कोच्ची में पेट्रोलियम मज़दूरों का चैथा सम्मेलन : पेट्रोलियम मज़दूरों ने बी.पी.सी.एल. के निजीकरण का विरोध किया

पेट्रोलियम व गैस क्षेत्र के मज़दूरों की तीनों फेडरेशनों के करीब सौ प्रतिनिधि देशभर से 9 फरवरी को कोच्ची में एक सम्मेलन के लिये एकत्रित हुए। भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड (बी.पी.सी.एल.) के निजीकरण के विरोध में लगातार किया जाने वाला यह चैथा सम्मेलन था। इसके पहले ऐसे सम्मेलन मुंबई, दिल्ली व कोलकाता में किये जा चुके हैं। यह सम्मेलन 28 नवम्बर, 2019 और 8 जनवरी, 2020 की सर्व-हिन्द हड़तालों के बाद किया गया था।

सर्व हिन्द ट्रेड यूनियनों के नेताओं ने इस सम्मेलन को संबोधित किया जिनमें शामिल थे, सीटू के सर्व-हिन्द महासचिव, कामरेड तपन सेन, इंटक (केरल) के श्री आर. चन्द्रशेखरन, सीटू के नेता व राज्य सभा के सांसद, कामरेड इलामरम करीम और कामगार एकता चलवल के सचिव कामरेड ए. मैथ्यू। पेट्रोलियम मज़दूरों के राष्ट्रीय व स्थानीय नेताओं ने भी इस सम्मेलन को संबोधित किया।

Petroleum_workers_Kochi
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विभिन्न ट्रेड यूनियनों के नेताओं ने ध्यान दिलाया कि केन्द्र सरकार ने एक के बाद एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को निजी इजारेदारों को कौड़ियों के दाम पर बेचने की योजना बनाई है। इनमें शामिल हैं बी.पी.सी.एल., ओ.एन.जी.सी. के तेल के कुएं, हिन्दोस्तान न्यूज़प्रिंट लिमिटेड, इंट्रूमेंटेशन लिमिटेड, भारत अर्थमूवर्स लिमिटेड और विशाखापट्टनम स्टील। इन विशाल उद्यमों में से अधिकांश को मज़दूरों की मेहनत और खून-पसीने तथा सार्वजनिक निवेश से बनाया गया है और इनमें अधिकांश अभी भी मुनाफे़दार हैं। यह हिन्दोस्तानी और विदेशी इजारेदारों द्वारा देश की दौलत को लूटने के सिवाय और कुछ नहीं है।

वक्ताओं ने आगे जोर दिया कि बी.पी.सी.एल. के मज़दूरों को निजी खिलाड़ियों के लिये परिस्थिति इतनी मुश्किल बना देनी चाहिये कि कोई भी निजी खिलाड़ी इसे खरीदने के लिये आगे न आये। हमें आंदोलन को धरने, हड़तालों और अन्य तरीकों से जारी रखना होगा। जबकि सरकार चाहती थी कि निजीकरण का काम 31 मार्च, 2020 तक ख़त्म कर दिया जाये, वह इसमें असफल रही है। 2019-20 के दौरान, वह सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को बेचकर 1.05 लाख करोड़ रुपये प्राप्त करने के अपने के लक्ष्य का सिर्फ 1,800 करोड़ ही प्राप्त कर पायी है। अब पिछले वर्ष के लक्ष्य और 2020-21 वित्त वर्ष के 2.11 लाख करोड़ रुपयों के लक्ष्य को पूरा करने के लिये देश की दौलत को बेचने के वह हर अनैतिक तरीके को अपनायेगी, जिसका विरोध मज़दूर वर्ग को जबरदस्त तरीके से करना होगा। वक्ताओं ने विभिन्न यूनियनों के सभी पेट्रोलियम मज़दूरों की एकता के लिये बधाई दी।

एक के बाद एक वक्ताओं ने कोच्ची रिफाइनरी के मज़दूरों द्वारा पिछले 100 दिनों से रिफाइनरी के सामने दैनिक आंदोलन करने के लिये बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह पूरे देश के सभी बी.पी.सी.एल. के मज़दूरों के लिये एक मॉडल बतौर  अपनाना चाहिये। कोच्ची रिफाइनरी के मज़दूरों के संघर्ष ने केरल सरकार को बी.पी.सी.एल. के निजीकरण का विरोध करने की घोषणा करने के लिये बाध्य कर दिया। वक्ताओं ने आह्वान किया कि दूसरे राज्यों के पेट्रोलियम मज़दूरों को भी अपने संघर्ष को तेज़ करना चाहिये और राज्य सरकारों को बी.पी.सी.एल. के निजीकरण का विरोध करने के लिये बाध्य करना चाहिये।

