मज़दूरों ने सर्व हिन्द हड़ताल को सफल बनाया

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द हड़ताल में देश की अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों के मज़दूरों और मेहनतकश लोगों ने पूरे जोश के साथ हिस्सा लिया। यह आम हड़ताल सभी केंद्रीय यूनियनों, सर्व हिन्द फेडरेशनों और विभिन्न शहरों, उद्योगों और सेवा कंपनियों सहित ग्रामीण मज़दूरों को संगठित करने वाली सैकड़ों ट्रेड यूनियनों के बुलावे पर आयोजित की गयी थी और मज़दूरों ने इसे पूरा समर्थन देकर सफल बनाया।

​​Delhi
Farmers

1991 के बाद से सभी सरकारों ने निजीकरण और उदारीकरण के ज़रिये भूमंडलीकरण के कार्यक्रम को हिन्दोस्तान के लोगों पर थोपा है। यह एक समाज-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी कार्यक्रम है। मज़दूरों, किसानों और तमाम मेहनतकशों के बीच इस कार्यक्रम का विरोध साल दर साल बढ़ता ही गया है। जब से उदारीकरण का कार्यक्रम लागू किया गया है उस समय से लेकर 8 जनवरी, 2020 तक हिन्दोस्तान के मज़दूरों ने 19 सर्व-हिंद हड़तालों का आयोजन किया है।

मज़दूर एकता लहर को मिली ख़बरों के अनुसार इस हड़ताल में देशभर में करीब 25 करोड़ मज़दूरों और मेहनतकश लोगों ने हिस्सा लिया। उनकी मांगों में शामिल है - 21,000 रुपये प्रतिमाह न्यूनतम वेतन, ठेका मज़दूरी का अंत, 10,000 रुपये प्रतिमाह की न्यूनतम पेंशन और निजीकरण पर रोक, खाद्यान, दालों और सभी ज़रूरी चीजों की आपूर्ति के लिए एक आधुनिक सार्वजनिक वितरण प्रणाली की स्थापना, किसानों से लाभकारी मूल्यों पर सभी कृषि उत्पादों की खरीदी के लिए एक सार्वजनिक खरीदी प्रणाली की स्थापना, किसानों की कर्ज़ माफ़ी और सभी के लिए शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवा। मज़दूरों ने सरकार से मांग की है कि श्रम कानूनों को पूंजीपतियों के हित में बदलना बंद करे।

ये सारी मांगें पूरे समाज के हित में हैं। इसलिए इस हड़ताल को न केवल यूनियन में संगठित लोगों से समर्थन हासिल हुआ बल्कि किसानों, खेत मज़दूरों और विश्वविद्यालयों के छात्रों के बीच भी इस हड़ताल को व्यापक समर्थन हासिल हुआ।

विभिन्न राज्यों से आ रही ख़बरों से पता चलता है कि इस हड़ताल को देश के विशाल सार्वजनिक क्षेत्र से पूरा समर्थन प्राप्त हुआ जैसे स्टील, कोयला और अन्य खनिज उद्योग, रक्षा उत्पादन, पोर्ट एवं डॉक, तेल एवं प्राकृतिक गैस, टेलिकॉम और बिजली उत्पादन, इत्यादि। प्रमुख उद्योगों पर निर्भर एंसीलरी उद्योग भी करीब-करीब बंद रहा।

इसके अलावा इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल एवं कॉम्पोनेन्ट उत्पादन, टेलिकॉम, टेक्सटाइल उद्योग, बिजली और अन्य क्षेत्रों के मज़दूर भी हड़ताल पर थे।

इंजीनियरों सहित बिजली क्षेत्र के 15 लाख मज़दूरों ने “आल इंडिया पॉवर एम्प्लाइज़ फेडरेशन” के झंडे तले इस हड़ताल में हिस्सा लिया। वे इलेक्ट्रीसिटी अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन के विरोध में, जो कि ग्राहकों और मज़दूरों के हितों के खि़लाफ़ है और सरकार की निजीकरण की नीति के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं।

