एम्स के रेजिडेंट डाक्टरों ने फीस व शुल्कों में वृद्धि का विरोध किया

दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के रेजिडेंट डॉक्टरों की एसोसिएशन ने छात्रों की फीस और स्वास्थ्य सेवा के शुल्क को बढ़ाने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव का विरोध किया है। केंद्र सरकार ने हाल में एक आदेश जारी किया कि एम्स में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों की फीस और मरीजों के इलाज के शुल्कों में वृद्धि की जाये।

AIIMS Resident Doctorsनवम्बर के दूसरे हफ्ते में, स्वास्थ्य मंत्रालय ने देशभर के सभी एम्स संस्थानों के सेंट्रल इंस्टिट्यूट बॉडी (सी.आई.बी.) को आदेश जारी किया कि छात्रों की फीस और मरीजों को दी जा रही तरह-तरह की स्वास्थ्य सेवाओं के शुल्कों की “फिर से समीक्षा की जाये”, ताकि इन्हें बढ़ाया जा सके। इसके लिए यह औचित्य दिया गया है कि “मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च बहुत बढ़ गया है”। इस समय, दिल्ली स्थित एम्स के अलावा देशभर में 14 और एम्स संस्थान हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने एम्स संस्थानों को आदेश दिया है कि उन्हें “एम.बी.बी.एस. पाठ्यक्रम के छात्रों की फीस बढ़ाकर और मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं के शुल्कों को बढ़ाकर, प्रति वर्ष 70-75 करोड़ रुपए जुटाने हैं”। वर्तमान अनुमानों के अनुसार, इस समय दिल्ली के एम्स की आमदनी प्रति वर्ष 2-3 करोड़ रुपये है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगर केंद्र सरकार के आदेश को लागू किया जाता है तो छात्रों की पढ़ाई और मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं के खर्च में कितनी विशाल बढ़ोतरी होगी।

दिल्ली के एम्स के रेजिडेंट डॉक्टरों की एसोसिएशन ने फीस और शुल्कों की वृद्धि के बारे में प्रशासन द्वारा जारी की गयी विज्ञप्ति का विरोध करते हुए, एक बयान जारी किया है। बयान में उन्होंने कहा है कि “हम सभी मेडिकल संस्थानों में छात्रों की फीस और मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं के शुल्कों की किसी भी प्रकार की वृद्धि का विरोध करते हैं। अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा हमारे देश के निर्माण की ईंटें हैं, जिन पर हम किसी भी व्यक्ति, संगठन या सरकार के साथ कोई समझौता नहीं कर सकते... एक विकसित राष्ट्र बनने के हमारे लम्बे समय से चले आ रहे सपने को पूरा करने के लिए हमें शिक्षित और कुशल नागरिकों की ज़रूरत है। यह सपना तभी पूरा हो सकता है जब केंद्र और राज्य सरकारें सभी नागरिकों को अच्छी शिक्षा और अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं कम दाम पर उपलब्ध करायेंगी”।

दिल्ली के एम्स के छात्र संघ ने भी फीस बढ़ाने की सरकार की योजनाओं का विरोध किया है। इस क़दम की भर्त्सना करते हुए, उसने इसे “मेडिकल शिक्षा को हमारे नौजवानों की पहुंच के बाहर” कर देने वाला क़दम बताया है।

दिल्ली का एम्स हमारे देश में मेडिकल शिक्षा के सर्वोच्च सरकारी संस्थानों में से एक है। यह अच्छी और उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रसिद्ध सरकारी संस्थान है। देश के अन्य भागों में जो एम्स संस्थान स्थापित किये गए थे, उन्हें दिल्ली के एम्स के नमूने पर ही बनाया गया था और यह वादा किया गया था कि अलग-अलग राज्यों के लोगों के लिए, उनमें भी इसी प्रकार की सर्वोच्च मेडिकल शिक्षा और उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जायेंगी।

केंद्र सरकार का यह हालिया आदेश फिर दिखाता है कि राज्य लोगों को कम दाम पर अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के अपने दायित्व से लगातार पीछे हटता जा रहा है। इसके साथ-साथ, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा जैसी बुनियादी सेवाओं का बढ़-चढ़कर निजीकरण करने की राज्य की नीति तेज़ी से लागू की जा रही है, ताकि शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों को हिन्दोस्तानी और विदेशी इजारेदार पूंजीपतियों के लिए एक अति-मुनाफे़दार बाज़ार बनाया जा सके।

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Dec 1-15 2019    Struggle for Rights    2019   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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