कामगार एकता चलवल के कामरेड मैथ्यू ने पेट्रोलियम मज़दूरों द्वारा बनाई गयी एकता को सलाम किया, जो ट्रेड यूनियनों की बाधाओं से ऊपर उठकर बनी है। केन्द्र सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के निजीकरण की निंदा करते हुए उन्होंने कहा कि इसे मज़दूरों के एकजुट संघर्षों से ही हराया जा सकता है। उन्होंने याद दिलाया कि रक्षा उत्पादन क्षेत्र के निजीकरण को भी मज़दूरों के एकजुट संघर्ष के कारण ही रोका गया था। उन्होंने ध्यान दिलाया कि रक्षा उत्पादन क्षेत्र का निजीकरण तब रोका गया था जब रक्षा क्षेत्र के मज़दूरों ने दृढ़ता से एकजुटता से देश के अलग-अलग भागों में अगस्त 2019 में हड़तालें की थीं। इससे सरकार को अपनी योजना की समीक्षा करने की मज़दूरों की मांग से सहमत होना पड़ा था। इसी तरह, भारतीय रेल की उत्पादन इकाइयों के कारपोरेटीकरण व निजीकरण को भी रेल मज़दूरों के एकजुट विरोध प्रदर्शनों से रोका गया था, जिनमें उनके परिवार भी सड़कों पर उतरे थे।

कामरेड मैथ्यू ने इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (सी.ए.ए.), जनसंख्या की राष्ट्रीय पूंजी (एन.पी.आर.) और नागरिकता की राष्ट्रीय पंजी (एन.आर.सी.) के विरोध में देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। उन्होंने केरल की राजनीतिक पार्टियों और लोगों को बधाई दी कि वहां विधानसभा में सी.ए.ए., एन.पी.आर. और एन.आर.सी. के विरोध में एकमत से प्रस्ताव पारित किया गया। उन्होंने कहा कि मज़दूर वर्ग चुपचाप किनारे खड़ा नहीं रह सकता है जब अपनी बेटियां, बहनें, बेटे और माएं सड़़कों पर उतर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह एक ही सरकार है, जो अपने देश की दौलत को बेच रही है और अपने लोगों में धर्म के आधार पर फूट डाल रही है। हमें इन दोनों का विरोध करना है।

सम्मेलन में एक एक्शन प्लान पर दृढ़ निश्चय किया। मार्च के महीने में मुंबई, कोलकाता, गुवाहाटी, चेन्नई, कोच्ची, बंगलूरू और दिल्ली सहित देश के हर तेल व पेट्रोलियम केन्द्रों में तेल व पेट्रोलियम मज़दूरों के संयुक्त सम्मेलन आयोजित किये जायेंगे। इनके अंत में 20 व 21 अप्रैल 2020 को दो दिन की सर्व-हिन्द हड़ताल की जायेगी।

नेताओं ने बी.पी.सी.एल. के प्रबंधन की निंदा की जो 28 नवम्बर, 2019 और 8 जनवरी, 2020 की हड़़तालों में भाग लेने के लिये चार दिनों के वेतन की कटौती कर रही है। उन्होंने बताया कि उन्होंने मुबर्ह उच्च न्यायालय में, केन्द्र सरकार द्वारा 1976 में संसद द्वारा पारित कानून को रद्द करने को चुनौती दी है। इस कानून के तहत बर्मा शैल कंपनी का राष्ट्रीयकरण किया गया था। उन्होंने घोषणा की कि वे इस पर सर्वोच्च अदालत तक लड़ेंगे। उन्होंने मज़दूरों को एक एकीकृत मांगपत्र रखने का बुलावा दिया ताकि ठेका मज़दूरों को भी निजीकरण के खि़लाफ़ एक सांझे संघर्ष में लाया जा सके।

बहुत से प्रतिनिधियों ने आगे आकर कसम खाई कि वे संघर्ष को आगे लेकर जायेंगे। मुंबई रिफाइनरी के प्रतिनिधियों ने कहा कि कोच्ची रिफाइनरी के उदाहरण का अनुसरण करते हुये, वे भी रिफाइनरी के बाहर लगातार विरोध प्रदर्शन करेंगे। वे राजनीतिक पार्टियों के विधायकों से भी बात करेंगे और अपने संघर्ष के लिये समर्थन जुटाएंगे।

प्रतिनिधियों के सम्मेलन के बाद एक बी.पी.सी.एल. के हजारों मज़दूरों का जन सम्मेलन किया गया। बी.पी.सी.एल. के निजीकरण की केन्द्र सरकार की राष्ट्र-विरोधी क़दम का विरोध करने के लिये ये प्रतिनिधि सम्मेलन व जन सम्मेलन बहुत महत्वपूर्ण क़दम हैं।

मज़दूर एकता लहर बी.पी.सी.एल. के मज़दूरों के जायज़ संघर्ष का पूरी तरह से समर्थन करती है और आह्वान करती है कि एकजुट संघर्ष से सरकार की योजना को विफल करें।

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Mar 1-15 2020    Struggle for Rights    Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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