बाबरी मस्जिद के विध्वंस की 27वीं बरसी पर:

हजारों लोगों ने इंसाफ के लिए और गुनहगारों को सज़ा देने की मांग को लेकर नई दिल्ली में प्रदर्शन किया और जुलूस निकाला

6 दिसंबर को दोपहर 2 बजे से लोग नई दिल्ली के मंडी हाउस चैक पर इकट्ठे होने लग गए। वे शहर के हर कोने से आये। उनमें जवान लड़के-लड़कियां थे तथा बुजुर्ग स्त्री-पुरुष भी थे। उनमें अलग-अलग धर्मों को मानने वाले थे, अलग-अलग भाषा बोलने वाले थे। वे सब एकत्रित हुए थे, हुक्मरानों की ‘बांटो और राज करो’ की नीति का विरोध करने के लिए और लोगों की एकता व भाईचारे को बचाए रखने के अपने संकल्प की आवाज़ को बुलंद करने के लिए। वे सब एक जबरदस्त विरोध प्रदर्शन में भाग लेने आये थे, जिसमें बाबरी मस्जिद के विध्वंस को आयोजित करने वाले गुनहगारों को सज़ा दिलाने की मांग उठाई जा रही थी।

Dec 6 rally

6 दिसंबर, 2019 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस की 27वीं बरसी थी। विध्वंस के ठीक बाद, देशभर में लोग उसके विरोध में सड़कों पर उतर आये थे। उसके बाद से, हर साल, उस दिन पर, लोग सड़कों पर उतरकर यह मांग उठाते हैं कि एक ऐतिहासिक इबादत के स्थान को गिराने और देशभर में सांप्रदायिक हिंसा आयोजित करने वाले गुनहगारों को कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाये। 27 बरस बीत चुके हैं और अब भी उनके खि़लाफ़ कोई कार्यवाही नहीं की गयी है। लोगों का संकल्प और भी बढ़ गया है कि जब तक इंसाफ नहीं मिलता, तब तक संघर्ष जारी रखना है। 6 दिसंबर, 2019 के जुलूस में भाग लेने वाले सभी लोगों की यही भावना थी।

जुलूस के आगे एक विशाल बैनर था जिस पर ये नारे लिखे हुए थे -

“बाबरी मस्जिद विध्वंस के गुनहगारों को सज़ा दें!”,

“सांप्रदायिक बंटवारे की राजनीति नहीं, नहीं!

लोगों में अमन, एकता और खुशहाली सही, सही!”

जजबात भरे वातावरण में लोगों ने ठीक 3 बजे दोपहर को प्रस्थान करना शुरू किया। जुलूस बहुत ही अनुशासन के साथ आगे बढ़ा। सबके हाथ में शानदार बैनर व प्लेकार्ड थे। नौजवान कार्यकर्ताओं ने सुनिश्चित किया कि कोई भी भड़काऊ हरकत न हो सके।

बाबरी मस्जिद के विध्वंस के गुनहगारों को सज़ा दें!”, “राजकीय आतंकवाद मुर्दाबाद!”, “1984 के जनसंहार, 1992-93 के सांप्रदायिक हत्याकांडों, गुजरात के  2002 के जनसंहार और मुजफ्फरनगर में 2013 के कत्लेआम के गुनहगारों को सज़ा दें!”, “‘पूर्ण न्याय’ के नाम पर न्याय के साथ खिलवाड़ नहीं चलेगा!”, “बांटो और राज करो की राजनीति नहीं चलेगी!”, “हिन्दोस्तानी राज्य सांप्रदायिक है, लोग नहीं!”, “जमीर के अधिकार पर हमला नहीं चलेगा!”, “एक पर हमला सब पर हमला!” - इन नारों से नई दिल्ली की सड़कें गूंज उठीं।

