राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के अतिथि शिक्षक : हम नयी पीढ़ी को ढालते हैं पर हमारा खुद का भविष्य अंधकार में है

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के सरकारी स्कूलों में काम करने वाले अतिथि शिक्षक पिछले कई वर्षों से नियमित नौकरी और बेहतर काम की शर्तों के लिये संघर्ष करते आये हैं। वर्तमान में 20,000 से भी अधिक अतिथि शिक्षक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के विभिन्न स्कूलों में काम करते हैं। एक के बाद एक सरकारों ने उनकी हालातों व मांगों को अनसुना किया है।

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मज़दूर एकता लहर ने डाॅ रचना से बातचीत की जो पिछले छः वर्षों से अधिक से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में एक पोस्ट ग्रेज्युएट अतिथि शिक्षक हैं और जिन्होंने अतिथि शिक्षकों के संघर्ष में अगुवा भूमिका अदा की है। नीचे इस साक्षात्कार के कुछ अंश प्रकाशित किये जा रहे हैं।

मज़दूर एकता लहर (म.ए.ल.): अतिथि शिक्षक किन मुख्य मुद्दों पर आंदोलन कर रहे हैं?

डाॅ. रचना: अतिथि शिक्षकों की सबसे प्रमुख मांग है कि उन्हें नियमित शिक्षक बतौर नियुक्त किया जाये। हममें से बहुत से लोग स्नातकोत्तर शिक्षक (पी.जी.टी.), प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टी.जी.टी.) व प्राथमिक शिक्षक (पी.आर.टी.) स्तर के शिक्षक हैं जो पिछले लगभग 10 वर्षों से अतिथि शिक्षक रहे हैं। इस दौरान शिक्षकों ने अनेक बार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के शिक्षा विभाग (एडूडेल) द्वारा विज्ञापित नियमित शिक्षक पदों के लिये आवेदन दिया है। लेकिन विज्ञापित नियमित पदों की संख्या बहुत ही कम रही है और अधिकांश तौर पर 4 से 5 वर्षों के अंतराल के बाद ही आती है। जब तक हम अपनी खास माहिरता के नियमित पद के लिये आवेदन दे पाते हैं, तब तक हममें से अधिकांश शिक्षकों की उम्र सीमा से बाहर हो जाती है। पी.जी.टी. नियमित शिक्षक के पद के लिये आवेदन देने की उम्र सीमा 36 वर्ष है तथा टी.जी.टी. शिक्षक पद के लिये (विषय के अनुसार) 32 से 42 वर्ष है।

हमारी दूसरी मांग, जिसके लिये हम आंदोलित हैं, कि हम नियमित शिक्षकों के समान वेतन व काम की शर्तें चाहते हैं।

म.ए.ल.: दिल्ली के सरकारी स्कूलों में अतिथि शिक्षकों को कैसे नियुक्त किया जाता है?
डाॅ. रचना: दिल्ली के सरकारी स्कूलों में अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति दिल्ली शिक्षा विभाग द्वारा की जाती है। किसी भी खास शिक्षक पद के लिये दी जाने वाली परीक्षा में पास होने के बाद, इस इलाके के किसी भी स्कूल में, स्कूल की ज़रूरत के मुताबिक, किसी भी आवेदक को नियमित शिक्षक पद पर या अतिथि शिक्षक पद पर नियुक्त किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर, जिस स्कूल में मैं पढ़ाती थी, नियमित शिक्षकों के 120 पद थे। इनमें 70 पदों पर नियमित शिक्षक थे और 50 पर अतिथि शिक्षक थे। यह स्कूल एक उच्चतर माध्यमिक स्कूल है जिसमें छठी से 12वीं कक्षाएं हैं।

अगर आप नियमित शिक्षक होने की सारी शर्ताें को पूरा भी करते हैं तब भी, आपकी नियुक्ति अतिथि शिक्षक बतौर की जा सकती है। अगर आप किसी स्कूल मेें कुछ वर्षों से अतिथि शिक्षक बतौर काम कर रहे हों और इस बीच उस विषय में किसी नियमित शिक्षक की उस विषय में नियुक्ति हो जाती है तो आप को नौकरी से निकाल दिया जायेगा। न तो स्कूल को और न ही शिक्षा विभाग को, आप को नियमित शिक्षक बतौर नियुक्त करने की कोई बाध्यता है जबकि कई वर्षों से अतिथि शिक्षक बतौर आप वहां ही काम करते रहे हों। उन्हें आपको अतिथि शिक्षक बतौर भी किसी और स्कूल में नियुक्त करने की कोई बाध्यता नहीं होती है। आपको अपने संपर्कों का इस्तेमाल करके कोई और स्कूल ढूंढना होगा जहां आप के विषय में किसी अतिथि शिक्षक की ज़रूरत हो। तब आप वहां आवेदन कर सकेंगे।

म.ए.ल.: अतिथि शिक्षकों को वेतन व काम की शर्तों में किन मुख्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है?

