भारत पेट्रोलियम के निजीकरण के खि़लाफ़ : मुबंई में पेट्रोलियम मज़दूरों ने लंबा जुलूस निकाला

28 नवंबर, 2019 को भारत पेट्रोलियम कारपोरेषन लिमिटेड (बी.पी.सी.एल.) और हिन्दोस्तान पेट्रोलियम काॅरपोरेषन लिमिटेड (एच.पी.सी.एल.) के दसों हज़ारों मज़दूरों ने इन निगमों के निजीकरण के विरोध में अखिल भारतीय हड़ताल में हिस्सा लिया। रिफाइनरी के सभी मज़दूरों के साथ-साथ, मार्केटिंग और पाईपलाईन में काम करने वाले मज़दूरों ने भी इस हड़ताल में हिस्सा लिया।

Oil workers action in Mumbai
Oil workers long march

बी.पी.सी.एल. में हड़ताल का आह्वान चार बी.पी.सी.एल. मज़दूर यूनियनों के संयुक्त मंच ने किया जिसमें - भारत पैट्रोलियम काॅरपोरेषन रिफाइनरी एम्पलाइज यूनियन (बी.पी.सी.आर.ई.यू.), भारत पैट्रोलियम टेक्निकल एण्ड नाॅन-टेक्निकल एम्प्लाइज़ एसोसिएषन (बी.पी.टी.एन.टी.ई.ए.), प्रोसेस टेक्नीषियन एसोसिएषन (पी.टी.ए.) और पैट्रोलियम वर्कस यूनियन शामिल थे। मार्केटिंग करने वाले मज़दूरों का एसोसिएषन भी साथ आया।

मुंबई में हजारों मज़दूरों ने महूल मंे स्थित रिफाइनरी से चेंबूर स्टेषन तक सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक 10 किमी लंबा जुलूस निकाला। इसमें महिला मज़दूरों का एक बहुत बड़ा जत्था शामिल था। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा बी.पी.सी.एल. के 53.3 प्रतिषत शेयरों को बेचने और एक निजी कंपनी को प्रबंधन सौंपने की घोषणा का विरोध करते हुए, पूरे रास्ते नारे लगाए। रास्ते भर उन्होंने पर्चे बांटे। इसमें समझाया गया कि निजीकरण कितना जन-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी है। कामगार एकता कमेटी के कार्यकर्ताओं ने पर्चे बांटे और लोगों को समझाया कि बी.पी.सी.एल. के साथ-साथ, स्वास्थ्य, षिक्षा, रेलवे और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों जैसी सभी आवष्यक सेवाओं का निजीकरण राष्ट्र-विरोधी और मज़दूर-विरोधी है।

चेंबूर स्टेषन के पास जुलूस एक विषाल रैली में समाप्त हुआ। पैट्रोलियम कर्मचारियों ने केंद्र सरकार के निजीकरण को विफल करने का दृढ़ संकल्प व्यक्त करते हुए नारेबाजी की। पैट्रोलियम कर्मचारियों की विषाल रैली को टेªड यूनियनों के नेताओं और मज़दूर आंदोलन के कार्यकर्ताओं ने संबोधित किया।

रैली की शुरुआत कामगार एकता कमेटी के काॅमरेड ए मैथ्यू के वक्तव्य के साथ हुई। काॅमरेड मैथ्यू ने एकजुट होकर बी.पी.सी.एल. के निजीकरण का विरोध करने के लिये रिफाइनरी के मज़दूरों को सलाम किया। मुबंई के मेहनतकश लोगों का समर्थन जुटाने के प्रयास में लंबा जुलूस निकालने के लिए के लिये उन्होंने इन मज़दूरों को बधाई दी।

टेªड यूनियन ज्वांइटस एक्षन कमेटी-महाराष्ट्र (टी.यू.जे.ए.सी.) के ज्वाइंट कन्वीनर काॅमरेड उतगी ने कहा कि इसकी बड़ी संभावना है कि सऊदी अरब की इजारेदार पेट्रोलियम कंपनी सऊदी अरामको बी.पी.सी.एल. को खरीदेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि सऊदी अरब के पीछे अमरीकी साम्राज्यवादी हैं और बी.पी.सी.एल. को बेचने का मतलब होगा कि भारत का तेल शोधन अमरीकी साम्राज्यवादियों के नियंत्रण में आ जाएगा।

ए.आई.टी.यू.सी. के काॅमरेड मिलिंद रानाडे ने रिफाइनरी के मज़दूरों को सलाम किया और वहां उपस्थित जनसमूह को बताया कि रिफाइनरी मज़दूरों का संघर्ष आम लोगों का संघर्ष है जिसमें दैनिक वेतन भोगी, छोटे दुकानदार, फेरीवाले, रिक्षा और टैक्सी चालक आदि हैं। क्योंकि निजीकरण के साथ पैट्रोल की बढ़ती क़ीमत का असर हर एक पर पड़ेगा।

सेवानिवृत न्यायाधीष कोलसे पाटिल ने रिफाइनरी के मज़दूरों को कहा कि वे पुलिस और जेल से न डरते हुए अपने संघर्ष को आगे बढ़ाएं ।

बी.पी.सी.एल. के निजीकरण का विरोध इस तरह की और अधिक हड़तालों व संयुक्त कार्यवाहियों के साथ करने के उत्साहपूर्ण आह्वान के साथ सभा का समापन हुआ।

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Dec 16-31 2019    Struggle for Rights    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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