जे.एन.यू. के छात्रों पर राज्य द्वारा आयोजित क्रूर हमले की कड़ी निंदा करें!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 6 जनवरी, 2020

कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी 5 जनवरी की शाम को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों पर किये गए जानलेवा हमले की कड़ी निंदा करती है। लोहे के डंडों और लाठियों से लैस, नकाबपोश गुंडों ने परिसर में घुसकर, बड़ी बेरहमी से हिंसा और अराजकता फैलाई। इस पूर्व-नियोजित और राज्य द्वारा आयोजित हमले में 20 से अधिक छात्र-छात्राएं व महिला और पुरुष शिक्षक गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
जे.एन.यू. के छात्र और शिक्षक जे.एन.यू. का निजीकरण करने के अधिकारियों के हर प्रयास के खि़लाफ़ निरंतर संघर्ष करते आये हैं। जब जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्रों पर 15 दिसंबर को बेरहमी से हमला किया गया था, क्योंकि उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (सी.ए.ए.) और राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एन.आर.सी.) के खि़लाफ़ आवाज़ उठाने की जुर्रत की थी, तब जे.एन.यू. के छात्रों ने, देश के अन्य विश्वविद्यालयों के छात्रों के साथ मिलकर, उनका ज़ोरदार समर्थन किया। सी.ए.ए. और एन.आर.सी. के खि़लाफ़ हमारे लोगों के संघर्ष में जे.एन.यू. के छात्रों की सक्रिय भूमिका रही है। 
जे.एन.यू. के छात्रों के खि़लाफ़ यह खूंखार हिंसा लोगों के बढ़ते संघर्षों को कुचलने की केंद्र सरकार की बेतहाशा कोशिशों का एक प्रतीक है। 26 दिसंबर को गृहमंत्री अमित शाह ने यह धमकी दी थी कि जो लोग सी.ए.ए. का विरोध कर रहे हैं, उन्हें “सबक सिखाया जायेगा”। अमित शाह ने यह भी कहा था कि जो लोग सरकार से सी.ए.ए. को वापस लेने की मांग कर रहे हैं, वे “टुकड़े-टुकड़े गैंग” के सदस्य हैं। बीते 4 सालों से सरकार जे.एन.यू. के छात्रों और शिक्षकों के बारे में यह झूठा प्रचार करती आ रही है कि वे “टुकड़े-टुकड़े गैंग” के सदस्य हैं, जो देश को तोड़ना चाहते हैं। यह स्पष्ट है कि 5 जनवरी को जे.एन.यू. के छात्रों पर किया गया हमला राज्य द्वारा आयोजित किया गया था। 
जे.एन.यू. के उपकुलपति और दिल्ली पुलिस की भूमिका से स्पष्ट हो जाता है कि जे.एन.यू. के छात्रों पर किया गया हमला राज्य द्वारा आयोजित था। उपकुलपति ने पुलिस को परिसर के अन्दर तब बुलाया जब कातिलाना गुंडों ने अपना घिनावना काम पूरा कर लिया था। जो लोग जे.एन.यू. के छात्रों की रक्षा और समर्थन करने के लिए बाहर से आये थे, उन्हें पुलिस ने प्रवेश करने से रोका। पर जब गुंडों का मार-पीट और तोड़-फोड़ का घिनावना काम ख़त्म हो गया तब पुलिस ने उन्हें पूरी हिफ़ाज़त के साथ फाटक से बाहर पहुंचाया। 
हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी जे.एन.यू. के छात्रों और शिक्षकों के अपने अधिकारों के लिए इस जायज़ संघर्ष में, उनका पूरा-पूरा समर्थन करती है।  
 

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Jan 16-31 2020    Statements    Popular Movements     Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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