6 Dec rally2019
6 Dec rally 2019
6 Dec rally2019

नारों को सुनकर, बहुत से लोग अपने दफ़्तरों से बाहर निकल आये। उनके सामने बहुत ही शानदार दृश्य था। जुलूस के भागीदारों में नाइंसाफी के खि़लाफ़ गुस्सा साफ जाहिर था। इंसाफ की मांग सभी के दिल की भावनाओं के साथ गूंज रही थी। सैकड़ों लोग चारों तरफ से आकर जुलूस में मिल गए। जब जुलूस जंतर मंतर पर पहुंचा, जहां जनसभा होने वाली थी, तब वहां पहले से ही आये हुए सैकड़ों लोगों ने जुलूस का स्वागत किया। शहर में जगह-जगह पर लगाये गए पोस्टरों से आकर्षित होकर भी अनेक लोग जनसभा में पहुंचे।

जनसभा के स्थान पर एक बड़ा मंच लगाया गया था। मंच के पीछे एक शानदार बैनर लगा था जिस पर मुख्य नारे लिखे हुए थे।

सभा का संचालन बिरजू नायक और सिराज तालिब ने किया। बिरजू नायक ने सबसे पहले लोक राज संगठन के अध्यक्ष, एस.राघवन को मंच पर आने का आह्वान किया। फिर उन्होंने हरेक सहभागी संगठन के नेता का नाम घोषित किया और उनसे मंच पर आने का आवेदन किया।

इस जनप्रदर्शन और रैली को संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। इसके आयोजक संगठन थे - लोक राज संगठन, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी आॅफ इंडिया, वेलफेयर पार्टी आॅफ इंडिया, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी, जमात ए इस्लामी हिन्द, पाॅपुलर फ्रंट आॅफ इंडिया, यूनाइटेड मुस्लिम्स फ्रंट, लोक पक्ष, सिटिजं़स फाॅर डेमोक्रेसी, मुस्लिम मजलिस-ए-मुषावरत (दिल्ली), कैंपस फ्रंट आॅफ इंडिया, दिल्ली पीपुल्स फोरम, सी.पी.आई. (एम.एल.) न्यू प्रोलेतेरियन, एन.सी.एच.आर.ओ., न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी आॅफ इंडिया, मज़दूर एकता कमेटी, हिन्द नौजवान एकता सभा, पुरोगामी महिला संगठन, स्टूडेंट इस्लामिक आॅर्गनाइजेषन, नेशनल वूमेन फ्रंट, आल इंडिया इमाम्स कौंसिल, द सिख फोरम और ए.पी.सी.आर.।

जनसभा को लोक राज संगठन से एस राघवन, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी आॅफ इंडिया से तसलीम रहमानी, वेलफेयर पार्टी आॅफ इंडिया से डा. एस.क्यू.आर. इलियास, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी से कामरेड प्रकाश राव, पाॅपुलर फ्रंट आॅफ इंडिया से मोहम्मद साकिब, जमात ए इस्लामी हिन्द से मलिक मोहतासीम खान, यूनाइटेड मुस्लिम्स फ्रंट से एडवोकेट शाहिद अली, मुस्लिम मजलिस-ए-मुषावरत (दिल्ली) से अब्दुल राशिद अगवां और लोक पक्ष से कामरेड के.के. सिंह ने संबोधित किया।

इसके अलावा मंच पर उपस्थित थे - इंडियन नेशनल लीग से मोहम्मद सुलेमान, दिल्ली पीपुल्स फोरम से अर्जुन सिंह, सिख फोरम से प्रताप सिंह, एन.सी.एच.आर.ओ. से अंसार इंदौरी, न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी आॅफ इंडिया से डी.आर. सोरी, स्टूडेंट इस्लामिक आॅर्गनाइजेषन से माज सलान मनियार, हिन्द नौजवान एकता सभा से संतोष कुमार, पीपल्स फ्रंट दिल्ली से का. नरेन्द्र, ए.पी.सी.आर. से एडवोकेट मोहम्मद अनवर, ए.आई.एम.आई.एम. से मो. आरिफ सैफी आदि।

