सी.ए.ए. और एन.आर.सी. को रद्द करो!

लंदन में विशाल विरोध प्रदर्शन और सभाएं

ग़दर इंटरनेशनल और इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन (ग्रेट-ब्रिटेन) ने 4 जनवरी 2020 को इल्फोर्ड में नागरिकता संशोधन अधिनियम और नागरिकों की राष्ट्रीय सूची के खि़लाफ़ एक आम सभा आयोजित की। सभा से पहले लंदन में फारेस्ट गेट से न्यूहेम तक चार किलोमीटर लंबा जुलूस निकाला गया। इस जुलूस में अलग-अलग धर्मों के करीब 2000 लोगों सहित प्रगतिशील बुद्धिजीवियों और संगठनों ने हिस्सा लिया। इस जुलूस का समापन न्यूहेम के एक पार्क में एक जुझारू रैली के साथ हुआ।

इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन (ग्रेट-ब्रिटेन) की ओर से दलविंदर अटवाल और ग़दर इंटरनेशनल के सलविंदर ढिल्लों सहित कई अन्य वक्ताओं ने सभा को संबोधित करते हुए सी.ए.ए. और एन.आर.सी. की निंदा की।

Demonstration in front of India House in London

long march on 4th Jan

जुलूस के दौरान पूरा माहौल लड़ाकू नारों से गूंज उठा जैसे: “एक पर हमला, सब पर हमला!”, “हम सब एक हैं!”, “इंक़लाब ज़िंदाबाद!”

सभी वक्ताओं ने बताया कि हिन्दोस्तान के सभी तबकों हिन्दू, सिख और मुसलमान लोगों सहित सभी धर्मों के लोगों द्वारा इस काले कानून का व्यापक विरोध किया जा रहा है। देशभर में कई विश्वविद्यालय के छात्र “बांटों और राज करो” की नीति को आगे बढ़ाने वाले इस अमानवीय कानून को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बैंगलूरू, जयपुर, कोलकाता, जलंधर तथा देश और दुनियाभर के कई अन्य शहरों में विशाल प्रदर्शन आयोजित किये गए हैं। कनाडा, अमरीका, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, जर्मनी आदि देशों में भी व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किये गए हैं। तमाम लोगों ने सी.ए.ए. और एन.आर.सी. की निंदा करते हुए इन नस्लवादी कानूनों को निरस्त करने की मांग की।

सी.ए.ए. और एन.आर.सी. इन दो कानूनों से हिन्दोस्तानी उप-महाद्वीप में हिन्दोस्तान सहित पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार और श्रीलंका के लोगों को बहुत तकलीफ़ों का सामना करना पड़ेगा।

सी.ए.ए. और एन.आर.सी. को लाने के पीछे हिन्दोस्तान के बड़े इजारेदार पूंजीपतियों के इस राज्य का मक़सद लोगों को धार्मिक आधार पर बांटना है। सी.ए.ए. और एन.आर.सी. 1935 के नाज़ियों के न्यूरेम्बर्ग कानूनों की तरह हैं जिसके चलते यहूदी लोगों को जर्मनी की नागरिकता से वंचित किया गया था। हिटलर ने यहूदियों को निशाना बनाया था और मोदी मुसलमानों को निशाना बना रहा है। हिन्दोस्तानी राज्य हिन्दोस्तान के लोगों की समस्याओं के लिए मुसलमानों को दोषी ठहरा रहा है। हिटलर ने जर्मन लोगों की समस्याओं के लिए यहूदियों पर दोष लगाया था। हिन्दोस्तान के किसी भी इलाके में हुए बम धमाकों के लिए बिना किसी तहक़ीक़ात के मुस्लिम लोगों पर इल्ज़ाम लगाया जाता है।