बैंकिंग क्षेत्र के निजीकरण के विरोध में सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंक और निजी क्षेत्र के कई बैंकों के मज़दूरों द्वारा हड़ताल में हिस्सा लेने से पूरा बैंकिंग कारोबार ठप्प हो गया।

Rohtak

एच.पी.सी.एल., बी.पी.सी.एल. और कई अन्य तेल कंपनियों के निजीकरण के विरोध में पेट्रोलियम क्षेत्र के मज़दूर भी बड़े पैमाने इन प्रदर्शनों में शामिल हुए। मज़दूरों ने जगह-जगह पर जुलूस निकाले और गेट मीटिंगें आयोजित कीं।

कोयला क्षेत्र की यूनियनों के नेताओं ने बताया कि कोयला खदानों के 6,00,000 स्थायी और अस्थायी मज़दूरों ने इस हड़ताल में हिस्सा लिया।

आल इंडिया किसान संघर्ष कोआर्डिनेशन कमेटी के बुलावे पर देशभर के किसान संगठनों ने इस हड़ताल में हिस्सा लेते हुए उसे सफल बनाया। 175 किसान और खेत-मज़दूर संगठनों के एक सांझे मंच ने भी इस हड़ताल का समर्थन किया और साथ ही ग्रामीण इलाकों में हड़ताल आयोजित करने का आह्वान किया। देश के कई ग्रामीण जिलों में किसानों, खेत मज़दूरों और युवाओं ने सड़क और रेल रोको कार्यक्रम आयोजित किया।

कई राज्यों में राज्य सड़क ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन के मज़दूरों ने हड़ताल में हिस्सा लिया और इन राज्यों में सड़क यातायात पूरी तरह से ठप्प हो गया। पश्चिम बंगाल, बिहार और पंजाब सहित कई राज्यों में रेल और सड़क यातायात बुरी तरह से प्रभावित हुआ।

देशभर में 60 से अधिक विश्वविद्यालयों और शिक्षा संस्थानों, उनसे जुड़े कॉलेजों में भी हजारों छात्रों ने क्लास का बहिष्कार करते हुए हड़ताल में हिस्सा लिया।

काफी अरसे से लंबित मज़दूरों और किसानों को मांगों को उठाने के साथ-साथ मज़दूरों और मेहनतकश लोगों ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सी.ए.ए.) को तुरंत निरस्त करने और नागरिकों की राष्ट्रीय सूची (एन.आर.सी.) के प्रस्ताव को वापस लेने की भी मांग की। मज़दूरों ने जामिया मिलिया इस्लामिया, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, जाधवपुर विश्वविद्यालय सहित कई और विश्वविद्यालयों पर राज्य द्वारा आयोजित दमन की कड़ी निंदा की।

तमिलनाडु

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तमिलनाडु में हजारों मज़दूरों, किसानों और छात्रों ने सड़कों पर उतरकर रैलियां और धरना प्रदर्शन आयोजित किये। बैंक, बीमा, गोदी (पोर्ट) और पेट्रोलियम क्षेत्र पूरी तरह से ठप्प हो गया और कोयम्बटूर और तिरुपुर जिलों के कपड़ा उद्योग के मज़दूरों ने बड़ी तादाद में हड़ताल में हिस्सा लिया। रेल और सड़क रोको कार्यक्रम आयोजित करने के लिए सैकड़ों कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया।

किसानों और खेत मज़दूरों ने अपनी मांगों के समर्थन में ग्रामीण हड़ताल आयोजित की। छात्रों ने उच्च शिक्षा के निजीकरण के खि़लाफ़ अपनी आवाज़ बुलंद की और नौकरी की मांग करते हुए नौजवान सड़कों पर उतर आये।

महाराष्ट्र

महाराष्ट्र में आम हड़ताल को मिले ज़ोरदार समर्थन से मज़दूरों की एकता साफ नज़र आई। राज्य के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाली 26 यूनियनों ने हड़ताल में हिस्सा लिया। मुंबई के आज़ाद मैदान में बैंक मज़दूरों और अन्य क्षेत्रों के मज़दूरों सहित आशा कर्मियों ने हिसा लिया।

