जामिया के छात्रों पर राज्य की बर्बर हिसा की निंदा

दो महीने पहले जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्रों पर पुलिस द्वारा देर रात किये गए हमलों को याद करने के लिए जामिया के छात्रों सहित कई राजनीतिक पार्टियों, मानव अधिकार संगठनों और नागरिकों के समूहों ने मिलकर एक सभा का आयोजन किया। दिल्ली और देशभर के कई विश्वविद्यलयों के छात्रों ने इस सभा में हिस्सा लिया। इसमें महिलाओं ने भी बड़ी तादाद में हिस्सा लिया। कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के साथियों ने भी इस सभा में हिस्सा लिया और जामिया के उत्पीड़ित छात्रों के दोस्तों, शिक्षकों और रिश्तेदारों के साथ एकजुटता प्रकट की।

Jamia meeting

सभा के आयोजन में शामिल सभी संगठनों के प्रतिनिधियों ने सभा को संबोधित किया। सी.ए.ए., एन.आर.सी. और एन.पी.आर. का अपने कैंपस में शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा किये गए बर्बर हमलों की सभी वक्ताओं के निंदा की। उन्होंने बताया कि लाइब्रेरी में अपनी पढ़ाई कर रहे छात्रों तक को भी नहीं बख्शा गया। पुलिस जबरदस्ती लाइब्रेरी और छात्रों के हाॅस्टलों में घुस गई और पुलिस को जो कोई मिला उसकी बेरहमी के साथ पिटाई की और उन्हें घायल अवस्था में खुद अपनी रक्षा करने के लिए छोड़ दिया। अपनी सुरक्षा के लिए छात्रों द्वारा पुलिस को किये गए टेलीफोन कॉल को नज़रंदाज़ किया गया। छात्राओं पर लैंगिक हमला किया गया और उनको बुरी तरह से पीटा गया। 10 फरवरी को छात्रों द्वारा आयोजित जुलूस पर पुलिस ने एक बार फिर लाठी चार्ज किया, जिसमें कई छात्र बुरी तरह से जख्मी हो गए और छात्राओं पर लैंगिक हमले किए गए। लोगों को भड़काने के मक़सद से राज्य द्वारा बार-बार हमले किए गए और अराजकता फैलाने और संघर्ष को बदनाम करने के इरादे से पुलिस द्वारा गोलीबारी की गयी।

लेकिन अधिकारियों द्वारा आयोजित किये गए तमाम हमलों और भड़काने की तमाम कोशिशों के बावजूद जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्र बहादुरी के साथ डटे रहे हैं। विश्वविद्यालय के गेट पर हर रोज़ विरोध प्रदर्शन आयोजित किये जा रहे हैं। जिसमें हजारों की संख्या में लोग हिस्सा ले रहे हैं। सी.ए.ए., एन.आर.सी. और एन.पी.आर. का इस्तेमाल करके लोगों को बांटने और उनको आतंकित करने की राज्य की हर एक कोशिश की निंदा की गयी है। कई शिक्षाविदों, कलाकारों, संगीतकारों और जानी-मानी फिल्मी हस्तियों, राजनीतिक पार्टियों, महिला संगठनों, जनजाति और दलित संगठनों और मानव अधिकार संगठनों के प्रतिनिधियों ने इन सभाओं में हिस्सा लिया है और संघर्ष के साथ अपनी एकजुटता प्रकट की है। हर रोज़ आयोजित की जा रही ये सभाएं पूरी तरह से शांतिपूर्ण रही हैं, जिसमें ऊंचे दर्जे़ का अनुशासन और संगठन साफ झलकता है, हर प्रकार के भड़काऊ तत्वों को बाहर रखने के लिए इंतजाम किया गया है।

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों की बहादुरी की तारीफ की, जिसने पूरे देश में और दुनियाभर में विरोध प्रदर्शन की एक चिंगारी जगाई है। उन्होंने जे.एन.यू., ए.एम.यू. और अन्य विश्वविद्यालयों के छात्रों पर की जा रही हिंसा की कड़ी निंदा की। वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि राज्य द्वारा छात्रों पर किये जा रहे ये हमले शिक्षा के निजीकरण के खि़लाफ़ नौजवानों के लिए रोज़गार और सुरक्षित भविष्य दिलाने में राज्य की नाकामयाबी के खि़लाफ़ छात्रों और नौजवानों के संघर्ष को हुक्मरानों द्वारा कुचलने की कोशिश का हिस्सा हैं।

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Mar 1-15 2020    Struggle for Rights    Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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