कामरेड स्टालिन का 140वां जन्मदिवस मनाने के लिए सभा का आयोजन

21 दिसंबर, 2019 को अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर वर्ग के महान नेता और शिक्षक कामरेड जोसफ विस्सारियोनोविच स्टालिन के जन्मदिवस की 140वीं वर्षगांठ मनाई गई। हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी ने इस अवसर पर नयी दिल्ली में एक सभा का आयोजन किया जिसकी अध्यक्षता कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह ने की।

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कामरेड लाल सिंह ने बताया कि आज दुनिया भर में कम्युनिज़्म के सिद्धांत और कम्युनिस्टों पर चैतरफा हमले किए जा रहे हैं। आज के दौर के कम्युनिस्ट महान माक्र्सवादी-लेनिनवादी जे.वी. स्टालिन की ज़िन्दगी और उनके कार्य से बड़ी प्रेरणा लेते हैं। कामरेड स्टालिन कामरेड वी.आई. लेनिन के सबसे उत्कृष्ट और वफादार शिष्य थे। उन्होंने अपनी अंतिम सांस तक मार्क्सवाद-लेनिनवाद की शिक्षाओं और निष्कर्षों की बड़ी बहादुरी और अटलता के साथ हिफ़ाज़त की। बोल्शेविक पार्टी के शीर्ष पर होते हुए उन्होंने सोवियत संघ के मज़दूर वर्ग और लोगों को तमाम तरह के शोषण और दमन से मुक्त एक नए समाजवादी समाज का निर्माण करने के संघर्ष में अगुवाई दी। वे दुनियाभर के मज़दूर वर्ग की आंखों का तारा थे और हमेशा रहेंगे। बीसवीं सदी के एक प्रमुख हिस्से से लेकर आज तक, जे.वी. स्टालिन का नाम दुनियाभर के मज़दूरों और मेहनतकश लोगों को इस शोषक पूंजीवादी समाज से मुक्ति के लिए लड़ने और अपनी मंजिल को हासिल करने के लिए प्रेरित करता रहा है।

दुनियाभर के साम्राज्यवादी सरमायदार अच्छी तरह से जानते थे कि समाजवाद का विनाश करने, क्रांति को कुचलने और इस आदमखोर पूंजीवादी साम्राज्यवादी व्यवस्था को लगातार चलाते रहने की उनकी योजना के रास्ते में जे.वी. स्टालिन सबसे बड़ी रुकावट हैं। इसलिए वे स्टालिन को पूरी ज़िन्दगी बदमान करते रहे और यही वजह है कि उनके बाद भी उन्होंने इस महान व्यक्तित्व के ख़िलाफ़ नफ़रत भरा जहर उगलना कभी भी बंद नहीं किया।

कामरेड स्टालिन ने मज़दूर वर्ग की मुक्ति के लिए पूरी दृढ़ता के साथ अपना जीवन समर्पित किया। उन्होंने न केवल मार्क्सवाद-लेनिनवाद के निष्कर्षों की हिफ़ाज़त की बल्कि उन्होंने एक नए समाजवादी समाज के निर्माण के संघर्ष को अगुवाई देते हुए उसे अधिक विकसित और समृद्ध करने में अपना योगदान दिया।

कामरेड लाल सिंह की इन आरंभिक टिप्पणियों के बाद जे.वी. स्टालिन के जीवन और उनके कार्यों को याद दिलाती हुई एक प्रस्तुति पेश की गई।  

