मुक्ति की लेकर ध्वजा, आगे बढ़ो, आगे बढ़ो!

ज़िन्दगी की हर खुशी से दूर गम से चूर है

क्योंकि बेचारा हमारे देश का मज़दूर है

सारा दिन मेहनत करे पर रात को खाना नहीं

हो अगर बीमार तो कोई दवाखाना  नहीं

कष्ट मज़दूरों के कोई आज तक जाना नहीं

जुल्म सहने के लिए ये आज भी मजबूर है

ज़िन्दगी की हर खुशी से दूर गम से चूर है

क्योंकि बेचारा हमारे देश का मज़दूर है

 

तन पे कपड़ा भी नहीं है सर छुपाना भी कठिन

मौसमों की मार से खुद को बचाना भी कठिन

जुल्म सहते हैं श्रमिक जो वो बताना भी कठिन

अब बदलना चाहिए जो जुल्म का दस्तूर है

ज़िन्दगी की हर खुशी से दूर गम से चूर है

क्योंकि बेचारा हमारे देश का मज़दूर है

 

इसके बीबी और बच्चों का न पुरसाहाल है

ज़िन्दगी तो इसके खातिर जीते जी इक काल है

दाल में काला नहीं है सिर्फ काली दाल है

है जवानी में बुढ़ापा चेहरा भी बेनूर है

ज़िन्दगी की हर खुशी से दूर गम से चूर है

क्योंकि बेचारा हमारे देश का मज़दूर है

 

घोषणाएं इसके हित में होती हैं अक्सर यहां

पर हकीक़त जानकर मैं खा गया चक्कर यहां

योजनाएं तो बहुत हैं इसकी खातिर पर यहां

लूट इसके नाम पर चारों तरफ भरपूर है

ज़िन्दगी की हर खुशी से दूर गम से चूर है

क्योंकि  बेचारा  हमारे देश का मज़दूर है

 

मुक्ति कब मिल पाएगी मज़दूर को अभिशाप से

कष्ट, अत्याचार, पीड़ा, भूख और संताप से

प्रश्न मेरा है सभी से इनसे उनसे आप से

ये समस्या क्यों हमारे देश में नासूर है

ज़िन्दगी की हर खुशी से दूर गम से चूर है

क्योंकि बेचारा हमारे देश का मज़दूर है

इसकी हालत के लिए तो हम ही ज़िम्मेदार हैं

क्यों नहीं देते जो इसके लाभ हैं अधिकार हैं

क्यों नहीं हम जागते क्या अब भी हम बीमार हैं

आज सब ये मिल के बोलें जुल्म नामंजूर है

ज़िन्दगी की हर खुशी से दूर गम से चूर है

क्योंकि बेचारा हमारे देश का मज़दूर है

 

सारी रंगीनी जहां की सिर्फ इसके दम से है

गाड़ी, बंगला ऐश का सामान इसके श्रम से है

धनिकों के चेहरे पे खुशियां इसके ही दमखम से है

ये इन्हीं खुशियों से फिर भी आज कितना दूर है

ज़िन्दगी की हर खुशी से दूर ग़म से चूर है

क्योंकि बेचारा हमारे देश का मज़दूर है

 

आओ मेरे भाई मेरे साथ कुछ सीढ़ी चढ़ो

मुक्ति की लेकर ध्वजा आगे बढ़ो, आगे बढ़ो

अपनी मंजिल खुद चुनो और क़िस्मत खुद गढ़ो

क्यों नियति की ये व्यवस्था आज भी मंजूर है

ज़िन्दगी की हर खुशी से दूर गम से चूर है

क्योंकि बेचारा हमारे देश का मज़दूर है

                 - अरविन्द असर, दिल्ली

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Feb 1-15 2020    Letters to Editor    Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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