समान काम के लिये समान वेतन की मांग : बिहार में 74,000 स्कूलों में 3,75,000 नियोजित शिक्षकों की हड़ताल

बिहार में नियोजित एवं प्राथमिक शिक्षकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी है। 1 मार्च को शिक्षकों ने अपने-अपने विधायकों और मुख्यमंत्री सहित उप मुख्यमंत्री के आवास का घेराव किया। हालांकि शिक्षकों ने सरकार के सामने सशर्त वार्ता का प्रस्ताव रखा है। किन्तु सरकार अपने दमनात्मक रवैये पर अड़ी हुई।

Teachers-Bihar

विदित रहे कि बिहार में पौने चार लाख नियोजित शिक्षक (संविदा शिक्षक) बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति के बैनर तले 17 फरवरी, 2020 से हड़ताल पर हैं। नियोजित शिक्षकों की मांग है कि उन्हें समान काम के लिये समान वेतन दिया जाये, उनके लिये भी सेवा शर्त नियमावली बने, उन्हें भी पुरानी पेंशन योजना एवं अनुकंपा का लाभ दिया जाए (याने कि किसी शिक्षक के दुर्घटनाग्रस्त होने पर दी जाने वाली सहायता)।

समिति के प्रदेश अध्यक्ष ब्रजनंदन कुमार ने कहा कि हड़ताल के दौरान स्कूलों में पठन-पाठन को ठप रखा जाएगा। मैट्रिक परीक्षा का बहिष्कार किया जाएगा। हालांकि बच्चों को बता दिया गया है कि सोमवार से स्कूलों में शिक्षकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल रहेगी। समिति की तरफ से हर जिले में क्विक रिस्पांस टीम बनायी गयी है। यह टीम सभी स्कूलों में जाकर स्कूलों को बंद कराएगी।

साथ ही साथ टी.ई.टी.-एस.टी.ई.टी. उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ ने राज्य स्तरीय शिक्षक कन्वेंशन पटना में किया। जिसमें राज्य भर के शिक्षक इकट्ठा हुए, जिसमें सभी शिक्षकों ने 17 फरवरी से हड़ताल पर जाने का समर्थन किया। संघ के प्रदेश अध्यक्ष मार्कण्डेय पाठक ने कहा कि 17 फरवरी से 14 मार्च तक राज्य भर में शिक्षक संघर्ष यात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद 15 मार्च को शिक्षकों का नागरिक सम्मेलन पटना में किया जाएगा।

बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर माध्यमिक शिक्षकों ने 27 फरवरी से हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। नियमित शिक्षकों के नेता आनंद कौशल ने बताया कि 27 फरवरी से माध्यमिक शिक्षक भी हड़ताल पर जायेंगे। उन्होंने बताया कि शिक्षक संघ सरकार से झूठी वार्ता करने को तैयार नहीं है।

दूसरी ओर, बिहार सरकार ने हड़ताली शिक्षकों से दो टूक कह दिया है कि समान काम के लिये समान वेतन पर तो कोई भी बात नहीं होगी। सरकार ने कहा है कि उसकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह पुराने शिक्षकों के समान वेतन नियोजित शिक्षकों दे सके।

नियोजित शिक्षक अपनी मांगों को लेकर पूरे बिहार के अलग-अलग जिलों में लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। ये प्रदर्शन जिला मुख्यालयों, उपखंड अधिकारी कार्यालयों या स्कूलों पर किये जा रहे हैं।

बिहार सरकार ने शिक्षकों पर अपना दमन तेज़ कर दिया है। नियोजित शिक्षकों की हड़ताल को अवैध घोषित कर दिया है और उन पर सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिये हैं। शिक्षा विभाग ने आदेश दिया है कि जो भी शिक्षक हड़ताल में शामिल रहेंगे या जिनको मूल्यांकन के लिए नियुक्त किया जायेगा, अगर वे काम पर नहीं आते हैं, तो उनके खि़लाफ़ एफ.आई.आर. दर्ज़ करके, उन्हें तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया जाये।

शिक्षकों की हड़ताल के पांचवें दिन पटना जिले के 14 शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया और उन पर एफ.आई.आर. दर्ज करने के आदेश दिये गये। विभिन्न जिलों में भी हड़ताली शिक्षकों पर इस तरह की बर्खास्तगी और एफ.आई.आर. की कार्रवाई तेज़ कर दी गईं।

शिक्षकों ने एकजुट होकर कहा है कि हमारी हड़ताल शांतिपूर्ण है। हम मैट्रिक परीक्षा में कोई बाधा नहीं डाल रहे हैं। इसके बावजूद झूठा आरोप लगाकर शिक्षकों को बर्खास्त किया जा रहा है।

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Mar 1-15 2020    Struggle for Rights    Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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