कॉग्नीज़ेंड कंपनी में मज़दूरों की छंटनी

2019 की दुनिया की सबसे बड़ी 100 डिजिटल कंपनियों में से एक, कॉग्नीज़ेंड ने घोषणा की है कि वह अपने कन्टेंट मोडरेशन व्यवसाय को कम करेगी और करीब 7,000 आई.टी. मज़दूरों को नौकरी से निकालेगी। इस क्षेत्र के जानकार लोगों का मानना है कि करीब-करीब इतनी ही बड़ी छंटनी दूसरे राऊंड में जल्द ही की जायेगी। कन्टेंट मोडरेशन का मतलब है कि फेसबुक जैसे सोशल मीडिया में उपयोगकर्ता द्वारा डाली गयी सामग्रियों को पहचानना कि उनमें कोई आपत्तिजनक तो नहीं है।

Cognizant laysoff workers

कॉग्नीज़ेंड की कुल आय 2017-18 में 16 अरब डॉलर से भी अधिक थी और मुनाफ़ा 2.8 अरब डॉलर था (एक अरब डॉलर का मतलब करीब 70 अरब रुपये होता है)। इस तरह कॉग्नीज़ेंड 2019 की फार्च्यून 500 कंपनियों में 193वें नम्बर पर है। 2017 में दुनियाभर में इसमें करीब 2,60,200 मज़दूर थे जिनमें से 72 प्रतिशत, यानी कि 1,88,000 मज़दूर हिन्दोस्तान में थे। 2017 में कंपनी ने करीब 10,000 मज़दूरों को हिन्दोस्तान में काम से निकाला था।

ऐसा नहीं है कि कंपनी का मुनाफ़ा कम हो रहा है। सितम्बर में समाप्त होने वाली तिमाही में कॉग्नीज़ेंड का राजस्व पिछले साल के मुक़ाबले 4.2 प्रतिशत बढ़ कर 4.25 अरब डॉलर हो गया है। इस तिमाही में इसका शुद्ध मुनाफ़ा 49.7 करोड़ डॉलर (करीब 3,500 करोड़ रुपये) था जो पिछले साल की इसी तिमाही में 47.7 करोड़ डॉलर था।

आज कॉग्नीज़ेंड में कुल मिलाकर 2,90,000 मज़दूर हैं जिनमें से 2,15,000 से अधिक हिन्दोस्तान में हैं। इसका मतलब है कि इसमें मज़दूरों की संख्या बढ़ी है। इसी तरह टाटा कंसल्टेन्सी सर्विसेस, इन्फोसिस और विप्रो में पिछली तिमाही के मुकाबले नयी नियुक्तियों में 59 प्रतिशत इजाफा हुआ है। इन तीनों कंपनियों ने मिलाकर इस तिमाही में 28,157 मज़दूरों को नियुक्त किया जबकि पिछली तिमाही में 16,687 नये मज़दूर नियुक्त किये गये थे। नयी नियुक्तियों के साथ-साथ, कंपनियां पुराने मज़दूरों को नौकरी से निकाल रही हैं। कॉग्नीज़ेंड के जैसे ही हिन्दोस्तान की कई दूसरी प्रमुख आई.टी. कंपनियां, जैसे कि इन्फोसिस, दोयचे बैंक, कैपजैमिनी और यू.आई. पाथ में छंटनी हो रही है। इन्फोसिस में इस साल 10,000 तक मज़दूरों की छंटनी हो रही है। कंपनियां मंझोले व वरिष्ठ मज़दूरों, जिनका वेतन ज्यादा है, उनको निकाल कर कनिष्ठ स्तर पर मज़दूरों को नियुक्त कर रही हैं ताकि कंपनी के मुनाफ़े को अधिकतम बनाया जा सके।

चेन्नई में स्थित आई.टी. व आई.टी. समर्थित सेवाओं की यूनियन यू.एन.आई.टी.ई. ने ध्यान दिलाया है कि मज़दूरों की छंटनी सिर्फ मुनाफे़ को अधिकतम बनाने के लिये की जा रही है। उसने आई.टी. व आई.टी. समर्थित सेवाओं के मज़दूरों को बुलावा दिया है कि वे अपने हित की रक्षा में यूनियनबद्ध हो जायें ताकि इस तरह की नाजायज़ छंटनी के ख़िलाफ़ लड़ सकें। 

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Dec 1-15 2019    Struggle for Rights    2019   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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