किसान अपनी भूमि कौड़ियों के दाम पर देने को तैयार नहीं!

किसान संघर्ष समिति के बैनर तले राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के कलेक्ट्रेट के सामने पिछले 173 दिनों से किसान धरने पर बैठे हैं। किसान अपनी भूमि के अधिग्रहण की एवज में ऊचित मुआवजे़ की मांग कर रहे हैं। उनकी मांगों पर अभी तक न तो राज्य सरकार ने और न ही केन्द्र सरकार ने कोई ध्यान दिया है।

किसानों ने यह धरना तब शुरू किया जब राष्ट्रीय महामार्ग (नेशनल हाईवे) एन.एच-754K के लिये उनकी कृषि योग्य ज़मीन का अधिग्रहण किये जाने पर उन्हें बहुत ही कम मुआवज़ा दिया गया। जबकि इस इलाके से सटे राज्यों हरियाणा और पंजाब में इसी हाईवे के लिये अधिग्रहित समतुल्य कृषि योग्य भूमि के लिये कई गुणा ज्यादा मुआवज़ा दिया गया है।

प्रत्येक दिन आस-पास के गांवों के सैकड़ों लोग धरने में शामिल हो रहे हैं। समिति का कहना है कि जब तक हमें बज़ार के अनुसार मुआवज़ा नहीं मिलता तब तक हम सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं करने देंगे।

धरने में सुखदेव सिंह मौदन, दलीप छिंपा, सुरेन्द्र शर्मा, बहादुर सिंह, बीरबल दास, बलबीर सिंह, मोहन जाखड़, राम किशन, शकूर मोहम्मद, गुरदयाल सिंह, चानणराम, कृष्णलाल और प्रेम नाई आदि अगुवा नेता लगातार धरने में शामिल हो रहे हैं। इनके अलावा लोक राज संगठन के सर्व हिन्द उपाध्यक्ष हनुमान प्रसाद शर्मा धरने में गये और अपना समर्थन प्रकट किया।

किसानों द्वारा पेश की गई मांगें हैं:

  • राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के किसानों की मांग है कि हमें हरियाणा व पंजाब के बराबर अर्जन की जाने वाली भूमि का मुआवज़ा दिलाया जाये ताकि किसान अपना व अपने परिवार का पालन पोषण कर सकें। अगर हरियाणा व पंजाब के बराबर मुआवज़ा दिया जाता है तो किसान के नुकसान की भरपाई हो सकती है। अगर किसान को हरियाणा व पंजाब राज्य के बराबर मुआवज़ा नहीं दिया गया तो किसानों के परिवार बरबाद हो जायेंगे।
  • एन.एच. 754K हाईवे के तिरछा जाने के कारण किसानों की भूमि के छोटे-छोटे टुकड़ों हो रहे हैं। सड़क के दोनों तरफ टुकड़ों में बच रही भूमि पर किसान काश्त नहीं कर सकता। क्योंकि सड़क के दोनों तरफ न तो किसान को पानी की सुविधा रहेगी न किसान को रास्ते की सुविधा रहेगी। क्योंकि सड़क की ऊंचाई 3 मीटर है इकोनिमिक कोरिडोर होने के कारण किसान उक्त रोड पर आ जा नहीं सकते। इस कारण से किसाना के टुकड़ों में शेष बची भूमि बंजर हो जायेगी जिसका समाधान किया जाये।
  • हमारी कृषि भूमि पुश्तैनी है जहां प्रतिवर्ष प्रत्येक चक में दो प्रतिशत से ज्यादा खरीद फरोक्त नहीं होती है। इसलिये कमेटी गठित करके बाज़ार भाव का मूल्यांकन कर बाज़ार भाव का चार गुणा दिलवाया जाये।
  • हनुमानगढ़ जिले में भूमि को शहरी सीमा में 10 किलोमीटर तक मानते हैं। जबकि मुआवज़ा ग्रामीण भूमि के अनुसार तय किया गया है जो ग़लत है, शहरी सीमा में मानी गई भूमि का मुआवज़ा शहरी सीमा के अनुसार ही वितरण करवाया जाये।
  • अधिग्रहण में आने वाली भूमि के किसान परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी का प्रावधान किया जाये।
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Dec 1-15 2019    Struggle for Rights    2019   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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