कामरेड स्टालिन का जन्म एक ग़रीब मज़दूर वर्ग परिवार में हुआ था। उनके पिता एक जूते के कारखाने में मोची का काम करते थे। स्टालिन केवल 15 वर्ष की किशोरवस्था में ही पार्टी से जुड़ गए और जल्दी ही एक अगुवा संगठक बन गए। 1922 में जब कामरेड लेनिन बीमार पड़ गए, तो कामरेड स्टालिन पार्टी के महासचिव चुने गए। लेनिन के निधन के कुछ ही दिनों बाद कामरेड स्टालिन ने दूसरे सोवियत सर्व संघ महाअधिवेशन में एक अविस्मर्णीय भाषण दिया जिसमें उन्होंने लेनिन के कार्य को जारी रखने और उनकी शिक्षाओं के प्रति वफ़ादार रहने का अर्थ क्या होता है, इसे विस्तार से समझाया। बोल्शेविक पार्टी की ओर से उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी के एक सदस्य बतौर उसकी महान गरिमा को हमेशा बनाये रखने और उसकी हिफ़ाज़त करने का प्रण लिया। उन्होंने अपनी जान से भी बढ़कर पार्टी की एकता की हमेशा हिफ़ाज़त करने का प्रण लिया। उन्होंने मज़दूरों और किसानों के गठबंधन को मजबूत करने का प्रण लिया। उन्होंने सोवियत संघ के तमाम राष्ट्रों और राष्ट्रीयताओं के स्वेच्छा पर आधारित संघ को मजबूत करने और उसका विस्तार करने का प्रण लिया। और अंत में, उन्होंने कम्युनिस्ट इंटरनेशनल के सिद्धांतों के प्रति वफ़ादार बने रहने और दुनियाभर के मेहनतकश लोगों के संघ को मजबूत करने और उसका विस्तार करने का प्रण लिया।

कामरेड लेनिन का निधन ऐसे वक्त पर हुआ जब नए श्रमजीवी राज्य का गठन शुरू ही हुआ था। दुनियाभर के साम्राज्यवादी श्रमजीवी अधिनायकत्व का विनाश करने के लिए सोवियत संघ के भीतर बैठे मज़दूर वर्ग के दुश्मनों के साथ सांठ-गांठ कर रहे थे। इन कठिन हालातों में कामरेड स्टालिन ने साम्राज्यवादी घेराबंदी का सामना करते हुए बड़ी बहादुरी और दृढ़ता के साथ समाजवाद के निर्माण के संघर्ष को अगुवाई दी।

सोवियत संघ में समाजवाद के सफल निर्माण से तिलमिलाकर साम्राज्यवादियों ने सोवियत संघ पर हमला करने और उसका विनाश करने के लिए हिटलर और नाजी जर्मनी को उकसाया। लेकिन उनकी तमाम योजनायें भी कब्र में दफन हो गयीं। कामरेड स्टालिन की अनुसरणीय अगुवाई में सोवियत संघ के लोग एक विशाल ताक़त बनकर उठ खड़े हुए और उन्होंने फासीवादियों को आगे बढ़ने से रोका और अंत में हिटलर को पराजित किया और यूरोप को मुक्त किया। इस महान देशभक्ति-प्रेरित युद्ध में सोवियत संघ के 2 करोड़ 50 लाख से अधिक लोगों ने अपनी जान की कुर्बानी दी। युद्ध के मैदान में शहीद नौजवानों के होठों पर जे.वी. स्टालिन का नाम था। इस फासीवाद-विरोधी युद्ध में सोवियत संघ की जीत से यूरोप और एशिया में क्रांतिकारी मुक्ति संघर्षों को तेज़ी मिली। कई देश पूंजीवादी दासता और उपनिवेशवादी बेड़ियों से आज़ाद हुए और उन्होंने समाजवाद का रास्ता अपनाया।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के दौर में अमरीकी साम्राज्यवाद की अगुवाई में साम्राज्यवादियों ने सोवियत संघ का विनाश करने और क्रांति के उठते ज्वार को कुचलने के लिए शीत युद्ध आरंभ किया। उन्होंने सोवियत संघ और अन्य समाजवादी देशों को परमाणु बम से पूरी तरह से सर्वनाश करने की धमकी देनी शुरू कर दी। इसके साथ-साथ साम्राज्यवादियों ने विभिन्न कम्युनिस्ट पार्टियों के अंदर बैठाये अपने एजेंटों को मार्क्सवाद-लेनिनवाद की शिक्षाओं का संशोधन करने, समाजवाद को अंदर से खोखला करने और अंतर्राष्ट्रीय कम्युनिस्ट आंदोलन की एकता को तोड़ने के लिए उकसाया। इन हालातों में स्टालिन ने सोवियत संघ के लोगों और दुनियाभर के मज़दूर वर्ग और लोगों को बड़े ही संयम और बहादुरी के साथ अगुवाई दी। उन्होंने मज़दूर वर्ग आंदोलन में ब्रोवडरवादियों और टीटोवादियों जैसे गद्दारों का पर्दाफाश करने और उनको अकेला करने के लिए संघर्ष को अगुवाई दी। अपनी आखरी सांस तक, स्टालिन ने समाजवादी सोवियत संघ और अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर वर्ग आंदोलन को साम्राज्यवादियों और कम्युनिज़्म के गद्दारों से हिफ़ाज़त करने के लिए काम किया।

