सर्व हिन्द आम हड़ताल की जोर-शोर से तैयारियां: मज़दूर संगठनों ने रैलियां और जनसभाएं आयोजित कीं

5 और 6 दिसंबर को देश के अलग-अलग राज्यों से आये दसों-हजारों निर्माण मज़दूरों ने कठिन संघर्षों से जीते गए अपने अधिकारों की हिफाज़त में, संसद पर प्रदर्शन किया। उन्होंने एकमत से फैसला किया कि 8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल बनाने के लिए डटकर काम करेंगे।

Mobilization of workers in Delhi

28 नवम्बर को बी.पी.सी.एल., एच.पी.सी.एल. और दूसरी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के मज़दूरों ने उन कंपनियों का निजीकरण करने के सरकार के फैसले के खि़लाफ़ हड़ताल और प्रदर्शन किये। उस दिन हजारों मज़दूरों ने मुंबई की सड़कों पर लम्बा जुलूस निकाला। पेट्रोलियम मज़दूरों की सभी यूनियनों ने 8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल में सक्रियता से भाग लेने का फैसला किया है।

मज़दूर एकता लहर को कई रिपोर्टें मिली हैं कि अधिकतम राज्यों में ट्रेड यूनियनों और मज़दूर संगठनों के राज्य स्तरीय और जिला स्तरीय अधिवेशन किये गए हैं। इनमें दसों-हजारों ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं ने भाग लिया है। वे गांव-गांव और हर तहसील के मज़दूरों, किसानों और सभी मेहनतकशों तक हड़ताल का सन्देश ले जा रहे हैं।

केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों के राज्य स्तरीय प्रतिनिधियों के अलावा, मज़दूर एकता कमेटी के प्रतिनिधियों और रेलवे, बैंक, रक्षा क्षेत्र, बीमा, परिवहन क्षेत्र, आदि के मज़दूरों की फेडरेशनों के प्रतिनिधियों ने भी इन अधिवेशनों में भाग लिया।

सर्व हिन्द आम हड़ताल की तैयारियों के हिस्सा बतौर, 17 नवम्बर, 2019 को मज़दूर एकता कमेटी ने अपने कार्यकर्ताओं की एक सभा आयोजित की। सभा में आम हड़ताल के लिए मज़दूर वर्ग की चल रही तैयारियों का जायज़ा लिया गया और हड़ताल की सफलता के लिए देशभर में चल रही कोशिशों को दुगुना करने का फैसला लिया गया।

इस अभियान के हिस्सा बतौर, मज़दूर एकता कमेटी ने एक पुस्तिका के रूप में मज़दूरों को ‘आह्वान’ जारी किया है। आह्वान में मज़दूरों की उन लंबित मांगों पर रोशनी डाली गयी है, जिन्हें केन्द्रीय ट्रेड यूनियनें पेश करती आई हैं। आह्वान में यह समझाया गया है कि श्रम कानूनों में लाये जा रहे संशोधन किस प्रकार से पूरी तरह मज़दूर-विरोधी और पूंजीपतियों के पक्ष में हैं। यह समझाया गया है कि पूंजीपति वर्ग का निजीकरण का कार्यक्रम न सिर्फ मज़दूर-विरोधी है बल्कि समाज-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी भी है। आह्वान में कहा गया है कि मज़दूर वर्ग की मांगें पूरी तरह जायज़ हैं और उन्हें पूरा करना सम्पूर्ण समाज के हित में है। मज़दूरों, किसानों और सभी मेहनतकशों से अपील की गयी है कि आम हड़ताल को सफल बनाने के लिए एकजुट होकर काम करें।

मज़दूर एकता कमेटी के आह्वान की हजारों प्रतियां औद्योगिक क्षेत्रों, फैक्ट्री गेट, मज़दूरों की बस्तियों, मज़दूरों की हड़तालों, प्रदर्शनों और जनसभाओं व सभी मेहनतकशों के बीच में बांटी जा रही हैं।

मज़दूर एकता कमेटी के कार्यकर्ता अलग-अलग क्षेत्रों के मज़दूरों - पेट्रोलियम क्षेत्र के मज़दूरों, रेल चालकों, भारतीय रेल के गार्ड और ट्रैकमेन, सड़क परिवहन मज़दूरों, सरकारी कर्मचारियों, स्कूली शिक्षकों, विश्वविद्यालयों के शिक्षकों, निर्माण मज़दूरों, हवाई अड्डों के मज़दूरों, अस्पताल कर्मियों, आदि - को संबोधित कर रहे हैं। इन सभाओं में वे आगामी हड़ताल के महत्व और उसे सफल बनाने की ज़रूरत को समझा रहे हैं।

मज़दूर एकता लहर को प्रतिदिन, हड़ताल की तैयारियों के बारे में देश के कोने-कोने से ख़बरें मिल रही हैं।

मज़दूर एकता लहर अपने सभी पाठकों से निवेदन करती है कि मज़दूर एकता कमेटी के आह्वान को देश के सभी मेहनतकशों के बीच में बड़ी संख्या में बांटें।

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Dec 16-31 2019    Struggle for Rights    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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