पूरी दुनिया में इजारेदार पूंजीवाद अप्रत्याशित संकट का सामना कर रहा हैं। विशाल पूंजीवादी कंपनियों के घटते मुनाफ़ों की भरपाई करने और बड़े व्यापार व वित्तीय संस्थानों पर अपना कब्ज़ा जमाये मुट्ठीभर हुक्मरान अमीर लोगों को और अधिक अमीर बनाने के लिए पूंजीपति वर्ग मेहनतकश लोगों पर खर्चा कम करने और सार्वजनिक सेवाओं के निजीकरण को थोप रहा है। पूंजीवादी व्यवस्था की वजह से पैदा हुए संकट की क़ीमत मेहनतकश लोगों से वसूली जा रही है। मज़दूर, किसान, बुद्धिजीवी तबका और तमाम अन्य मेहनतकश लोग अपनी रोज़ी-रोटी, जीवन, शिक्षा और रोज़गार की सुरक्षा तथा साफ़ और सुरक्षित पर्यावरण जैसे बुनियादी अधिकारों पर हमलों का विरोध कर रहे हैं। लोग सभी की खुशहाली सुनिश्चित करने के लिए मानव अधिकारों की हिफ़ाज़त में आवाज़ उठा रहे हैं। सभी लोग इस सड़ी-गली पूंजीवादी व्यवस्था के हमलों का सामना कर रहे हैं। इजारेदार पूंजीवादी व्यवस्था की अगुवाई में अमरीकी साम्राज्यवादी इस्लामोफोबिया (इस्लाम का ख़ौफ) को हवा दे रहे हंै और दुनियाभर की समस्याओं के लिए मुसलमान लोगों पर इलज़ाम लगाते हुए उनको बलि का बकरा बना रहे हैं, जैसा कि हिटलर ने जर्मनी में यहूदियों के साथ किया था। दुनियाभर में मेहनतकश लोगों के सांझे संघर्षों को धर्म के आधार पर बांटने के लिए नस्लवाद का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका मक़सद है लोगों के सांझे संघर्षों को कमज़ोर करना और उनको भटकाना।

हिन्दोस्तान में मोदी की सरकार बहुराष्ट्रीय कंपनियों और हिन्दोस्तान के बड़े पूंजीपतियों के कार्यक्रम की सेवा में यही काम कर रही है और मुसलमानों को निशाना बना रही है। इसका मक़सद है देश के सभी तबकों पर नस्लवाद और राजकीय आतंकवाद का हमला करते हुए उनके सांझे संघर्ष को कमजोर करना और उसको भटकाना, जिससे चंद मुट्ठीभर अमीर हुक्मरानों के इस राज को कुछ और देर तक चलाया जा सके। हिन्दोस्तानी राज्य हिन्दोस्तान की अर्थव्यवस्था पर अपना दबदबा रखने वाली 150 बड़ी पूंजीवादी कंपनियों की दौलत को बढ़ाने के लिए सभी पूंजीवादी राजनीतिक पार्टियों का इस्तेमाल करता है। हिन्दोस्तान और दुनियाभर में संघर्ष कर रहे मेहनतकश लोगों के लिए इस इजारेदार पूंजीवादी व्यवस्था के पास बस एक ही उपाय है - बढ़ता फासीवाद और बढ़ते पैमाने पर दुनियाभर में जंग।

इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन और ग़दर इंटरनेशनल हिन्दोस्तानी उप-महाद्वीप के सभी लोगों से अपील करते हैं कि वे अपने सांझे संघर्ष में मुसलमान लोगों, मज़दूरों, किसानों, छात्रों और तमाम मेहनतकश लोगों पर किए जा रहे हमलों की निंदा करें। हम इस सांप्रदायिक कानून को तुरंत निरस्त करने की मांग करते हैं।

अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हिन्दोस्तान के लोगों को शोषण पर आधारित इस सड़ी-गली व्यवस्था को उखाड़ फेंकने के संघर्ष में अपनी एकता को मज़बूत करना होगा और ऐसे परिवर्तन के लिए संघर्ष करना होगा जिसका सपना 1857 के ग़दर के हमारे शहीदों ने और ग़दर पार्टी के शहीदों ने देखा था। हमें एक ऐसी व्यवस्था को स्थापित करना होगा जिसका सपना हमारे देशभक्त शहीद करतार सिंह सराभा, शहीद उधम सिंह, शहीद भगत सिंह और उनके साथियों ने देखा था।

हमें अपने तमाम सांझे संघर्षों को एक विशाल आंदोलन में एकजुट करना होगा, जिससे एक ऐसी व्यवस्था का निर्माण किया जा सके जो हमारे देश के सभी मेहनतकश लोगों के भौतिक और सांस्कृतिक जीवन स्तर को नयी ऊंचाइयों तक ले जाएगी। यह एक ऐसी व्यवस्था होगी जहां मेहनतकश लोग खुद अपनी किस्मत के मालिक होंगे और समाज को चलाने में असली मायने में फैसले करने वाले होंगे। केवल इस तरह की व्यवस्था ही साम्प्रदायिकता को ख़त्म कर सकती है, फासीवाद की लहर को रोक सकती है और साम्राज्यवादी जंग का अंत कर सकती है।

लंदन में आयोजित सभा में ब्रिटेन की क्रांतिकारी कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) द्वारा भेजे गए संदेश को पढ़ा गया और समर्थकों द्वारा देश-भक्ति की कवितायें सुनाई गईं। सभा के समापन के दौरान आयोजित चर्चा में लोगों ने पूरे जोश से हिस्सा लिया।

इंक़लाब ज़िंदाबाद!

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Jan 16-31 2020    Struggle for Rights    Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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