नव वर्ष की शुभकामनाएं 

प्यारे साथियों,
आप सभी को क्रांतिकारी अभिवादन!
आज, नव वर्ष में प्रवेश करते हुए, हमें वर्तमान स्थिति पर विचार करना है और यह विचार करना है कि हमारे प्यारे देश के लोगों के उज्ज्वल भविष्य के लिए हमें क्या करना होगा।
बीते दशक और खास कर बीते वर्ष में दुनिया की पूंजीवादी-साम्राज्यवादी व्यवस्था का गहरा सब-तरफा संकट बहुत स्पष्ट हो गया है। हमारा हुक्मरान वर्ग और ज्यादा वहशियाना तरीके से लोगों पर हमले कर रहा है। वह अपनी हुकूमत को बचाए रखने की बेतहाशा कोशिश कर रहा है और मज़दूरों, किसानों व दूसरे मेहनतकशों के शोषण को और तेज़ कर रहा है। 
इन परिस्थितियों में हमारे लोगों के लिए बहुत बड़े खतरे हैं। जैसे-जैसे मज़दूर वर्ग और लोगों के संघर्ष तेज़ होते जा रहे हैं, वैसे-वैसे हुक्मरान वर्ग और उसका राज्य हमारी एकता को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। नागरिकता संशोधन कानून को पास करने और नागरिकों की राष्ट्रीय पंजी बनाने के फैसले का मक़सद है लोगों को धर्म के आधार पर बांटना। पर हर दिन, देश के हर कोने में, करोड़ों लोग लगातार सड़कों पर उतरकर, इनका विरोध कर रहे हैं। लोग राज्य के खूंखार दमन का सामना करते हुए विरोध प्रदर्शनों में बाहर निकल रहे हैं। इन बहादुर क़दमों के ज़रिये हम यह दावा कर रहे हैं कि हिन्दोस्तान हम सभी का है। 
साथियों, 
हमारे लोगों ने हमेशा ही एक ऐसा समाज चाहा है जिसमें मज़दूरों, किसानों और सभी मेहनतकशों को असली आज़ादी मिलेगी। हमने एक ऐसे समाज का सपना देखा है जिसमें लोगों को रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, रोज़गार और एक सम्मानजनक जीवन की सारी जरूरतें सुनिश्चित होंगी, जिसमें लोग समाज के सांझे हित में अपना योगदान दे सकेंगे। पर हमारा यह सपना आज भी अधूरा है। 
हमारे हुक्मरान यह दावा करते हैं कि देश में लोकतंत्र है। परन्तु वर्तमान लोकतंत्र में फैसले लेने की ताक़त मुट्ठीभर बड़े-बड़े इजारेदार पूंजीपतियों के हाथों में संकेंद्रित है। फैसले लेने में मज़दूरों और किसानों की कोई भूमिका नहीं होती है। इस लोकतंत्र में चाहे कोई भी पार्टी चुनाव जीतकर सत्ता में आ जाये, परन्तु हुक्मरान वर्ग पूंजीपति वर्ग ही रहता है। मज़दूरों और लोगों पर पूंजीपति वर्ग का अधिनायकत्व बना रहता है। 
हमें एक ऐसा लोकतंत्र चाहिए जिसमें फैसले लेने की ताक़त लोगों के हाथ में होगी। इस ताक़त का इस्तेमाल करके लोग सभी के लिए सुख और सुरक्षा सुनिश्चित कर सकेंगे। हमें श्रमजीवी लोकतंत्र की ज़रूरत है। इसके लिए, मज़दूरों और किसानों को पूंजीपति वर्ग के हाथों से राजनीतिक सत्ता को अपने हाथों में लेना होगा। उत्पादन के साधनों को मज़दूरों और किसानों के हाथों में लेना होगा। तभी सब के लिए सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। 
साम्राज्यवादियों और हिन्दोस्तानी हुक्मरान वर्ग पर कम्युनिज़्म का भूत सवार है। वे इस मरणासन्न पूंजीवादी व्यवस्था को बरकरार रखने के लिए भरसक कोशिश कर रहे हैं। वे लोगों को क्रांति और समाजवाद का रास्ता अपनाने से रोकने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। बरतानवी-अमरीकी साम्राज्यवादी और हिन्दोस्तानी हुक्मरान वर्ग इस इलाके में जंग की तैयारी कर रहे हैं। 
साथियों, 
हमने अपनी पार्टी की स्थापना के 40वें वर्ष में प्रवेश किया है। इस पूरे दौर में, हम पूंजीपति वर्ग की हुकूमत की व्यवस्था की जगह पर मज़दूर वर्ग और मेहनतकश किसानों के गठबंधन की हुकूमत की व्यवस्था स्थापित करने के अपने लक्ष्य पर अडिग रहे हैं। हम समाज को संकट से बाहर निकालने के कार्यक्रम - नव-निर्माण के कार्यक्रम - के इर्द-गिर्द मज़दूर वर्ग और मेहनतकशों की राजनीतिक एकता बनाने के लिए काम करते रहे हैं। क्रांति के ज़रिये एक समाजवादी समाज का निर्माण करना हमारा रणनैतिक लक्ष्य है।
हमारे सामने एक महत्वपूर्ण कार्य है कम्युनिस्ट आन्दोलन के अन्दर उस लाइन को हराना, जो सरमायदारों के वर्तमान राज्य और लोकतंत्र के बारे में भ्रम पैदा करता है और मज़दूरों व किसानों को क्रांति के रास्ते से भटकाता है। जब तक हम ऐसा नहीं करेंगे, तब तक क्रांति नहीं आयेगी और हिन्दोस्तानी समाज एक संकट से दूसरे संकट में फंसता रहेगा। 
हमें अपनी पार्टी को मजबूत करने पर पूरी ताक़त लगानी होगी। इसका मतलब है पार्टी के बुनियादी संगठनों को मजबूत करना, कथनी और करनी में एक-दूसरे का आदर करना, कमजोरियों पर काबू पाने में एक-दूसरे की मदद करना, एक-दूसरे की ताक़त बढ़ाना और अपनी सांझी जीतों पर खुशी मनाना। हमें पार्टी के हर सदस्य की जागरुकता को बढ़ाते रहना होगा। हमें अपनी सेहत पर ध्यान देना होगा, ताकि हम पार्टी के कार्यों को पूरा करने के लिए शारीरिक और मानसिक तौर पर क़ामयाब हों। 
क्रांति लाने का काम अधूरा रह गया है। इसलिए, प्यारे साथियों, इस काम को पूरा करना हमारी ज़िम्मेदारी है। 
साथियों, मैं आप सभी का हार्दिक क्रांतिकारी अभिवादन करता हूं और नए साल में आपकी तथा आपके परिजनों की अच्छी सेहत व ढेर सारी सफलताओं की शुभकामनाएं करता हूं। 
हमारी पार्टी ज़िंदाबाद! 
आने वाले क्रांतिकारी तूफानों के लिए और जोश के साथ तैयारी करें!
माक्र्सवाद-लेनिनवाद ज़िंदाबाद! 
लाल सिंह, महासचिव 
हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी 

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Jan 1-15 2020    Voice of the Party    Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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