वक्ताओं ने एक आवाज में, बाबरी मस्जिद के विध्वंस के लिए हुक्मरान वर्ग की दो मुख्य पार्टियों - कांग्रेस पार्टी और भाजपा - को दोषी ठहराया। सबने यह बात रखी कि बाबरी मस्जिद का विध्वंस न सिर्फ मुसलमान समुदाय पर बल्कि देश के सभी लोगों पर हमला था।

वक्ताओं ने याद दिलाया कि लिब्रहान आयोग और श्री कृष्ण आयोग ने यह साबित किया था कि बाबरी मस्जिद के विध्वंस और उसके बाद हुयी हिंसा को आयोजित करने में उच्चतम स्तर के राजनीतिक नेता शामिल थे। परन्तु 27 साल बाद भी उन पर कोई कार्यवाही नहीं की गयी है।

वक्ताओं ने गुस्सा जाहिर किया कि बाबरी मस्जिद के विध्वंस के लिए जि­़म्मेदार लोगों के आपराधिक मामलों की फाइलें सी.बी.आई. की अदालतों में धूल पकड़ रही हैं। मस्जिद की रक्षा करने और लोगों को बचाने की ज़िम्मेदारी जिनकी थी, उन्हें जवाबदेह नहीं ठहराया गया है। कमान की ज़िम्मेदारी के असूल को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है।

वक्ताओं ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने 9 नवम्बर के फैसले में यह माना है कि 1949 में मस्जिद के अन्दर मूर्तियों का रखा जाना और दिसंबर 1992 में मस्जिद का ध्वंस, दोनों गैर कानूनी कार्यवाहियां थीं। उन्होंने यह सवाल उठाया कि अदालत ने फिर कैसे फैसला किया कि जिस जगह पर मस्जिद खड़ी थी, उस भूमि को राम लल्ला की मूर्ती के प्रतिनिधि पक्ष को सौंप दिया जायेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने यह माना है कि उस भूमि की मालिकी के कोई दस्तावेजी सबूत नहीं हैं। वक्ताओं ने पूछा कि कोर्ट ने किस आधार पर यह फैसला किया है कि जिस भूमि पर बाबरी मस्जिद इतने सालों तक खड़ी थी, उसे राम मंदिर बनाने के लिए दे दिया जाये।

सुप्रीम कोर्ट ने ऐलान किया है कि इस बात का कोई दस्तावेजी सबूत नहीं है कि 1527 में जब मस्जिद को बनाया गया था, और 1856 में जब अवध पर बरतानवी उपनिवेशवादी हुकूमत स्थापित हुयी थी, उस बीच में वहां मुसलमान इबादत करते थे। यह बहुत ही बेतुका सवाल है। कोई मस्जिद 330 सालों तक क्यों खड़ी रही होगी अगर वहां कोई इबादत ही नहीं करता था?

वक्ताओं ने यह समझाया कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला बरतानवी उपनिवेशवादी अधिकारियों के दस्तावेज़ों पर आधारित है, जबकि बरतानवी हुक्मरानों ने अपनी ‘बांटो और राज करो’ की नीति के चलते, जानबूझकर इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश किया था। यह जानी-मानी बात है कि बरतानवी हुक्मरानों ने 1857 के महान ग़दर के बाद, हमारे लोगों के इतिहास के सारे दस्तावेज़ों को सोच समझकर नष्ट कर दिया था, ताकि हमारे इतिहास को मिटा दिया जा सके और वे अपनी हुकूमत को जायज़ ठहराने के लिए इतिहास को फिर से लिख सकें। बरतानवी हुक्मरानों ने ही अपने अख़बार में यह झूठ फैलाया था कि राम जन्मभूमि पर मंदिर को तोड़कर बाबरी मस्जिद को बनाया गया था।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला, कि सरकार मस्जिद के निर्माण के लिए अयोध्या में किसी और जगह पर 5 एकड़ जमीन नियुक्त कर दे, उस पर वक्ता बहुत गुस्से में थे। उन्होंने ऐलान किया कि बीते 27 सालों से हम किसी 5 एकड़ भूमि के लिए नहीं लड़ते आये हैं! हम न्याय चाहते हैं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला “पूर्ण न्याय” के नाम पर घोर अन्याय है। उन्होंने अपनी इस मांग को दोहराया की सुप्रीम कोर्ट बाबरी मस्जिद की जगह पर राम मंदिर बनाने के अपने फैसले पर पुनः विचार करे।

वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सबको कहा जा रहा है कि सांप्रदायिक सद्भावना बनाये रखने के लिए इस फैसले को स्वीकार कर लें। परन्तु जब तक मानव समाज के खि़लाफ़ अपराध करने वाले गुनहगारों को सज़ा नहीं दी जायेगी, तब तक न्याय नहीं हो सकता है।

सभा को संबोधित करते हुए, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के प्रवक्ता, कामरेड प्रकाश राव ने कहा कि यह संयुक्त रैली एक ऐलान है कि इस देश के लोग इंसाफ के संघर्ष को कभी नहीं रोकेंगे, चाहे उसके लिए कितनी ही कुर्बानी करनी पड़े। हिन्दोस्तानी राज्य सांप्रदायिक है, न कि हमारे लोग। हम सांप्रदायिक भेदभाव और बंटवारे की राजनीति को ठुकराते हैं। हम लोगों के बीच अमन, एकता और खुशहाली चाहते हैं। संसद में बैठी पक्ष और विपक्ष की पार्टियां कह रही हैं कि “न्याय दिया गया है”, कि “लोगों ने इसे मान लिया है”। यह संयुक्त जुलूस और रैली देश की जनता का जवाब है, कि “पूर्ण न्याय” ने नाम पर घोर अन्याय हुआ है। हम इस अन्याय को कभी नहीं मान सकते हैं।

बाबरी मस्जिद का विध्वंस हुक्मरान वर्ग और उसके राज्य द्वारा देश के लोगों के दिल पर भोका गया एक छुरा था। उनका उद्देश्य था लोगों की एकता को तोड़ना और अपनी जन-विरोधी हुकूमत को बरकरार रखना। प्रकाश राव ने याद दिलाया कि 1857 के महान ग़दर के दौरान हमारे लोग, अपनी अलग-अलग धार्मिक आस्थाओं के बावजूद, उपनिवेशवादियों से देश को मुक्त कराने के लिए एक सांझे झंडे तले इकट्ठे हुए थे। मौलवी और पंडित, ग्रंथी और पादरी, सभी इस उच्च लक्ष्य के लिए फांसी के फंदे को चूमने को तैयार थे। बर्तानवियों ने सीख लिया कि अपनी हुकूमत को बरकरार रखने के लिए उन्हें हिन्दुओं और मुसलमानों को आपस में भिड़ाने की ज़रूरत थी। उन्होंने ‘बांटो और राज करो’ की नीति को लागू करना शुरू किया। बर्तानवियों ने ही अयोध्या विवाद को शुरू किया था। जब तक अवध में नवाब का शासन था, तब तक बाबरी मस्जिद को लेकर हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच में कोई झगड़ा नहीं हुआ था। जब अवध का शासन बर्तानवियों के हाथ में आया, तब उन्होंने अपने समाचार पत्रों में यह लिखना शुरू कर दिया कि मस्जिद को, राम जन्मभूमि पर, राम मंदिर को तोड़कर, बनाया गया था। उन्होंने बड़े सुनियोजित तरीके से इस मुद्दे पर सांप्रदायिक दंगे आयोजित किये।

इस ‘बांटो और राज करो’ की राजनीति की वजह से ही, 1947 में देश का बंटवारा हुआ था, जिसका असर हिन्दोस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के लोग आज तक महसूस कर रहे हैं। आज़ादी के बाद यह झूठ फैलाया गया था कि मुसलमानों ने देश को बांटा था। सच तो यह है कि बर्तानवियों ने देश के खूनी बंटवारे को आयोजित किया था। हिन्दुओं, सिखों और मुसलमानों ने मिलकर, बर्तानवियों को खदेड़ने के लिए संघर्ष किया था और अपनी जानें कुर्बान की थीं। यह देश हम सभी का है।

