बैंक यूनियनों की हड़ताल

इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आई.बी.ए.) द्वारा वेतन संशोधन की मांग को नामंजूरी देने के बाद, देश की सभी बैंक यूनियनें दो दिन की हड़ताल पर गयीं। 31 जनवरी और 1 फरवरी को बैंक कर्मचारी हड़ताल पर रहे। सभी कर्मचारी नवम्बर 2017 से अपनी वेतन संशोधन की मांग को पूरी होने का इंतज़ार कर रहे हैं। आई.बी.ए. ने वेतन में केवल 13.5 प्रतिशत वृद्धि का आश्वासन दिया जबकि बैंक यूनियनों ने 20 प्रतिशत वृद्धि की मांग की थी। पिछले वेतन समझौते के तहत कर्मचारियों को वेतन में 15 प्रतिशत वृद्धि मिली थी। यह समझौता 1 नवम्बर 2012 से 31 अक्टूबर 2017 तक लागू था।

2-Day bank strike
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अपनी वेतन संशोधन की मांग की नामंजूरी के खिलाफ सभी बैंक कर्मचारियों ने अपना विरोध प्रदर्शन किया और बैंक कार्यालयों के सामने धरने पर बैठे। सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कामकाज पर इसका असर पडा।

नौ बैंकों की यूनियनों के सांझे संघठन, यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक युनियन्स (यू.एफ.बी.यू.), जिसमें आॅल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन (ए.आई.बी.ओ.सी.), आॅल इंडिया बैंक एम्पलोइज़ एसोसियेशन (ए.आई.बी.ई.सी.), और नेशनल आर्गेनाइज़ेशन आॅफ बैंक वर्कर्स (एन.ओ.बी.डब्ल्यू.) भी शामिल हैं, ने इस हड़ताल को आयोजित किया।

कुछ राज्यों में जैसे कि मध्य प्रदेश और पश्चिमी बंगाल में इस दो दिन की हड़ताल का बैंकिंग सेवाओं पर गहरा असर पड़ा। मध्य प्रदेश में 32,000 कर्मचारियों में से 31,000 कर्मचारी हड़ताल पर थे। सभी बैंक कर्मचारियों ने 11-13 मार्च को फिर से हड़ताल पर जाने की चेतावनी, सरकार को दी है, यदि उनकी मांगें तब तक सरकार नहीं मानती।

कुछ राज्यों, जैसे कि बिहार और मध्य प्रदेश में राज्य सरकार के कर्मचारियों ने भी बैंक हड़ताल में भाग लिया।

यूनियनों के पदाधिकारियों ने जनता से अपील की है कि उनके पास हड़ताल के अलावा और कोइ चारा नहीं था क्योंकि आई.बी.ए. उनकी मांगों के प्रति, बहुत ही कड़ा रुख दिखा रही है। “हम अपने बैंक के सभी ग्राहकों से विनम्र अपील करतें है कि हड़ताल के कारण उनको जो असुविधा हुई है, उसके लिये उन्हें दुःख है परन्तु हम लोग आपको बताना चाहतें है कि बैंक प्रबंधन और आई.बी.ए. के रवैये से उनको हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

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bank workers    Feb 16-29 2020    Struggle for Rights    Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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