देशभर के मज़दूर संघर्षों को तेज़ करने की तैयारी में!

30 सितम्बर, 2019 को सम्पन्न हुए श्रमिकों के राष्ट्रीय खुले अधिवेशन ने 8 जनवरी, 2020 को सर्व हिन्द हड़ताल करने का आह्वान दिया था। इस आह्वान की प्रतिक्रिया में देशभर के ट्रेड यूनियन व मज़दूर संगठन अपने-अपने क्षेत्रों में मज़दूरों को लामबंध कर रहे हैं। 2019 में मज़दूर वर्ग व मेहनतकश लोगों के बहुत से तबके ने रोज़ी-रोटी की सुरक्षा और अच्छी शिक्षा व स्वास्थ्य सेवा के अपने अधिकारों की रक्षा में तथा संगठित होने के अपने अधिकार पर हो रहे हमलों के ख़िलाफ़ संघर्ष करते आये हैं। सरमायदारों द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के निजीकरण और राष्ट्र की सम्पत्ति को कौड़ियों के मोल हिन्दोस्तानी व विदेशी इजारेदारों को बेचने के क़दमों का बहादुरी से विरोध हो रहा है।

8 जनवरी, 2020 की आम हड़ताल से मज़दूर वर्ग अपने आंदोलन को और तीव्र करने की तैयारी कर रहा है। मज़दूरों के अधिवेशन की मांग है कि देशभर में सभी के लिये, न्यूनतम वेतन 21,000 रुपये होना चाहिये और पेंशन कम से कम 10,000 रुपये प्रति माह होनी चाहिये। इसकी मांग है कि शहरी और ग्रामीण परिवारों के लिये रोज़गार सुनिश्चित होना चाहिये। मज़दूरों के लिये सामाजिक सुरक्षा व बजट में आवंटन के साथ मनरेगा में रोज़़गार के दिनों को बढ़ाया जाना चाहिये। इसकी मांग है कि सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों, शिक्षा व स्वास्थ्य सेवा के निजीकरण को तुरंत रोका जाये और रणनैतिक क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी पूंजी (एफ.डी.आई.) को रोका जाये। इसकी मांग है कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार, कृषि उत्पादों की लाभकारी दामों पर खरीद सुनिश्चित की जाये, किसानों के ऋणों को माफ़ किया जाये और उन्हें संस्थागत ऋण उपलब्ध कराये जायें। इसकी मांग है कि व्यापक सार्वजनिक वितरण व्यवस्था हो। इसने मांग की है कि नौकरियों को स्थाई किया जाये, सभी स्कीम मज़दूरों को कर्मचारियों का दर्ज़ा दिया जाये, ठेके पर श्रम को ख़त्म किया जाये और ठेका मज़दूरों को नियमित किया जाये, समान काम के लिये समान वेतन व समान काम की शर्तें हों, इत्यादि।

2019: A year of escalation of struggles of working class

doctorsstrike
Oil workers convention
Garment_workers_Bengaluru
Against_Bank_mergers
jacto_strike
NTPC_Demo
Tag:   

Share Everywhere

Jan 1-15 2020    Struggle for Rights    Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

(Click thumbnail to download PDF)

5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

(Click thumbnail to download PDF)

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

(Click thumbnail to download PDF)

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)