बिहार

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8 जनवरी की देशव्यापी हड़ताल को सफल बनाने के लिए पटना सहित बिहार के कई जिलों में हजारों कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आये। हर एक जिले में विशाल जुलूस निकाले गए। रेल और सड़क यातायात को ठप्प करने के लिए धरने आयोजित किये गए। बैंक, पोस्ट ऑफिस, बिजली विभाग, इत्यादि पूरी तरह से बंद रहे। पटना में ऑटो रिक्शा सड़क पर नहीं उतरे।

दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र

इस देशव्यापी हड़ताल में हिस्सा लेते हुए दिल्ली एन.सी.आर. में हजारों मज़दूरों ने टूल डाउन करते हुए उत्पादन रोक दिया। इसकी वजह से राष्ट्रीय राजधानी में उत्पादन में बाधा आई।

गाजियाबाद के साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र में छोटे और मध्यम स्तर के उद्योग पूरी तरह से प्रभावित हुए। सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (सी.ई.एल.) के मज़दूरों ने इस कंपनी की रणनैतिक बिक्री के विरोध में कंपनी को ठप्प कर दिया।

ओखला औद्योगिक क्षेत्र, वजीरपुर, नरेला, बवाना, जहांगीरपुरी, पटपड़ गंज और शाहदरा जैसे विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में रैलियां आयोजित की गयीं।

गुरुग्राम-मानेसर-बावल औद्योगिक क्षेत्र में हजारों मज़दूर सड़कों पर आए और मज़दूर वर्ग और मेहनतकश लोगों के खि़लाफ़ हमलों का विरोध जताया। होंडा और मुंजाल जैसी ऑटोमोबाइल कंपनियां पूरी तरह से ठप्प हो गयीं।

​​Manesar
Ahmedabad banking workers

इस क्षेत्र में अधिकांश मज़दूर, ठेका मज़दूर हैं। मानेसर में ठेका मज़दूरों के संघर्ष को होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया के अस्थायी मज़दूर अगुवाई दे रहे हैं और कड़ाके की ठंडी का सामना करते हुए पिछले 50 दिनों से प्रबंधन द्वारा मज़दूरों की छंटनी के खि़लाफ़ धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।

मानेसर में एक और बड़ी ऑटो कंपनी, शिवम ऑटो टेक के बाहर मज़दूरों ने प्रबंधन द्वारा “जबरदस्ती से कंपनी को बंद” किये जाने के खि़लाफ़ प्रदर्शन आयोजित किया।

गुजरात

महा गुजरात बैंक एम्प्लाइज एसोसिएशन के 40,000 मज़दूरों ने इस आम हड़ताल में हिस्सा लिया। आल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन, वेस्टर्न रेलवे एम्प्लाइज यूनियन, इनकम टैक्स एम्प्लाइज फेडरेशन, इनकम टैक्स गजेटेड ऑफिसर्स एसोसिएशन (गुजरात सर्किल), गुजरात फेडरेशन ऑफ ट्रेड यूनियन (जी.एफ.टी.यू.), गुजरात मज़दूर संघ (जी.एम.एस.), मज़दूर अधिकार अभियान इन सभी संगठनों ने गुजरात में रैलियां आयोजित कीं।

अहमदाबाद में जी.एफ.टी.यू. ने अहमदाबाद म्युनिसिपल कारपोरेशन, गुजरात ट्रांसपोर्ट सर्विसेज, गुजरात इंडस्ट्रियल सिक्यूरिटी फोर्स, मध्यान भोजन के कर्मचारी, मनरेगा के दिहाड़ी मज़दूरों और कई निजी कंपनियों के मज़दूरों की रैली आयोजित की।

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Jan 16-31 2020    Struggle for Rights    Popular Movements     Privatisation    Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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