सी.ए.ए. को निरस्त करने और एन.आर.सी. को वापस लेने की मांग को लेकर लंदन में विशाल रैली

लंदन के होल्बर्न में हिन्दोस्तानी उच्चायुक्त के दफ़्तर पर आयोजित अपने लड़ाकू जुलूस में शामिल होने के लिए हजारों लोग ब्रिटिश हाउस ऑफ़ कॉमन्स (इंग्लैंड की संसद) के सामने इकट्ठा हो गए। यह स्थान डाउनिंग स्ट्रीट पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के घर से बहुत करीब है।

London rally
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London march

हिन्दोस्तान के गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर 25 जनवरी को यह जुलूस कई संगठनों के सांझे मोर्चे द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें हिन्दोस्तान की सरकार से नागरिकता संशोधन अधिनियम को वापस लेने की मांग की गयी। यह कानून नागरिकता को धर्म से जोड़ता है। इस जुलूस में शामिल लोगों ने मोदी सरकार द्वारा पूरे देश में नागरिकता की राष्ट्रीय सूची तैयार करने के फैसले को वापस लेने की भी मांग की।

रैली की शुरुआत सी.ए.ए. और एन.आर.सी. के खि़लाफ़ लड़ाकू नारों के साथ हुई। रैली में शामिल संगठनों के प्रतिनिधियों और समुदाय के नेताओं ने रैली को संबोधित किया।

इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन के कामरेड दलविंदर ने रैली को संबोधित करते हुये कहा कि :

”इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन हिन्दोस्तान की संसद द्वारा पारित किये गये फासीवादी कानून नागरिकता संशोधन अधिनियम (सी.ए.ए.) की कड़ी निंदा करती है। हम नागरिकों की राष्ट्रीय सूची (एन.आर.सी.) और राष्ट्रीय आबादी सूची (एन.पी.आर.) के संकलन की भी निंदा करते हैं। लोगों को धर्म के आधार पर बांटना ही हिन्दोस्तान के 150 इजारेदार घरानों द्वारा नियंत्रित हिन्दोस्तानी राज्य का एकमात्र मक़सद है। उन्होंने इस समय मुसलमानों को अपने हमले का निशाना बनाया है और हमें इस बात का बिल्कुल भी भ्रम नहीं   है कि बर्तानवी बस्तीवादियों से विरासत में हासिल “बांटों और राज करो” की नीति को जारी रखते हुए, किसी और समय पर, किसी अन्य धर्म या जाति के लोगों, ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं, कम्युनिस्टों, मानव अधिकार कार्यकर्ताओं को भी निशाना नहीं बनाया जायेगा। मोदी और अमित शाह की जोड़ी की अगुवाई में हिन्दोस्तान में भाजपा की सरकार अमरीकी और बर्तानवी साम्राज्यवादियों के नक्शे-क़दम पर चल रही है। वे इस्लामोफोबिया (इस्लाम का खौफ) फैला रहे हैं, यानी यह धारणा कि दुनियाभर में आतंकवाद और तमाम समस्याओं का स्रोत मुसलमान लोग हैं। जबकि असलियत में दुनियाभर में आतंकवाद का स्रोत अमरीकी साम्राज्यवाद है। अमरीका उन सभी देशों के खि़लाफ़ कब्ज़ाकारी जंग छेड़ रहा है जो अमरीका द्वारा दुनियाभर में अपनी हुकूमत क़ायम करने का विरोध कर रहे हैं। और हिन्दोस्तान की सरकार हिन्दोस्तान में इस्लामोफोबिया फैलाकर अमरीका की मदद कर रही है।

”साथियों और दोस्तों, आज हम ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स से 350 गज की दूरी पर खड़े हैं, जहां नरेन्द्र मोदी ने बर्तानवी शासन की तारीफ करते हुए कहा था कि, उन्हें हिन्दोस्तान और ब्रिटेन के बीच सांझे इतिहास पर फक्र है और इस बात पर भी फक्र है कि हिन्दोस्तान में जो जनतंत्र क़ायम किया गया है वह वेस्टमिनिस्टर जनतंत्र के नमूने की नकल करते हुए बनाया गया है। आज मैं यहां खड़े होकर कहना चाहता हूं कि यह तथाकथित “सभी संसदों की मां” न केवल हिन्दोस्तान बल्कि दुनिया के एक-चौथाई हिस्से में लाखों करोड़ों लोगों के खि़लाफ़ गुनाहों के लिए, उनका क़त्ल करने लिये, उनको लूटने और उनकी भुखमरी के लिए ज़िम्मेदार है। यह वेस्टमिनिस्टर ढांचा दुनियाभर में हिन्दोस्तान जैसे देश की पूंजीवादी सरकारों के लिए एक नमूना है कि किस तरह से आम लोगों की आंखों में धूल झोंकते हुए, सबसे अमीर पूंजीपतियों की दौलत को बड़े पैमाने पर बढ़ाया जा सकता है।

”साथियों और दोस्तों, इसलिए हम ऐसे लोगों की बातों का कभी यकीन नहीं कर सकते, जो ब्रिटेन को एक महान जनतंत्र होने का दवा करते हैं और हिन्दोस्तान को दुनिया का सबसे बड़ा जनतंत्र करार देते हैं। यह संसद ऐसा संस्थान है जहां सबसे बड़े इजारेदार पूंजीपतियों के नुमाइंदे यह चर्चा करते हैं कि किस तरह से इजारेदारों के कार्यक्रम को सबसे बढ़िया तरीके से लागू किया जाये और उसके बारे में लोगों के बीच भ्रम फैलाकर उसकी साख बचायी जाये।