इस प्रस्तुति के बाद कामरेड लाल सिंह ने चर्चा को अगुवाई देते हुये बताया कि कम्युनिस्टों के बीच सबसे अधिक जगमगाते हीरे, जे.वी. स्टालिन की सीख ने हमारी पार्टी के कार्य को रोशन किया।

कामरेड स्टालिन साफ तौर से श्रमजीवी अधिनायकत्व को स्थापित करने और एक कम्युनिस्ट समाज स्थापित करने की दिशा में समाजवाद के निर्माण में विश्वास रखते थे। वे इस बात को साफ तौर पर समझते थे कि यह कार्य केवल मज़दूर वर्ग की पार्टी की मजबूत अगुवाई में ही पूरा किया जा सकता था। लेनिनवाद का सिद्धांत जिसका अनुसरण कामरेड स्टालिन ने अपनी अंतिम सांस तक किया, उन्हीं सिद्धांतों पर हमारी पार्टी का भी गठन किया गया है।

कामरेड लाल सिंह ने बताया कि मज़दूर वर्ग से गद्दारी करने वाले सभी गद्दारों ने लेनिन की इस शिक्षा पर हमला किया कि श्रमजीवी क्रांति की हिफ़ाज़त करने और समाजवाद का निर्माण करने के लिए श्रमजीवी अधिनायकत्व सबसे ज़रूरी शर्त है। स्टालिन के देहांत के बाद ख्रुश्चेववादियों ने सोवियत संघ में सत्ता हड़प ली और सोवियत संघ को “सभी लोगों का राज्य” होने का ऐलान कर दिया। उसी तरह से चीन में माओ त्से तुंग ने चार वर्गों के संयुक्त अधिनायकत्व की बात की, जिसे उन्होंने एक नए जनतांत्रिक अधिनायकत्व का नाम दिया, जिसमें सरमायदार और श्रमजीवी दोनों ही शामिल हैं, जो कि संभव नहीं है।

कामरेड लाल सिंह ने आगे समझाया कि किस तरह से हमारी पार्टी ने मार्क्सवाद-लेनिनवाद का अनुसरण करते हुए ये माना कि मज़दूरों की पार्टी में एक ही लाईन हो सकती है। किसी भी मसले या कार्य पर चर्चा और मतभेद हो सकता है, लेकिन कई लाईनें नहीं हो सकतीं।

साम्राज्यवादियों द्वारा चलाये गये झूठे प्रचार, जिसके अनुसार कामरेड स्टालिन अपने विरोधियों के प्रति क्रूर और निर्दयी थे, असलियत में कामरेड स्टालिन ने हमेशा पार्टी के भीतर कामरेडों की एकता को बनाये रखने के लिए पूरा प्रयास किया और गलत विचारों का बड़े ही संयम और समझदारी के साथ सामना किया।

कामरेड स्टालिन का एक उत्कृष्ट गुण यह था कि उन्होंने कभी भी छोटी कम्युनिस्ट पार्टियों पर अपना प्रभुत्व जमाने की कोशिश नहीं की। जब भी वे अन्य पार्टियों के साथ बातचीत करते थे, तो हमेशा एक दोस्त और एक मार्गदर्शक की तरह पेश आते थे और कभी भी अपनी बात थोपने की कोशिश नहीं करते थे।

चर्चा का समापन करते हुए कामरेड लाल सिंह के कहा कि दुनिया में कामरेड स्टालिन जैसे बहुत कम ही कम्युनिस्ट हुए हैं। लेकिन ऐसा नहीं कि वह जन्म से ही ऐसे रहे हों। उनकी शिक्षा लेनिन की पार्टी में हुई थी। एक बार उन्होंने अपना जीवन कम्युनिज़्म के लिए समर्पित किया उसके बाद उन्होंने अपना पूरा दिलो-दिमाग इस मक़सद के लिए कुरबान कर दिया।

कामरेड स्टालिन और बोल्शेविक पार्टी को लाल सलाम!

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पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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