बिहार में सफाई कर्मचारी हड़ताल पर

8 फरवरी को समाचार लिखे जाने तक बिहार के सफाई कर्मचारियों की हड़ताल छठे दिन में प्रवेश कर गयी है। 

Bihar Sanitation workers

पटना नगर निगम के मजदूर और सफाई कर्मचारी नौकरी को नियमित किए जाने की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। हाल में सरकार ने उनकी नौकरी को नियमित करने के बजाय उनको नौकरी से हटाने का निर्यण लिया है। चैथी श्रेणी के ये दिहाड़ी मजदूर शहर में हर दिन साफ़ सफाई और कूड़ा करकट को हटाने का बहुत ही अप्रिय लेकिन बहुत ही जरूरी काम करते हैं, हालांकि सरकारी अधिकारियों ने उनको पक्का करने का बार-बार मौखिक आश्वासन दिए हैं।

हड़ताल को तोड़ने के लिए सरकार ने पटना नगर निगम ने 12 सफाई निरीक्षकों को निलंबित कर दिया है। उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्यवाही के आदेश हैं। 6 जनवरी को, पटना नगर निगम के अधिकारियों ने सफाई कर्मचारियों की विभिन्न यूनियनों के 6 नेताओं के खिलाफ, मजदूरों को भड़काने और सरकारी काम में मुश्किलें खड़ी करने के अपराध में कोतवाली पुलिस स्टेशन में एक एफआईआर भी दाखिल की कर दिया है। परन्तु सरकार की हड़ताल को तोड़ने की कोशिश नाकाम रही है।

जिला प्रशासन ने कर्मचारियों को धमकी भी दी और पुलिस सरंक्षण में नए दिहाड़ी मजदूरों को काम पर ले कर शहर में इकट्ठा कूड़े को साफ़ करने की भी कोशिश की। शासन की तमाम कोशिशों के बावजूद, हड़ताल पर जो कर्मचारी हैं उन्होंने प्रशासन के अधिकारियों को ये सब करने से रोका दिया है। 

सभी कर्मचारी अपनी हड़ताल को जारी रखने के लिए दृढ़ हैं जब तक सरकार उनकी मांगें पूरी नहीं करती। वे मौर्या लोक काम्प्लेक्स में पटना नगर निगम के मुख्यालय के सामने धरने पर बैठें हैं। सरकार के मजदूर-विरोधी रवैये के खिलाफ धरने में नारे भी लगाये जा रहे हैं।

शहर में इस  हड़ताल के कारण साफ़-सफाई और कूड़े उठाने पर बहुत बुरा असर पड़ा है। बिहार की राजधानी में चारों तरफ कूड़े के ढेर नजर आ रहे हैं। हड़ताली कर्मचारियों ने पाॅश कोलोनियों में रहने वाले मंत्रियों और बड़े बड़े अधिकारियों के घरों के सामने जानवरों की हड्डियां बिखेर दीं।

यह  हड़ताल सोमवार 3 फरवरी को शुरू हुई। जब शहरी विकास विभाग ने, लोक आयुक्त के आदेश के आधार पर राज्य की सभी शहरी नगर निगमों को यह निर्देश दिए कि वे तुरंत चैथी श्रेणी के दिहाड़ी मजदूरों को लेना बंद करें। सब काम ठेके के मजदूरों से कराया जाए। इस आदेश से 4500 दिहाड़ी मजदूर बेरोजगार हों जायेंगे - ये उनकी रोजी रोटी को छीनने का आदेश है।

हड़ताली मजदूरों ने बताया कि उनमें से सैकड़ों ऐसे मजदूर हैं, जो पिछले दस वर्षों से दिहाड़ी मजदूर की तरह काम कर रहे हैं। इस आशा के साथ के एक दिन उनकी नौकरी नियमित होगी। सफाई मजदूरों का कहना था कि सरकार के स्वच्छ भारत अभियान के पीछे उनकी तरह के मजदूरों का योगदान है पर विडम्बना यह है कि उनकी नौकरी तक सुरक्षित नहीं है।

हाल ही में ये भी पता चला है कि बिहार की 143 नगर निगम के सभी सफाई मजदूरों ने अब इस हड़ताल में शामिल होने का फैसला किया है। जाहिर है कि राज्य के और भी शहरों में, जैसे कि गया, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, कटिहार आदि में भी साफ सफाई का काम सब ठप्प हो गया है।

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sanitation workers    Feb 16-29 2020    Struggle for Rights    Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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