छंटनी के खि़लाफ़ होंडा के मज़दूरों का संघर्ष

27 नवंबर को होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर्स इंडिया (एच.एम.एस.आई.) के मानेसर प्लांट के हजारों मज़दूरों ने कारखाने के करीब एक हजार ठेके पर काम करने वाले मज़दूरों की छंटनी के खि़लाफ़, मानेसर और गुरुग्राम की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किया। एच.एम.एस.आई. के मज़दूरों के अलावा इस प्रदर्शन रैली में मानेसर और गुरुग्राम के ऑटो-कलपुर्जे के उद्योग के मज़दूरों ने होंडा मज़दूरों का समर्थन करने के लिये रैली में हिस्सा लिया।

Honda workers struggle
एच.एम.एस.आई. एक जापानी बहुराष्ट्रीय कंपनी है देश में दु-पहिया वाहन बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है। मानेसर सहित देशभर में इसके 4 कारखाने हैं। देशभर की अन्य ऑटो कंपनियों की तरह ही एच.एम.एस.आई. मानेसर में भी उत्पादन, हजारों ठेका मज़दूरों के श्रम के अति-शोषण पर आधारित है। मानेसर में 2019 की शुरुआत में कुल 5 हजार मज़दूरों में से 60 प्रतिशत ठेका मज़दूर थे। इनमें से कई मज़दूर इस प्लांट में 10 वर्ष से अधिक समय से काम कर रहे हैं। ये मज़दूर भी वही काम करते हैं जो नियमित मज़दूर करते हैं, लेकिन उन्हें नियमित मज़दूरों की तुलना में आधे से भी कम वेतन दिया जाता है। इसके अलावा किसी भी समय बिना किसी नोटिस के उनकी छंटनी की जा सकती है।

2019 के अगस्त महीने से एच.एम.एस.आई. मानेसर से करीब एक हजार मज़दूरों की छंटनी की जा चुकी है। नवंबर की शुरुआत में जब मैनेजमेंट ने एक नोटिस जारी किया कि उत्पादन में कमी की वजह से 250 और मज़दूरों की छंटनी की जाएगी, तो मज़दूरों ने इसका विरोध करने का फैसला किया। 5 नवंबर को ठेका मज़दूरों ने इस छंटनी के खि़लाफ़ अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। बहुत से मज़दूर कारखाने के भीतर हड़ताल पर बैठ गए तो बहुत से गेट के बाहर। प्लांट के करीब 2000 नियमित मज़दूर भी उनके समर्थन में उतर आये। उनकी मांग है कि जो भी ठेका मज़दूर 10 वर्ष से अधिक समय से काम कर रहे हैं, उनको तुरंत नियमित किया जाए और अन्य ठेका मज़दूरों को काम पर वापस लिया जाए। और यदि प्रबंधन ऐसा करने में नाक़ामयाब रहता है, तो नौकरी से निकाले गए हर एक मज़दूर को काम के प्रत्येक वर्ष के लिए एक लाख रुपये मुआवजे़ के रूप में दिए जाएं।

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एच.एम.एस.आई. के मानेसर कारखाने  के मज़दूरों के संघर्ष को गुरुग्राम और मानेसर औद्योगिक क्षेत्र के सभी मज़दूरों का समर्थन हासिल हुआ है। एक अनुमान ने अनुसार इस औद्योगिक क्षेत्र के करीब 1000 ऑटो एवं ऑटो-कलपुजों की कंपनियों में करीब 15 लाख मज़दूर काम करते हैं। पिछले कई वर्षों से ये कंपनियां उत्पादन के लिए नियमित मज़दूरों की संख्या घटाकर उनकी जगह पर ठेका मज़दूरों का इस्तेमाल करती आई है।

11 नवंबर को एच.एम.एस.आई. के प्रबंधन ने ऐलान किया कि हड़ताल के चलते इस यूनिट में उत्पादन को अनिश्चितकाल के लिए बंद किया जा रहा है।

नवंबर 19 को मज़दूरों के प्रतिनिधियों ने हरियाणा के उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला और हरियाणा के श्रम आयुक्त नितिन यादव के साथ चंडीगढ़ में मुलाक़ात की। रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा सरकार द्वारा उनकी मांगों को पूरा किये जाने के आश्वासन के आधार पर मज़दूरों से फैक्ट्री परिसर से निकलकर फैक्ट्री के बाहर अपनी हड़ताल जारी रखने का फैसला लिया।

22 नवंबर को हजारों मज़दूरों ने आई.एम.टी. मानेसर से लेकर गुरुग्राम में मिनी-सचिवालय तक एक जुलूस निकला और उप-आयुक्त को अपना मांग पत्र सौंपा। इस 18 किलोमीटर लंबी प्रदर्शन यात्रा में इस औद्योगिक क्षेत्र की  अन्य कंपनियों में काम करने वाले सैकड़ों मज़दूरों ने भी हिस्सा लिया।

ठीक उसी दिन एच.एम.एस.आई. के प्रबंधन ने मज़दूर यूनियन के अध्यक्ष और महासचिव सहित, 6 नियमित मज़दूरों को निलंबित कर दिया।

प्रबंधन ने इस फैक्ट्री में 25 नवंबर से उत्पादन फिर से शुरू करने का ऐलान किया। मज़दूरों के अलग-अलग समूहों को अलग-अलग तारीख को काम पर रिपोर्ट करने के लिए नोटिस जारी किया गया है। हड़ताल को तोड़ने के लिए प्रबंधन ने कुछ ठेका मज़दूरों को किसी-किसी नए ठेकेदार के नीचे काम देने प्रस्ताव भी रखा है।

एच.एम.एस.आई. के मज़दूरों का संघर्ष यह साफ दिखाता है कि किस तरह से सरकार और श्रम विभाग पूरी तरह बहुराष्ट्रीय कंपनी एच.एम.एस.आई. की सेवा में काम कर रहे हैं। कुछ मज़दूरों का ख्याल है कि सरकार के आश्वासन के आधार पर फैक्ट्री के क्षेत्र से बाहर निकलने का फैसला गलत था। लेकिन इस बात से हिम्मत न हारते हुए मज़दूरों ने अपनी जायज़ मांगों के लिए अपने संघर्ष को और तेज़ करने का फैसला किया है। एच.एमएस.आई. के गेट पर मज़दूरों की हड़ताल जारी है। 27 नवंबर का प्रदर्शन जुलूस इस पूरे औद्योगिक क्षेत्र के मज़दूरों को यह संदेश देने के मक़सद से आयोजित किया जा रहा है कि संघर्ष जारी है।

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Dec 1-15 2019    Struggle for Rights    2019   

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