डाॅ. रचना: अतिथि शिक्षकों को सरकार द्वारा तय किये आधिकारिक वेतनमान नहीं दिये जाते हैं। उन्हें दिहाड़ी पर काम करना पड़ता है। इनके वेतन को नियमित तौर पर संशोधित नहीं किया जाता; पिछली बार वेतन को तीन साल पहले निर्धारित किया गया था। 
वर्तमान में एक पी.जी.टी. अतिथि शिक्षक को 1445 रुपये प्रतिदिन, एक टी.जी.टी. अतिथि शिक्षक को 1403 रुपये प्रतिदिन और पी.आर.टी. अतिथि शिक्षक को 1364 रुपये प्रतिदिन मिलता है। 

अतिथि शिक्षकों को रविवार या स्कूल की छुट्टियों के दिनों वेतन नहीं मिलता है। अगर वे अवकाश लेते हैं तो उन्हें कुछ भी वेतन नहीं मिलता है। उन्हें वेतन सहित मातृत्व अवकाश नहीं मिलता है। अगर एक गर्भवती अतिथि शिक्षक मातृत्व के लिये छुट्टी पर जाती है और उसकी जगह किसी और अतिथि शिक्षक की नियुक्ति होती है तो मातृत्व छुट्टी से लौटने पर नौकरी खोने का ख़तरा होता है। स्कूल के अधिकारी अतिथि शिक्षकों को मनमर्जी से परीक्षा की जिम्मेदारियां दे सकते हैं। फिर अगर उन्हें किसी दिन परीक्षा की ज़िम्मेदारी नहीं दी जाती तो उन्हें उस दिन का वेतन नहीं मिलता है। इन सब का मतलब है कि अतिथि शिक्षक को स्कूल में वही काम करने के लिये और उन्हीं ज़िम्मेदारियों के लिये, नियमित शिक्षक के मुकाबले 50 प्रतिशत से कम वेतन मिलता है।
अतिथि शिक्षकों को पूरे समय स्कूल में उपस्थित रहना पड़ता है और बिना अतिरिक्त आय के ओवर टाइम करना पड़ता है। उनसे एक नियमित शिक्षक की सारी जिम्मेदारियां निभाने की अपेक्षा की जाती है। इनमें शामिल हैं कक्षा की ज़िम्मेदारी लेना, खेल-कूद व सांस्कृतिक गतिविधियों, बोर्ड परीक्षाओं की ज़िम्मेदारियों, सेमिनार व कार्यशालाओं में भाग लेना और उसके साथ-साथ अपनी विशेषज्ञता से परे किसी भी विषय पर और किसी भी स्तर पर पढ़ाना। उन्हें स्कूल के अधिकारियों के निहायत पक्षपातपूर्ण और अपमानपूर्ण व्यवहार का सामना करना पड़ता है, जो उनके साथ गुलामों जैसा बर्ताव करते हैं।

म.ए.ल.: संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिये आपकी क्या योजना है?

डाॅ रचना: हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती है अतिथि शिक्षकों को संगठित करना और उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा में संघर्ष के लिये लामबंध करना। अपने समाज में आज नौकरी की बहुत अनिश्चितता है, अतः बहुत बार अतिथि शिक्षकों को रोज़ी-रोटी के लिये बहुत ही नाजायज़ शर्तों पर काम करने के लिये बाध्य होना पड़ता है। अपनी आवाज़ उठाने के लिये अतिथि शिक्षकों को दंड दिया जाता है। हमने पुलिस व सुरक्षा बलों की लाठियों का भी सामना किया है। हमारे संघर्ष को बदनाम करने वाले झूठे कार्पोरेट मीडिया व राज्य के प्रचार से भी हमें जूझना पड़ता है।

इस व्यवस्था में लगातार हमारे ऊपर होने वाले अन्याय व अपनी बुरी परिस्थिति पर हमें ध्यान दिलाते रहना पड़ता है और छात्रों के परिवारों व मेहनतकश लोगों के अन्य तबकों से अपने संघर्ष के लिये समर्थन जुटाना पड़ता है। सरकारें बदल जाती हैं परन्तु अतिथि शिक्षकों की बुरी परिस्थिति की तरफ वही निर्दयी व्यवहार जारी रहता है। हम और ज्यादा शिक्षकों को और अन्य मेहनतकश लोगों को अपने संघर्ष के समर्थन में लामबंध करते रहेंगे। 

सभी मेहनतकश लोगों के सभी तबकों तक हमारे लक्ष्य को अपनाने और हमारे संघर्ष का संदेश प्रसारित करने के लिये हम मज़दूर एकता लहर के आभारी हैं। अब तक, मज़दूर एकता लहर के कार्यकर्ता हमारे साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर हमारे संघर्षों में शामिल रहे हैं और हम आशा करते हैं कि हमें आपका समर्थन भविष्य में भी मिलता रहेगा। 

म.ए.ल.: आप पर होने वाले बहुत बुरे अन्याय के बारे में और जिन मुश्किल परिस्थितियों में आप संघर्ष कर रहे हैं उनके बारे में हमारे पाठकों को सूचित करने के लिये, डाॅ रचना, आपका धन्यवाद। आपके संघर्ष के लिये सबसे व्यापक समर्थन लामबंध करने के लिये हम कसम खाते हैं। अपने अधिकारों की लड़ाई में सफलता की हम कामना करते हैं।

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Mar 1-15 2020    Struggle for Rights    Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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