पेट्रोल पर 105 प्रतिशत और डीजल पर 67 प्रतिशत टैक्स लगाकर केंद्र सरकार लोगों को लूट रही है

मई 2014 में जब नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राजग सरकार सत्ता में आई, तब अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमत 105 डॉलर प्रति बैरल थी लेकिन दिसम्बर 2014 तक वह गिरकर आधी के आसपास, 60 डॉलर प्रति बैरल हो गई। इसके बावजूद, हिन्दोस्तान में पेट्रोल और डीजल की क़ीमतें उस अनुपात में कम नहीं की गईं। आज भी कच्चे तेल की क़ीमतें सिर्फ 60 डॉलर प्रति बैरल ही हैं लेकिन हिन्दोस्तानी लोग पेट्रोल और डीजल की वही क़ीमत चुका रहे हैं जो मई 2014 में थी।

हिन्दोस्तानी लोगों को सस्ते कच्चे तेल की क़ीमत के लाभ से वंचित रखने के लिए केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर कर बढ़ा दिए। दूसरा, जब उत्पादित वस्तुओं पर जी.एस.टी. व्यवस्था लागू की गई, उसने पेट्रोल और डीजल को जी.एस.टी. के अंतर्गत लाने से मना कर दिया और उन दोनों पर कर बढ़ाते गए।

टेबल 1 : हिन्दोस्तान में पेट्रोल और डीजल तथा अन्य पेट्रोलियम उत्पादों से इकट्ठा किये गए कर और शुल्क एवं पिछले 5 वर्षों में  केंद्र और राज्य सरकारों के बीच उनका बंटवारा

 

2014-15

2015-16

2016-17

2017-18

2018-19

कुल जमा किया गए कर व् शुल्क (करोड़ रुपये)

3,32,619

4,14,506

5,24,995

5,54,404

 5,95,438

केंद्र सरकार का अंश (करोड़ रुपये)

1,72,065

2,54,297

3,35,175

3,45,249

3,65,113

राज्य सरकार का अंश (करोड़ रुपये)

1,60,554

1,60,209

1,89,770

2,09,155

2,30,325

जैसे कि टेबल 1 में देख सकते हैं, इन दोनों वस्तुओं से 2018-2019 में कुल 6 लाख करोड़ रुपये कर इकट््ठा किये गये। 2018-2019 में अन्य सभी उत्पादित वस्तुओं पर लगे जी.एस.टी. से जमा किया गया कुल कर केवल 11.77 लाख करोड़ रुपये था। अतः अन्य सभी उत्पादित वस्तुओं पर लगे जी.एस.टी. से जमा किये गए कुल कर का 50 प्रतिशत से भी ज्यादा कर पेट्रोल और डीजल से इकट्ठा किया गया!

यह भी याद रखना ज़रूरी है कि सभी सार्वजानिक क्षेत्र की तेल कम्पनियां अत्याधिक लाभ अर्जित कर रही हैं और वह भी केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल से अर्जित राजस्व में जुड़ रहा है (देखिए टेबल-2)।

टेबल  2 : विभिन्न सार्वजानिक क्षेत्र की तेल कम्पनियों द्वारा कर-पश्चात लाभ (करोड़ रुपये) 

 

2014-15

2015-16

2016-17

2017-18

2018-19

आई.ओ.सी.एल

 5,273

 11,242

 19,106

 21,346

 16,894

एच.पी.सी.एल.

2,733

 3,725

 6,209

 6,357

 6,029

बी.पी.सी.एल.

5,085

 7,056

 8,039

7,919

7,132

आज केंद्र सरकार पेट्रोल और डीजल पर अत्याधिक कर लगाती है। जब भी अन्तर्राष्ट्रीय तेल की क़ीमत गिरती है वह इन वस्तुओं पर कर बढ़ा देती है। उदाहरणतः जब तेल की क़ीमत अप्रैल 2018 में 69 डॉलर से गिरकर जुलाई 2019 में 60 डॉलर हो गई तो 5 जुलाई, 2019 को केंद्रीय बजट में पेट्रोल और डीजल पर 1 रुपये प्रति लीटर का विशेष उत्पाद शुल्क और 1 रुपये प्रति लीटर का इन्फ्रास्ट्रक्चर शुल्क लगा दिए गए!

राज्य सरकारें भी पेट्रोल और डीजल पर अत्याधिक शुल्क लगाती हैं। परिणामतः पेट्रोल और डीजल पर क्रमशः 105 प्रतिशत और 67 प्रतिशत ज्यादा कुल शुल्क है जबकि आम खपत की वस्तुओं पर अधिकतम जी.एस.टी. दर केवल 18 प्रतिशत है (देखिए टेबल-3)।

टेबल 3 : पेट्रोल और डीजल पर अत्याधिक कर 

 

मूल कीमत

उत्पाद शुल्क

राज्य द्वरा वैट

डीलर को कमीशन

खुदरा कीमत

वास्तविक कर दर, %

पेट्रोल

33.91

19.98

15.51

3.56

72.96

105

डीजल

38.54

15.83

9.82

2.50

66.69

67

पेट्रोल और डीजल पर अत्याधिक कर लगाकर हिन्दोस्तानी लोगों की लूट से अर्जित, केंद्र सरकार के विशाल राजस्व के बावजूद, सरकार सदैव यह कहती है कि देश के मेहनतकश लोगों के जीवन को सुधारने वाले क्षेत्रों पर खर्च करने के लिए उसके पास धन नहीं है। सार्वजनिक स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च बढ़ाने के बजाय सरकार निजी अस्पतालों और निजी स्कूलों व कॉलेजों को प्रोत्साहित कर रही है।

सरकार कह रही है कि मेहनतकशों के जीवन को सुधारने के लिये उसके पास धन नहीं है, जबकि केंद्र सरकार के पास हिन्दोस्तानी और विदेशी इजारेदार पूंजीपतियों को रियायतें देने के लिए बहुत धन है। जुलाई 2019 के बजट में 2 रुपये शुल्क लगाकर पेट्रोल और डीजल की बढ़ी क़ीमत का बोझ मेहनतकशों पर डालने के शीघ्र बाद ही सितम्बर में कॉर्पोरेट कर को 30 से 22 प्रतिशत कम और नवीन उत्पादकों के लिए तो 22 से 15 प्रतिशत कम कर दिया गया! इसी तरह, पूंजीपतियों द्वारा कर्जे़ न चुकाकर सार्वजानिक क्षेत्र के बैंकों को लूटने के कारण बैंकों के पुनः पूंजीकरण के लिए भी मज़दूरों से इकट्ठे किये गए कर का इस्तेमाल किया जाता है। बैंकों की गैर-निष्पादित संपत्ति (एन.पी.ए.), (ऐसे कजे़र् जो पूंजीपतियों ने चुकाने से इंकार कर दिया है) 10 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा हैं। सार्वजानिक क्षेत्र के बैंकों ने 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा डूबे कर्जे़ माफ कर दिए हैं। लोगों से लूटे हुए धन से ही केंद्र सरकार इन बैंकों का पुनः पूंजीकरण करती है।

हिन्दोस्तान का मज़दूर वर्ग और परिश्रमी किसान देश की सब भौतिक संपत्ति और सेवाओं का उत्पादन करता है। फिर भी सरकारी नीतियों को तय करने वाले बहुत कम अल्पसंख्यक इजारेदार पूंजीपतियों की जेबों को भरने के लिए निरंतर कर लगाकर लोगों को लूटा जाता है।

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Feb 1-15 2020    Struggle for Rights    Economy     Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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