जलियांवाला बाग का शताब्दी समारोह

15 दिसंबर, 2019 को पंजाब के कपूरथला जिले के ढिलवां गांव में जलियांवाला बाग हत्याकांड के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में एक समारोह आयोजित किया गया। कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी, देश भगत यादगार कमेटी और शहीद भगत सिंह एजुकेशन एंड कल्चरल एसोसिएशन के वक्ताओं ने समारोह को संबोधित किया।

Jallianwala bagh centenary

वक्ताओं ने 1919 में बैसाखी के दिन किए गए जलियांवाला बाग हत्याकांड की निंदा की। हिन्दोस्तानी लोगों के बर्तानवी औपनिवेशिक शासन के खि़लाफ़ विद्रोह के बढ़ते ज्वार से बर्तानवी उपनिवेशवादी डरते थे। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी द्वारा आयोजित विद्रोह से उपनिवेशवादी हिल गए थे। जलियांवाला बाग नरसंहार स्वतंत्रता के संघर्ष को कुचलने के लिए और संघर्षरत जनता के बीच आतंक फैलाने के लिए औपनिवेशिक शासकों के प्रयास का हिस्सा था।

अपने अधिकारों के लिए लड़ने वाले लोगों पर हिन्दोस्तानी राज्य हमले करता है, और बड़े व्यापारिक कॉरपोरेटों और वित्त पूंजी को समृद्ध बनाने के लिये काम करता है। बर्तानवी उपनिवेशवादियों की तरह, हिन्दोस्तानी राज्य भी लोगों को विभाजित करने और उनके संघर्षों को तोड़ने के लिए सांप्रदायिक हिंसा आयोजित करता है। सत्ताधारी पूंजीवादी वर्ग यह सुनिश्चित करता है कि केवल वही पार्टी सत्ता में आए जो उसके कार्यक्रम को लागू करे।

यह समय की मांग है कि मज़दूर, किसान, छात्र और समाज के सभी मेहनतकश तबके इस सड़ी हुई वर्तमान दमनकारी व्यवस्था को बदलने के लिए एक झंडे तले एकजुट हों। मज़दूर वर्ग को मेहनतकश किसान के साथ गठबंधन में अपना राज स्थापित करना होगा। लोगों को निर्णयकर्ता बनना होगा। तब हम यह सुनिश्चित कर पाएंगे कि मेहनतकश लोगों द्वारा उत्पादित धन लोगों की भौतिक और सांस्कृतिक स्तर को निरंतर बढ़ाने के लिए खर्च किया जाए।

वक्ताओं ने बताया कि 1980 में कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी का गठन वास्तविक आज़ादी और आज़ादी के लिए संघर्षों को जारी रखने के लिए किया गया था ताकि करतार सिंह सराभा, सोहन सिंह भकना और हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के शहीद भगत सिंह, राज गुरु, सुखदेव और चंद्रशेखर आज़ाद जैसे हमारे प्यारे ग़दरी देशभक्तों के सपने को पूरा करने के लिए एक व्यवस्था की स्थापना की जाये। एक ऐसी राज्य व्यवस्था जहां मेहनकश लोग खुद अपनी तकदीर के मालिक हों। 

भाषणों के साथ-साथ प्रगतिशील और देशभक्ति के गीत, कविताएं और नाटक भी पेश किये गए। ढिलवां के लोगों ने अपने गांव में इस बैठक की मेजबानी करने पर गर्व जताया।

Tag:   

Share Everywhere

Jan 1-15 2020    Struggle for Rights    History    2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

(Click thumbnail to download PDF)

5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

(Click thumbnail to download PDF)

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

(Click thumbnail to download PDF)

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)