”आज इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन आपसे आह्वान करती है कि इस ब्रिटिश और हिन्दोस्तानी जनतंत्र के बारे में कोई गलतफहमी न रखें। हम आपसे आह्वान करते हैं कि आप हिन्दोस्तान की संसद में पारित नागरिकता संशोधन कानून के खि़लाफ़ आवाज़ उठायें। आप हिन्दोस्तान में हमारे भाइयों और बहनों, नौजवानों और छात्रों, लाखों करोड़ों मेहनतकश लोगों, बुद्धिजीवियों, मानव अधिकार कार्यकर्ताओं के समर्थन में आवाज़ उठायें जो लाठियों, गोलियों, आंसू गैस के गोलों, पानी की तोपों और प्रशासन के गुंडों का बहादुरी के साथ सामना कर रहे हैं। हम शाहीन बाग की औरतों को सलाम करते हैं, हम अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय और तमाम अन्य विश्वविद्यालयों के छात्रों और अध्यापकों को सलाम करते हैं जो बड़ी बहादुरी और दिलेरी के साथ इस फासीवादी कानून के खि़लाफ़ संघर्ष कर रहे हैं। हम सब आपके साथ हैं और हमेशा साथ रहेंगे। आखिर में मैं आप सभी को सलाम करता हूं, जो इस फासीवादी कानून के खि़लाफ़ इस ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए देश के कोने-कोने से यहां इकट््ठा हुए हैं। इंक़लाब जिं़दाबाद!“

ग़दर इंटरनेशनल की ओर से अपनी बात रखते हुए कामरेड सलविंदर ने बताया कि हिन्दोस्तान के लोग दमनकारी हिन्दोस्तानी राज्य से आज़ादी की मांग कर रहे हैं। कामरेड सलविंदर ने हिन्दोस्तानी राज्य के वहशी हमलों के खि़लाफ़ बहादुरी से साथ लड़ने के लिए हिन्दोस्तान के छात्रों को सलाम किया। हिन्दोस्तान के छात्र शिक्षा के निजीकरण की नीति के चलते पनप रहे शोषण से आज़ादी की मांग कर रहे हैं। वे सभी के लिए मुफ्त और अच्छी गुणवत्ता की शिक्षा को एक बुनियादी अधिकार बतौर मांग कर रहे हैं। मज़दूर अपने श्रम के शोषण और देश के प्राकृतिक संसाधनों की लूट से आज़ादी की मांग कर रहे हैं, जो हिन्दोस्तान के इजारेदार पूंजीपति विदेशी इजारेदार पूंजीपति के साथ सांठ-गांठ में अपने लिए अधिकतम मुनाफ़ों की खातिर चला रहे हैं।

कामरेड सलविंदर ने हिन्दोस्तान के लोगों को सलाम किया, जो दलितों और तमाम दबे-कुचले लोगों पर हो रहे हमलों के खि़लाफ़ एकजुट होकर लड़ रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि वो दिन दूर नहीं जब हिन्दोस्तान के लोग इस दमनकारी हिन्दोस्तानी राज्य के खि़लाफ़ अपने सभी संघर्षों को एकजुट करेंगे और हिन्दोस्तान में असली आज़ादी क़ायम करेंगे, जिसका सपना ग़दर पार्टी, शहीद उधम सिंह, शहीद भगत सिंह और उनके साथी देशभक्तों ने देखा था। संघर्ष का यह ज्वार इस बर्बर व्यवस्था को बहाकर ले जायेगा और इंक़लाब के रास्ते हिन्दोस्तान में असली आज़ादी क़ायम करेगा, जिससे हिन्दोस्तान के मेहनतकशों द्वारा पैदा की जा रही तमाम दौलत लोगों के भौतिक और सांस्कृतिक स्तर को ऊपर उठाने के लिए इस्तेमाल की जा सकेगी। एक ऐसी व्यवस्था क़ायम की जाएगी जो सभी मज़दूरों और मेहनतकश लोगों की खुशहाली सुनिश्चित करेगी, जहां मज़दूर मेहनतकश खुद फैसले लेंगे और अपनी किस्मत के मालिक होंगे। कामरेड सलविंदर के भाषण के बाद रैली में शामिल हजारों लोगों ने इंक़लाब जिं़दाबाद के नारे लगाये।

इस रैली को कई संगठनों ने एकजुट होकर आयोजित किया था जिसमें इंडियन मुस्लिम फेडरेशन (यू.के.), मुस्लिम एसोसिएशन ऑफ़ ब्रिटेन, साउथ एशिया सॉलिडेरिटी ग्रुप, इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन, ग़दर इंटरनेशनल, तमिल पीपल इन यू.के., कास्ट-वॉच यू.के., कश्मीर सॉलिडेरिटी मूवमेंट, मलयाली मुस्लिम और न्यूहैम मुस्लिम अलायन्स सहित कई अन्य संगठन शामिल हैं।

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Repeal CAA    Feb 1-15 2020    Struggle for Rights    Popular Movements     Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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