पनवेल में रेलवे के निजीकरण के खि़लाफ़ सभा का आयोजन

15 नवम्बर, 2019 को आल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ ऐसोसिएषन (ए.आई.एल.आर.एस.ए.) ने मुंबई की पनवेल षाखा में रेलवे के निजीकरण के खि़लाफ़ एक सभा आयोजित की। इस सभा में निजीकरण पर अपने विचार रखने के लिए कामगार एकता कमेटी को आमंत्रित किया गया था। इस सभा की अध्यक्षता मुंबई षाखा के साथी आर.के. षर्मा ने की तथा ए.आई.एल.आर.एस.ए. के सेंट्रल रेलवे के ज़ोनल सेक्रटरी साथी डी.एस. कोपरकर ने इस विषय पर अपना भाषण दिया। साथी कोपरकर ने बताया कि 24 सितम्बर को बेंगलूरू में ए.आई.एल.आर.एस.ए. की सी.डब्ल्यू.सी. की मीटिंग में लिए गए फैसले के अनुसार निजीकरण के ख़िलाफ़ पूरे देष में गोष्ठियां आयोजित की जाएं। इसी फैसले की दिषा में पनवेल में 15 नवम्बर को सभा रखी गई है। इसके बाद उन्होंने भारतीय रेल के चालकों के मुख्य मुद्दों पर बात रखी।

साथी कोपरकर ने बताया कि रेल दुर्घटनाओं के लिए रेल चालकों को लापरवाह बताकर उन्हें ज़िम्मेदार ठहराया जाता है इसके बारे मंे उन्होंने हाल ही का एक उदाहरण दिया। जिसमें एक चालक को गलत सिग्नल देने के कारण निलंबित कर दिया गया था। सहायक चालक ने ठीक से संकेत नहीं समझा और गलत लाल सिग्नल दे दिया, यह इसलिए हुआ कि सिग्नल नियम के अनुसार दाएं हाथ की तरफ होने की बजाय बाएं हाथ की तरफ था। इसके कारण चालक दुविधा में पड़ गया और दुर्घटना हो गई। गलत सिग्नल के लिए चालक को दोषी बताना तथा सज़ा देना गलत है। रेल चालकों को इस अन्याय के तथा काम के दौरान उनसे अनुचित मांगें करने के खि़लाफ़ एकजुट होकर संघर्ष करना चाहिए।

पूरे देष में आठ ऐसे रेल चालकों को नौकरी से हटा दिया गया है जिन्होंने इंजन को एक बोगी से हटाकर दूसरी बोगी में लगाने का विरोध किया। यह काम पहले रेलवे के अन्य कर्मचारी करते थे। रेल चालकों की कमी के कारण उनके आराम का समय भी कम कर दिया गया है। इसको उचित ठहराने के लिए रेल अधिकारी अपने इंस्पेक्टरों को रेल चालकों के घरों पर जाकर उनकी पत्नियों से बात करने के लिये भेज रहे हैं कि वे ध्यान दें कि उनके पति घर आने पर पूरा आराम कर पाएं । सेंट्रल रेलवे के भुसावल डिविजन में महिलाओं ने अधिकारियों के खि़लाफ़ मोर्चा निकाला। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पति 48 घंटे की ड्यूटी के बाद भी घर नहीं आ रहे हैं।

16 और 17 जुलाई 2019 को 4000 चालक दिल्ली में इकट्ठे हुए थे। इन्होंने मांग की थी कि भल्ला कमेटी के 1981 के फार्मूले के अनुसार उन्हें किलोमीटर भत्ता दिया जाए। ठीक उसी समय जब ए.आई.एल.आर.एस.ए. हड़ताल का नोटिस देने जा रहा था अधिकारियों ने सौ किलोमीटर के लिए 225 रुपये से बढ़ाकर 525 रुपये करने को घोषणा कर दी। यह क़दम हमारे संघर्ष को ख़त्म करने के लिये उठाया गया था। सातवें वेतन आयोग की सिफारिषों की घोषणा एक जुलाई 2017 को गई थी लेकिन नई सिफारिषों को लागू करने की घोषणा करने में उन्हें दो साल लगे।

वे नई सिफारिषें जो किलोमीटर भत्ता थीं। लेकिन फिर भी ये भल्ला कमेटी सिफारिषों से प्रति 100 किलोमीटर पर 223 रुपये कम है। अगले वेतन आयोग की अगली सिफारिषों के 10 सालों में रेल चालकों को इससे 15 से 25 लाख रुपये का घाटा होगा।

