मज़दूर-विरोधी और किसान-विरोधी बजट-2020 के खि़लाफ़ प्रदर्शन

18 फरवरी, 2020 को देश की राजधानी दिल्ली में वामपंथी और कम्युनिस्ट पार्टियों ने केन्द्रीय बजट-2020 के खि़लाफ़ मंडी हाउस से लेकर जंतर-मंतर तक संयुक्त जुलूस निकाला। ‘जन-विरोधी बजट के विरुद्ध विराट प्रदर्शन’, इस झंडे तले भाकपा, माकपा, भाकपा-माले, आल इंडिया फावर्ड ब्लाक, आरएसपी और हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी ने इसे आयोजित किया था। यह जुलूस बारहखंबा रोड और टालस्टॉय मार्ग होते हुए जंतर-मंतर पर पहुंचकर एक जनसभा में तब्दील हो गया।

Protest against budget
Protest against budget

यह जुलूस देशभर में 12 से लेकर 18 फरवरी तक बजट के खि़लाफ़ चलाए गए अभियान का समापन था। इस जुलूस में बड़ी संख्या में, मज़दूरों, महिलाओं और छात्रों ने हिस्सा लिया। जुलूस में प्रदर्शनकारी नारे लगा रहे थे - ‘खत्म करें ज़ालिम राज, लायें मज़दूरों-किसानों का राज!’, ‘भ्रष्ट परजीवी पूंजीवादी राज्य मुर्दाबाद!’, ‘पूंजीवाद मुर्दाबाद!’, ‘मज़दूर-विरोधी बजट मुर्दाबाद!’, ‘सार्वजनिक संसाधनों और सार्वजनिक सेवाओं का निजीकरण बंद करो!’, आदि। प्रदर्शनकारियों के हाथों में बैनर और प्लाकार्ड थे - जिन पर लिखे हुए नारे थे - ‘महंगाई का एक ईलाज, मज़दूर और किसान का राज!’, ‘जन-विरोधी बजट मुर्दाबाद!’, ‘बढ़ती महंगाई पर रोक लगाओ!’, ‘यह बजट सिर्फ पूंजीपतियों के लिए, लोगों के लिए नहीं!’, इत्यादि।

सहभागी पार्टियों के प्रतिनिधियों ने सभा को संबोधित किया। वक्ताओं ने बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा पेश किया गया बजट मज़दूर-विरोधी, किसान-विरोधी, राष्ट्र-विरोधी और जन-विरोधी है। बजट के ज़रिए, बड़ी-बड़ी पूंजीवादी कंपनियों के मुनाफ़ों पर लगाए जाने वाले टैक्स में छूट देकर उन्हें 25,000 करोड़ रुपये का सालाना अतिरिक्त फ़ायदा पहुंचाया जाएगा। इससे पहले, सितम्बर 2019 में घोषित कंपनी टैक्स में 1,44,000 करोड़ रुपये की बड़ी छूट दी गई थी। कुल मिलाकर छह महीनों के अंदर पूंजीपतियों को 1,69,000 करोड़ रुपये का सीधा फ़ायदा पहुंचाया गया है।

उन्होंने बताया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन को उन लाखों मज़दूरों की चिंता नहीं है जिन्होंने आर्थिक मंदी और मज़दूर-विरोधी नीतियों के कारण नौकरियां खो दी हैं। उनको उन करोड़ों किसानों की चिंता नहीं है जो फ़सल का दाम न मिलने के कारण खुदकुशी करने को मजबूर हो रहे हैं। हमारे नौजवान रोज़गार की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। मज़दूरों किसानों के बच्चे भूखे पेट सोने को मजबूर हैं।

वक्ताओं ने अर्थव्यवस्था में घोर मंदी की स्थिति का खुलासा करते हुए बताया कि सरकार इसे छुपाने की पूरी कोशिश कर रही है। सरकार की पूंजीवादपरस्त नीतियों के चलते मज़दूरों और किसानों की खरीद शक्ति में गिरावट हुई है, जो मंदी की मूल वजह है।

उन्होंने कहा कि इस बजट में देशवासियों के खाद्य अनुदान में 69,000 करोड़ रुपये की कटौती की गई है। इसके अलावा कई वस्तुओं के आयात पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाकर, लोगों पर लगभग 20,000 करोड़ रुपये का कुल बोझ बढ़ाने की तैयारी है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना के लिए आवंटन 280 करोड़ रुपये से घटाकर 220 करोड़ रुपये कर दिया गया है जबकि प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए बजट करीब 600 करोड़ रुपये है!

वक्ताओं ने कहा कि देश की सार्वजनिक संपत्तियों - जैसे कि भारतीय रेल, रक्षा उत्पादन के कारखानों, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और बीमा कंपनियों, सार्वजनिक सड़क परिवहन, बंदरगाहों, कोयला, बिजली, इस्पात, पेट्रोलियम, आदि के कारखानों को बड़े-बड़े पूंजीपतियों को सौंपा जा रहा है।

वक्ताओं ने कहा कि उपस्थित मज़दूरों से आह्वान किया कि इस मज़दूर- विरोधी, किसान-विरोधी, समाज-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी बजट का डटकर विरोध करें और देशी-विदेशी पूंजीपतियों द्वारा इस लूट खसोट के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ बुलंद करें।

सभा को संबोधित करने वालों में शामिल थे - सी.पी.आई. (एम) से प्रकाश करात, सी.पी.आई. से डी. राजा, आर.एस.पी. से नाजिम, सी.पी.आई.एम.एल. (लिबरेशन) से रवि राय और हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी से संतोष कुमार।

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Mar 1-15 2020    Struggle for Rights    Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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