बजट 2020: किसानों की चिंताएं और बजट के प्रस्तावित हल

सुनिश्चित लाभकारी दाम पर सभी कृषि उत्पादों की खरीदी और खेती कर्जों को माफ करने की माँग किसान करते आयें हैं। किसान दामों में उतर-चड़ाव के कारण होने वाले नुकसान से संरक्षण चाहते हैं। सरकार उनको कह रही है कि पहले नुकसान सहन करो फिर उसकी भरपाई के लिए सरकार को अर्जी दो।

किसानों को स्थिर और लाभदायक दाम तभी आश्वस्त किये जा सकते हैं जब राज्य सार्वजानिक खरीदी को मजबूत करने और उसका विस्तार करने के लिए निवेश करे। सार्वजानिक खरीदी में निवेश करने के बजाय हिन्दोस्तानी सरकार उदारीकरण का उलटा कार्यक्रम लागू कर रही है। वह जरुरत से दुगने खा। भंडार पर बैठी हुई है और फिर भी सार्वजनिक वितरण व्यवस्था में कटौती कर रही है।

वह क्रषि बाजार को हिन्दोस्तानी इजारेदार और विदेशी बहुदेशीय कंपनियों सहित निजी व्यापार के लिए खोल रही है।

किसानों की आमदनी 2015 की तुलना में 2022 तक दुगना करना सरकार का घोषित लक्ष्य है। पिछले दो वर्षों में किसानों की आमदनी बढ़ने के बजाय घटी है। 2014 से ग्रामीण वेतन वृद्धि दर कम होती गई है तथा नोटबंदी के पश्चात हालत और भी खराब हो गई।

वित्त मंत्री द्वारा कृषि क्षेत्र के लिए घोषित 16-सूत्री कार्य योजना से आने वाले दिनों में तो कोई खास आमदनी नहीं बढ़ने की सम्भावना है। कृषि के लिये उधार बढ़ाने, खा। और मछली उत्पादन बढ़ाने, पैर औए मूँह रोग (विवज ंदक उवनजी कपेमंेम) मिटाने, शून्य बजट को लुभावने देने, नाशवान पदार्थों के लिए यातायात सुधारने जैसे कार्यक्रमों का योजना में उल्लेख है। योजना क्रषि जमीन को पट्टे पर देना और कॉन्ट्रेक्ट खेती को प्रोत्साहित करना चाहती है। इनमें सो कोई भी किसानों की मूल समस्याओं को नहीं हल करता है।

इसके विपरीत कुछ महत्वपूर्ण स्कीमों के लिए आवंटन कम कर दिया गया है।

जब किसान अपनी उपज ऍमएसपी से कम भाव पर बेचते हैं तो उनके नुकसान की भरपाई के लिए 2019 में प्रधान मंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान शुरू किया गया था। इस स्कीम के लिए आवंटन पिछले वर्ष के 1500 करोड़ रुपये से काट कर इस वर्ष के लिए 500 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यदि बाजार दाम ऍमएसपी के बराबर होते तो यह कटौती जायज होती। परंतु, बाजार में दाम गेंहु और चांवल को छोड़ कर अधिकांश फसलों के लिए निरंतर ऍमएसपी से कम रहे हैं।

काफी प्रचारित प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि कार्यक्रम ने देश के प्रत्येक किसान परिवार को सालाना 6000 रुपये देने का आयोजन किया था। 2019-20 के बजट में इस स्कीम के लिए 75,000 करोड़ रूपये का प्रावधान किया था लेकिन केवल 54,370 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे। इसका मतलब है जब किसान सबसे गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं तीन-चैथाई प्रावधान ही बाँटा जायेगा। कुछ राज्यों ने तो स्कीम को लागू ही नहीं किया। 2020-21 के लिए भी बजट प्रावधान 75,000 करोड़ रुपये ही है।

जब ग्रामीण वेतन नहीं बढ़ रहे हैं, क्रषि संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित 50 करोड़ भूमिहीन किसानों को डछत्म्ळ। कुछ आमदनी मदद प्रदान करता है। परन्तु, 2020-21 के बजट में इस स्कीम के लिए प्रावधान 10ः घटा कर  71,000 करोड़ रुपये से 61,500 करोड़ रुपये कर दिया है।

2020-21 के लिए सम्पूर्ण कृषि बजट 1.43 लाख करोड़ रुपये है जो 2019-20 के 1.39 लाख करोड़ रुपये के बजट से केवल 3 प्रतिशत अधिक है। 2019-20 के संशोधित बजट अनुमान को 20 प्रतिशत कम कर 1.1 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है।

जहाँ कृषि उत्पादों की बिक्री एमएसपी पर सुनिश्चित करने के लिए सरकार कुछ नहीं कर रही है, कृषि उत्पादन के लिए वस्तुओं के दाम बढ़ते ही जा रहे हैं। बजट ने कृषि के लिए उधार बढ़ा कर 15 लाख करोड़ रुपये करने की घोषणा की। जब तक किसानों को आशवस्त दाम पर खरीदी और अच्छी गुणवत्ता के उत्पादन सामान वहन करने में समर्थ दाम पर मिलने की गारंटी नहीं मिलती है, अधिक उधार उनकी ऋणग्रस्तता और विपदा को अधिक बढ़ाएगा।

हर साल की तरह बजट ने जिसके वायदे किये जाते हैं उसके लिए प्रावधान नहीं किया दृ किसानों की आमदनी दुगनी करना महज एक मजाक रह गया है।

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पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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