिक पुनस्र्थापना और उसके एक साम्राज्यवादी ताक़त में तब्दील हो जाने से सोवियत संघ और अमरीका, इन दो महाशक्तियों के बीच ख़तरनाक टकराव शुरू हो गया। इसके चलते हथियारों की होड़ शुरू हो गयी और दुनिया दो दुश्मन खेमों में बंट गयी। सोवियत संघ के अंतिम पतन के बाद दुनिया ने अमरीकी साम्राज्यवादियों द्वारा दुनिया पर अपना दबदबा क़ायम करने के लिए समाज-विरोधी बर्बर हमले और सत्ता परिवर्तन के लिए जंग का नज़ारा देखा है। 1989 के बाद जो कुछ हुआ उससे दुनिया से इस आदमखोर पूंजीवादी-साम्राज्यवादी व्यवस्था को हमेशा के लिए ख़त्म करने की ज़रूरत, पहले से कहीं अधिक हो गई है।

हमारे देश में इस पूंजीवादी व्यवस्था के बारे में तमाम भ्रमों को चकनाचूर करने की सख़्त ज़रूरत है, जिनकी हिफ़ाज़त यह तथाकथित धर्म-निरपेक्ष और जनतांत्रिक हिन्दोस्तानी राज्य और उसकी बहुपार्टी प्रतिनिधित्व वाली राजनीतिक प्रक्रिया करते हैं। इस व्यवस्था को चाहे जितना खूबसूरत बनाने की कोशिश कोशिश की जाए, यह व्यवस्था कभी भी तमाम शोषितों और दबे-कुचले मज़दूरों, किसानों, महिलाओं और नौजवानों को मुक्ति नहीं दिला सकती।

आज हम इसी मक़सद के साथ भूतकाल को देखते हैं। आज की भयानक परिस्थिति से निपटने के लिए हमें भूतकाल से सबक लेने होंगे, जिससे हम अपने लोगों के और दुनियाभर के सभी मज़दूरों और दबे कुचले लोगों के उज्ज्वल भविष्य के लिए रास्ता खोल सकें। आज हमें वह कार्य करना है जिसे बोल्शेविकों ने एक सदी पहले किया था। वह बोल्शेविक पार्टी और उसका लगातार कार्य ही था जिसकी वजह से 1917 में क्रांति की जीत के हालात पैदा हुए। माक्र्सवाद की हिफ़ाज़त करते हुए, उसको विकसित करते हुए और रूस के ठोस हालातों में उसको लागू करते हुए बोल्शेविक पार्टी ने मज़दूरों, किसानों और सैनिकों को राजनीतिक सत्ता को अपने हाथों में लेने और एक नए समाज का निर्माण करने में अगुवाई दी।

1980 में हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की स्थापना हिन्दोस्तान में क्रांति के लिए आत्मगत हालात पैदा करने के मक़सद के साथ की गयी थी। उस समय से हमारी पार्टी का एक ही एजेंडा रहा है, हिन्दोस्तान के मज़दूरों और किसानों को देश के हुक्मरान बनाने के लिए हालात तैयार करना, जिससे कि वे एक ऐसे राज्य और समाज का निर्माण कर सकें जो समाज के सभी सदस्यों को सुख और सुरक्षा की गारंटी देगा।

आओ हम महान अक्तूबर क्रांति को सलाम करते हुए, अपने देश में श्रमजीवी क्रांति की विजय के लिए आत्मगत हालात पैदा करने के लिए काम करें!

इंकलाब ज़िंदाबाद!  

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महान अक्तूबर क्रांति    Nov 16-30 2019    Voice of the Party    History    2019   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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