मुंबई में राष्ट्रीय औद्योगिक न्यायालय के अन्दर पिछले तीन सालों से जज़ ने इस मामले में कोई सहायता नहीं की है। रेल चालकों की मांगांे की तरफ बहुत ही रूखा व्यवहार अपनाया गया है।

साथी कोपरकर ने बताया कि रेलवे ने सी.एंड.डब्ल्यू (कोच एंव वेगन) विभाग को समाप्त कर दिया है और अब वे माल गाड़ियों से गार्डों को हटाना चाहते हैं। वे रेल सुरक्षा बल (आर.पी.एफ.) के कर्मचारियों को हटाना चाहते हैं। जल्द ही वे रेेल चालकों के बिना चलने वाली रेल लाना चाहते हैं। वे निजी रूप से 2000 सहायक रेल चालकों को सरकारी ट्रेनिंग स्कूल में प्राइवेट रेल चलाने की ट्रेनिंग दे रहे हैं।

राष्ट्रीय पेंषन स्कीम के बारे में पिछले दो सालों से कटौती नहीं की गई है और इस तरह सरकार के 14 प्रतिषत और रेलवे चालकों के योगदान की राषि जमा नहीं हो रही है। नई राष्ट्रीय पेंषन स्कीम के कारण पेंषन की कोई ज़िम्मेदारी नहीं है। क्योंकि सरकार ने निजी कंपनियों को पेंषन फंडों के प्रबंधन का जिम्मा देने का फैसला कर लिया है। पेंषन राषि बाज़ार पर निर्भर होगी। पेंषन हर महीने 6,000 रुपये से 7,000 रुपये तक की गिरावट हो सकती हंै इससे पहली पेंषन योजना के अधीन परिवारों को कम राषि भुगतान करने की योजना है।

एक तरफ तो यह कानून पेष किया जा रहा है कि केन्द्र सरकार के कर्मचारी 30 साल की नौकरी के बाद या 55 साल की उम्र के बाद अनिवार्य तौर पर रिटायर किए जाएंगे। दूसरी तरफ अनेकों सेवानिवृत्त रेल कर्मचारी आधे वेतन पर फिर से नौकरी पर रखे जा रहे हंै। मीटिंग में घोषणा की गई थी कि 8 दिसम्बर को संेट्रल रेलवे के रेल चालक अपनी मांगों के समर्थन में और निजीकरण के खि़लाफ़ मुंबई सी.एस.टी. पर सेट्रल रेलवे के जनरल मैनेजर के खि़लाफ़ जुलूस निकालेंगे। अधिकारी कहते हैं कि ए.आई.एल.आर.एस.ए. गैर कानूनी है। मान्यता प्राप्त नहीं है। सच्चाई यह है कि सरकार और रेल अधिकारी ए.आई.एल.आर.एस.ए. से डरते हैं।

इस सभा में रेलवे कर्मचारियों को सरकार के निजीकरण के 100 दिन के एक्षन प्लान के विरोध में अपने 100 दिन के एक्षन प्लान के साथ जबर्दस्त विरोध करने को कहा गया ।

इसके बाद कामगार एकता कमेटी के सचिव साथी मैथ्यू ने एक बहुत प्रभावषाली प्रस्तुति रखी। उन्होंने विस्तार से बताया कि किस प्रकार सरकार ने चोरी से एक के बाद एक अपनी निजीकरण की योजना लागू की और इसके साथ मज़दूरों को बेवकूफ बनाया कि रेलवे का निजीकरण नहीं होगा। उन्होंने बताया कि यह पूंजीपति वर्ग जिसके 150 इजारेदार घराने प्रमुख हैं, का एंजेडा है। उन्हीं के कामों को यह सरकार लागू कर रही है। इससे पहले की सरकारों ने भी ऐसा ही किया है। साथी ने ब्रिटेन और अर्जेंटीना के रेलवे के निजीकरण का उदाहरण देकर बताया कि किस प्रकार रेल भाड़ा बढ़ने के कारण, दुर्घटनाओं के बढ़ने के कारण तथा निजी आपरेटरों द्वारा अलाभकारी रूटों पर गाड़ी न चलाने के कारण निजीकरण का फैसला वापस लिया गया। इस सभा की समाप्ति रेलवे के निजीकरण और रेल चालकों के साथ अन्याय के खि़लाफ़ संघर्ष को तेज़ करने के निष्चय के साथ हुई।

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Dec 16-31 2019    Struggle for Rights    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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