1857 के महान ग़दर के दौरान, हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी द्वारा आयोजित 1913 - 1915 की बग़ावत के दौरान, उपनिवेशवादी हुकूमत से आज़ादी के सभी संघर्षों के दौरान, सभी धर्मों के लोगों ने कंधे से कन्धा मिलकर संघर्ष किया था। यही हमारे लोगों का असली इतिहास है।

प्रकाश राव ने बताया कि हिन्दोस्तानी हुक्मरान वर्ग ने ‘बांटो और राज करो’ की राजनीति को और कुशल बना दिया है। हुक्मरान वर्ग का यह रास्ता देश और लोगों के लिए तबाहकारी है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि अमरीकी साम्राज्यवादी सारी दुनिया पर अपना वर्चस्व जमाने के इरादे से, मुसलमानों को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने कई देशों का विनाश कर दिया है और अब हिन्दोस्तान का भी विनाश करना चाहते हैं। हमारे हुक्मरान वर्ग ने साबित कर दिया है कि लोगों की एकता को बनाये रखने के लिए उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है।

अंत में कामरेड प्रकाश राव ने कहा कि हमें देश के नव-निर्माण की दिशा में आगे बढ़ना होगा। हमें मज़दूरों, किसानों और सभी मेहनतकशों, सभी धर्मों के लोगों को देश के नव-निर्माण के लिए लामबंध करना होगा, ताकि सब को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित हो।

लोग सभी वक्ताओं को बहुत ध्यान से सुन रहे थे। कोई भी रैली के स्थान को छोड़कर नहीं गया। रैली की ख़बर लेने के लिए आये मीडिया कर्मी आपस में यह बात करते हुए सुनायी दिए कि - “यहाँ जो भी आये हैं, बहुत ही जागरुकता के साथ आये हैं। देखो कितने अनुशासन के साथ आये हैं!” मीडिया कर्मियों ने कुछ नौजवान भागीदारों से पूछा - “क्या बेरोज़गारी इस मुद्दे से ज्यादा बड़ा मुद्दा नहीं है?” नौजवान ने उत्तर दिया - “बेरोज़गारी अवश्य ही बहुत बड़ा मुद्दा है और उसे ख़त्म करने के लिए हम संघर्ष कर रहे हैं। पर आज हम उस नाइंसाफी के खि़लाफ़ लड़ने के लिए एकजुट हुए हैं, जो 27 बरस पहले हमारे साथ किया गया था और 9 नवम्बर, 2019 को फिर से किया गया है। हम इंसाफ के लिए लड़ रहे हैं, हुक्मरानों की ‘बांटो और राज करो’ की राजनीति के खि़लाफ़ लड़ रहे हैं। हम इस लड़ाई को कभी नहीं छोड़ेंगे!”

9 नवम्बर, 2019 को जब सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या भूमि विवाद पर अपना फैसला सुनाया था, उस दिन से हुक्मरान वर्ग और उसकी पार्टियां लगातार यह प्रचार करती जा रही हैं कि लोगों को यह फैसला मानना पड़ेगा, कि और कोई चारा नहीं है। हुक्मरान वर्ग ने लोगों को डरा-धमका कर चुप कराने की कोशिश की है। बाबरी मस्जिद के विध्वंस

की 27वीं बरसी पर आयोजित इस जुझारू जुलूस और रैली ने दिखा दिया कि हुक्मरान वर्ग और उसकी राजनीतिक पार्टियों की ये कोशिशें नाकामयाब रही हैं। हिन्दोस्तान के लोग गुनहगारों को सज़ा दिलाने के लिए और इंसाफ पाने के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे। लोग ग़दरियों के रास्ते पर चलेंगे। वे अपने-अपने धर्मों को एक तरफ रखकर, एक झंडे तले इकट्ठे होकर, इंसाफ के लिए और सबको सुख व सुरक्षा दिलाने वाले समाज के लिए संघर्ष करेंगे।

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Dec 16-31 2019    Struggle for Rights    Communalism     History    Popular Movements     Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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