बी.एस.एन.एल. के मज़दूरों की भूख हड़ताल

25 नवंबर से बी.एस.एन.एल. के मज़दूरों ने अपनी निम्नलिखित मांगों के समर्थन में भूख हड़ताल शुरू कर दी है।

  • बी.एस.एन.एल. मज़दूरों की सेवानिवृत्ति की उम्र को कम न किया जाए, सेवानिवृत्ति की उम्र कम करने, तबादला करने, काम के बोझ को बढ़ाये जाने जैसी बातों से मज़दूरों के बीच डर फैलाकर उन्हें वी.आर.एस. (स्वेच्छा सेवानिवृत्ति) लेने के लिए मजबूर न किया जाए।
  • बी.एस.एन.एल से सेवानिवृत्त हो चुके मज़दूरों की पेंशन में तुरंत संशोधन किया जाए; पेंशन में संशोधन को वेतन में संशोधन से अलग किया जाये। 
  • बी.एस.एन.एल. की 4जी सेवाओं को तुरंत शुरू किया जाए और सभी मज़दूरों को समय पर वेतन का भुगतान किया जाए।

BSNL Workers on Strikeमज़दूर यह भी मांग कर रहे हैं कि टेलिकॉम विभाग और बी.एस.एन.एल. इस बात का आश्वासन दें कि जो मज़दूर वी.आए.एस. को अपनी स्वेच्छा से चुनते हैं उन्हें तीसरे वेतन संशोधन के लिए पात्र बनाया जाए, जो कि पूर्व तारीख से लागू किया जायेगा।

इस भूख हड़ताल में बी.एस.एन.एल. की विभिन्न यूनियनों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं जिनमें शामिल हैं बी.एस.एन.एल.ई.यू., नेशनल यूनियन ऑफ बी.एस.एन.एल. वर्कर्स, बी.एस.एन.एल. मज़दूर संघ, बी.एस.एन.एल. एसोसिएशन ऑफ टेलिकॉम मैकेनिक्स और बीस.एन.एल. ऑफिसर्स एसोसिएशन।

23 अक्तूबर को केन्द्र सरकार ने बी.एस.एन.एल. और महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (एम.टी.एन.एल.) को पुनर्जीवित करने के लिए पैकेज की घोषणा की। इस पैकेज में इन दोनों कंपनियों के विलयन के साथ वी.आर.एस. की योजना शामिल है। 70,000 करोड़ रुपये के इस पैकेज में बी.एस.एन.एल. को 4जी स्पेक्ट्रम के आवंटन की गारंटी को शामिल किया गया है।

वैसे तो यह घोषणा की गयी है कि यह वी.आर.एस. पूर्ण रूप से स्वेच्छा पर आधारित होगा, लेकिन बी.एस.एन.एल. एम्प्लाइज़ यूनियन ने बताया है कि टेलिकॉम विभाग और बी.एस.एन.एल. मैनेजमेंट इसको मज़दूरों पर जबरदस्ती से थोप रहे हैं और इसे एफ.आर.एस. (जोर-जबरदस्ती सेवानिवृत्ति की योजना)। मज़दूरों ने बताया कि अपने इस मकसद को हासिल करने के लिए बी.एस.एन.एल का मैनेजमेंट सेवानिवृत्ति की उम्र को 58 वर्ष तक घटाने, दूर-दराज के इलाकों में तबादला और अधिक कार्य का बोझ डालने जैसी धमकी दे रहा। ऐसा करते हुए मज़दूरों को वी.आर.एस. लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

यूनियन ने इस बात को उजागर किया कि वी.आर.एस. 2019 के अनुसार मज़दूर वी.आर.एस. के तहत रिटायर होता है तो वह अपने लिए पेंशन के रूपांतरण की अर्जी 60 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद ही दे सकता है। इसके अलावा यदि किसी मज़दूर की 60 वर्ष की आयु पूरी करने या रूपांतरण की अर्जी देने से पहले मृत्यु हो जाती है तो उसका परिवार पेंशन के लिए पात्र नहीं होगा। इसलिए मज़दूर यूनियनें यह मांग कर रही हैं कि पेंशन के रूपांतरण में ज़रूरी संशोधन लाये जाएं।

मज़दूर यूनियनें मांग कर रही हैं कि बी.एस.एन.एल का प्रबंधन तबादले, मानव संसाधन के प्रबंधन और बी.एस.एन.एल. के ढांचे के बारे में उनसे बातचीत करे; उन्होंने ऐलान किया है कि मनमर्ज़ी के साथ फैसले लेना, मज़दूर यूनियन और एसोसिएशन को नजरंदाज़ करना, ये बातें मज़दूरों को स्वीकार नहीं हैं।

हड़ताल पर बैठे मज़दूर मांग कर रहे हैं कि ठेका मज़दूरों के बकाया वेतन का तुरंत भुगतान किया जाये। बी.एस.एन.एल. में काम कर रहे ठेका मज़दूरों को पिछले 10 महीनों से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है और वे कई राज्यों में इस अन्याय का विरोध कर रहे हैं।

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Dec 1-15 2019    Struggle for Rights    2019   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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