दिल्ली में रेल चालकों का जुलूस और सभा : निजीकरण को ख़त्म करने के लिये संघर्ष को तेज़ करेंगे

आल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसियेशन (ए.आई.एल.आर.एस.ए.) की अगुवाई में हजारों रेल चालकों ने 19 फरवरी को दिल्ली के अम्बेडकर भवन से जंतर-मंतर तक जुलूस निकाला। जंतर-मंतर पर एक जुझारू सभा की गई। इसमें अनेक रेल चालक अपने परिवार सहित शामिल हुये।

इससे एक दिन पहले ए.आई.एल.आर.एस.ए. की सेंट्रल वर्किंग कमेटी के अधिवेशन का आयोजन भी किया गया। इस पूरे कार्यक्रम में देश के सभी मंडलों से चालक शामिल हुये।

Rail drivers dharna

विदित रहे कि रेल चालक पिछले कई वर्षों से अपनी काम की परिस्थितियों में सुधार के लिये तथा अपने शोषण के विरोध में संघर्ष करते आये हैं। साथ-साथ उन्होंने रेलवे में चल रहे निजीकरण, निगमीकरण के विरोध में सघर्ष किया है।

सभा को संबोधित करने वाले वक्ताओं ने बताया कि ए.आई.एल.आर.एस.ए. भारतीय रेल में किये जा रहे निजीकरण का दृढ़तापूर्वक विरोध करता है। भारतीय रेल द्वारा निजीकरण के तहत चलाई जाने वाली 500 रेलों का हम विरोध करते हैं। क्योंकि ये गाड़िया निजी आपरेटरों तथा निजी रेल चालकों द्वारा चलाई जायेंगी, जिनमें रेल चालकों को कोई सुविधायें नहीं प्राप्त होंगी और इन गाड़ियों में यात्रा करने वालों के लिये भी ये उपयोगी नहीं होंगी।

हम दुनिया के दूसरे देशों में रेलों के निजीकरण को देख चुके हैं। जहां पर रेलों को दुबारा से सरकार के तहत चलाना पड़ा है। इसलिये उन अनुभवों को ध्यान में रखकर रेल के निजीकरण की नीति को बदलना चाहिये।

हम श्रम कानूनों को बदलने के खिलाफ़ भी अपना विरोध प्रकट करते हैं। इन कानूनों के तहत मज़दूरों को यूनियन या संगठन बनाने का कोई अधिकार नहीं होगा। यह लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों तथा उनकी रोज़ी-रोटी के अधिकारों के विरुद्ध है। हम सरकार से मांग करते हैं कि इन नीतियों को बदला जाये।

सभा को संबोधित करने वालों में शमिल थे - ए.आई.एल.आर.एस.ए. के अध्यक्ष का. एम.एन. प्रसाद, सीटू से का. तपन सेन, का. रामसरन, एन.बी. दत्ता, आर.आर. भगत, एल. मोनी, जीत सिंह टैंक, एम.एम. रोली और टी.सी. जेम्स, आदि।

ए.आई.एल.आर.एस.ए. के पदाधिकारियों ने रेल मंत्री पीयूष गोयल को एक ज्ञापन सौंपा। जिसमें निम्न लिखित मांगें उठाई गईं।

  • निजीकरण को रोको।
  • रनिंग अलाउंस को आर.ए.सी. 1980 के मुताबिक संशोधित करें और 1 जनवरी, 2016 बकाया वेतन चुकाएं।
  • नई पेंशन व्यवस्था (एन.पी.एस.) को रद्द करो और पुरानी पेंशन व्यवस्था को पुनः लागू करो।
  • ड्यूटी के कार्यकाल को 2020 में कम करके 10 घंटे करो, जैसा कि एच.पी.सी. की सिफारिश थी, और क्रमशः 90 घंटे वैधानिक सीमा के साथ कार्यकाल को कम करके 8 घंटे करो।
  • कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार 16.30 घंटे के पी.आर. की अनुमति दो।
  • ए.एल.पी. को एल-6 वेतन की अनुमति दो और लोको पायलटों को अलग ऊंचे स्तर की अनुमति दो। बराबर के नॉन-रनिंग वेतनमानों की घोषणा करो।
  • लगातार रात की ड्यूटी को दो तक सीमित करने की पहले की नीति वापस लाओ।
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Mar 1-15 2020    Struggle for Rights    Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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