होंडा मोटर्स एंड स्कूटर्स इंडिया में विरोध प्रदर्शन : गुरुग्राम और रेवाड़ी के मज़दूर एकजुट हुये

गुरुग्राम और बावल इलाके में दर्जनों उत्पादन इकाइयों के हजारों मज़दूर, ट्रेड यूनियन कौंसिल के बुलावे पर, हड़ताल पर बैठे होंडा मोटर्स एंड स्कूटर्स इंडिया लिमिटेड (एच.एम.एस.आई.) के मज़दूरों के समर्थन के एकजुट होकर आगे आये हैं। होंडा मोटर्स एंड स्कूटर्स इंडिया लिमिटेड के ठेका मज़दूरों की हड़ताल के समर्थन में इन इकाइयों के मज़दूरों ने अपनी यूनिट के एक समय के भोजन का बहिष्कार किया।

Honda workers

मारुती-सुजुकी इंडिया लिमिटेड के तीन कारखानों, एच.एम.एस.आई., बेल्ल्सोनिका औती कंपोनेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, सत्यम ऑटो कंपोनेंट्स लिमिटेड, मुंजाल शोवा लिमिटेड, नपीनो ऑटो एंड इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, हिलेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और रेको औदो इंडस्ट्रीज लिमिटेड के मज़दूरों ने इस एकजुटता प्रदर्शन में हिस्सा लिया। एच.एम.एस.आई. के स्थायी मज़दूर ठेका मज़दूरों के समर्थन में पिछले 43 दिनों से धरने में साथ खड़े हैं और उनके साथ कई विरोध प्रदर्शनों और रैलियों में भी हिस्सा लिया है।

एच.एम.एस.आई. के मज़दूर छंटनी के खि़लाफ़ 5 नवंबर से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

इस वर्ष की शुरुआत में ही कंपनी से करीब 1000 मज़दूरों को निकाला जा चुका है और एच.एम.एस.आई. के 200 से अधिक मज़दूर अन्य मज़दूरों को निकाले जाने का विरोध कर रहे हैं। ये सभी मज़दूर हड़ताल में शामिल हो गए हैं और मानेसर कारखाने के सामने बैठे हुए हैं। इनमें से कई मज़दूर एक या दूसरे ठेकेदार के तहत कई वर्षों से एच.एम.एस.आई. के लिए काम कर रहे हैं। वे मांग कर रहे हैं कि उनको नियमित मज़दूर बनाया जाये। लेकिन उनको बड़ी बेरहमी से नौकरी से निकाला जा रहा है। प्रबंधन इसके लिए कोई भी सफाई देने को तैयार नहीं है, लेकिन यह बात साफ है कि कंपनी मालिक मौजूदा ठेका मज़दूरों की जगह पर ऐसे अस्थायी मज़दूरों को काम पर रखना चाहते हैं जिन्हें आसानी से निकाला जा सके और वे नीम (एन.ई.ई.एम.) के प्रशिक्षु मज़दूरों को काम पर रखना चाहते हैं। 2018 में और पिछले 2 वर्षों में करीब 800 नीम मज़दूरों को नौकरी पर रखा गया है। इन नीम के मज़दूरों को केवल 11,000 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं, जिसमें से आधी रकम का भुगतान सरकार द्वारा किया जाता है। कई वर्षों से काम कर रहे कॉन्ट्रैक्ट मज़दूरों को 18,000-20,000 रुपये दिया जाते हैं।

ठेका मज़दूर इसका विरोध कर रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि छंटनी किये गए प्रत्येक ठेका मज़दूर को हर एक वर्ष की नौकरी के लिए 1 लाख रुपये दिए जायें। लेकिन इसके विपरीत इस वर्ष अगस्त के महीने में दिवाली के ठीक पहले 800 मज़दूरों की छंटनी की गयी ताकि उनको दिवाली बोनस और अन्य सुविधाएं न देनी पड़े। उनको किसी भी तरह का मुआवज़ा नहीं दिया गया।

मज़दूरों ने संघर्ष का यह दौर 5 नवंबर से प्लांट के अंदर धरना से शुरू किया। प्रबंधन ने उनको तमाम बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा। लेकिन मज़दूर तब तक डटे रहे जब तक प्लाट बंद नहीं कर दिया गया। प्लाट बंद होने के बाद उन्होंने फैक्ट्री गेट के बाहर हड़ताल जारी रखी है। मज़दूरों ने आखरी दम तक संघर्ष करने का फैसला किया है और जब अन्य कारखानों के मज़दूर उनके समर्थन में एकजुट होते हैं, तो इस फैसले को बल मिलता है।

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Jan 1-15 2020    Struggle for Rights    Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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