अनाज मंडी में लगी भीषण आग में 43 लोगों की मौत: यह आदमखोर पूंजीवादी व्यवस्था इन मौतों के लिये जिम्मेदार है

8 दिसंबर की सुबह अनाज मंडी में एक भयानक हादसा हुआ। उत्तरी दिल्ली की अनाज मंडी इलाके में एक इमारत में आग लग जाने से 43 मज़दूरों की सोते हुए ही मौत हो गयी, वे या तो जल गए या धुएं की वजह से उनका दम घुट गया। जब इस चार मंजिला इमारत की वर्कशॉप में आग लगी उस समय ये मज़दूर काम के बाद गहरी नींद में सो रहे थे। ये मज़दूर इसी इमारत की दूसरी मंजिल पर काम करते थे और यहीं रहते थे। अग्निशामक दल की बहादुर कोशिश के बावजूद इन मज़दूरों की आग से मौत हो गयी। जब तक अग्निशामक दल वहां पर पहुंचा तब तक बहुत देर हो चुकी थी, लेकिन उन्होंने आग में फंसे कुछ लोगों का बचाया, कई लोगों को चोटें आईं।

Fire in factory in Delhi where 43 workers died

यह आग क्यों लगी? ऐसी क्या वजह थी कि ये मज़दूर बचकर नहीं निकल पाए। ये मज़दूर बिहार और उत्तर प्रदेश से आये बेहद ग़रीब प्रवासी मज़दूर थे।

रिपोर्ट से पता चलता है कि यह आग शाॅर्ट सर्किट की वजह से लगी। अग्निशामक दल के 150 बहादुर सदस्यों द्वारा अपनी जान जोखिम में डालने के बावजूद आग को जल्दी से बुझाया नहीं जा सका और मज़दूर सुरक्षित बचकर नहीं निकल सके। इसकी वजह थी कि यह इमारत भीड़-भाड़ वाले इलाके में है और अग्निशामक दल को इमारत में घुसने के लिए खिड़कियांे की ग्रिल को काटना पड़ा। इमारत में कही भी आग से बच निकलने का रास्ता नहीं था। इमारत से बाहर निकलने का केवल एक ही दरवाज़ा है, और दूसरे दरवाज़े के रास्ते में बैग बनाने का सामान रखा हुआ था। इस सामान का इस्तेमाल मज़दूर बैग बनाने और उसको पैक करने के लिए करते थे। बिलिं्डग में आग बुझाने के लिए कही भी सुरक्षा उपकरण मौजूद नहीं थे। मीडिया में छपे चित्रों से पता चलता है कि बिजली की नंगी तारें जगह-जगह पर लटक रही थीं। खुद अपने लिए और अपने परिवार के लिए आजीविका कमाने के लिए ये मज़दूर ऐसी अमानवीय हालत में जीने के लिए मजबूर हैं।

इस तरह के हादसे मौजूदा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करते हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के कई इलाके आज भी मध्ययुगीन हालात में अटके हुए हैं। ये हादसे कोई अचानक हुई दुर्घटना नहीं हैं। ये हादसे राज्य और उसके प्रशासन की गुनहगारी और गैर-ज़िम्मेदाराना फ़ितरत को दर्शाते हैं। आज जो भी देश खुद को आधुनिक होने का दावा करता है, ज़रूरी है कि वहां उत्पादन या मैन्युफैक्चरिंग के लिए सुनियोजित ढांचे बनाने की ज़रूरत है, जहां व्यवसायिक ख़तरों को कम करने के उपाय किये जाने चाहिए, जिनका सही तरीके से पंजीकरण किया गया हो और प्रशासन इसकी देखभाल और निगरानी करता हो।

हर एक मज़दूर को सुरक्षित और स्वस्थ्य हालात में काम करने का अधिकार है। कई दशकों से हमारे देश में दुनियाभर में मज़दूर अपने अधिकारों की लडाई लड़ते रहे हैं। अपने संघर्ष की वजह से मज़दूर कुछ अधिकार हासिल करने और अपने हित में कानून बनवाने में एक हद तक क़ामयाब रहे हैं लेकिन इन कानूनों का इस मज़दूर-विरोधी पूंजीवादी व्यवस्था में खुले आम उल्लंघन किया जाता है। प्रशासन और सरकार न केवल ये जानते हैं कि कानूनों का उल्लंघन किया जा रहा है, बल्कि इसमें उनकी मिलीभगत होती है। न कि दिल्ली की राज्य सरकार हो और न ही केंद्र सरकार, जिनके हाथों में कानून और व्यवस्था की ज़िम्मेदारी है वह इस गुनाह में अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकती।

हमें यह मांग करनी होगी कि ऐसे मामलों में कमान की ज़िम्मेदारी को सुनिश्चित करने के लिए ऊंचे पदों पर बैठे लोगों पर मुक़दमा चलाया जाना चाहिए, और उनको सज़ा दी जानी चाहिए। इस अधिकतम मुनाफ़ों की भूखी मज़दूर-विरोधी व्यवस्था को ख़त्म करना होगा और एक ऐसी व्यवस्था का निर्माण करना होगा जो सभी मज़दूरों के लिए ऐसे हादसों से सुरक्षा दे सके और मज़दूरों के लिए काम के सुरक्षित हालात सुनिश्चित कर सके।

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Dec 16-31 2019    Voice of the Party    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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