पुलवामा हमले का एक साल : शहीदों की याद में नागरिकों ने कैंडल लाइट जुलूस आयोजित किया

14 फरवरी को सैकड़ों महिलाओं, नौजवानों, छात्रों, शिक्षकों और नागरिकों ने जम्मू-श्रीनगर महामार्ग पर पुलवामा में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए सी.आर.पी.एफ. के जवानों की याद में जामिया मिलिया मेट्रो स्टेशन से जामिया विश्वविद्यालय तक जुलूस निकाला।

जुलुस में शामिल लोग सी.आर.पी.एफ. के जवानों पर हुए हमले की निंदा करते हुए, प्लेकार्ड हाथों में लिए हुए थे। साथ ही वे अपने हाथों में सी.ए.ए., एन.आर.सी., एन.पी.आर. के विरोध में, राज्य द्वारा लोगों की एकता को धर्म के आधार पर तोड़ने की कोशिश के खि़लाफ़ और जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, जे.एन.यू., ए.एम.यू. और अन्य विश्वविद्यालयों के छात्रों पर किये गए हमलों के खि़लाफ़ प्लेकार्ड और बैनर लिए हुए थे। यह जुलूस बड़े ही अनुशासित और शांतिपूर्वक तरीके से जामिया विश्वविद्याय की ओर बढ़ा, जहां एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया।

Pulwama_Anniversary meeting in Shaheen bagh

प्रदर्शन की जगह पर सी.आर.पी.एफ. के शहीद जवानों की याद में एक यादगार स्तंभ खड़ा किया गया जिसे मोमबत्तियों और फूलों से सजाया गया। रैली की शुरुआत में लोगों ने 2 मिनट का मौन रख के शहीद जवानों को याद किया। कई बच्चों, नौजवानों और महिलाओं ने इस विषय पर कविताओं, कहानियों और गीतों के माध्यम से लोगों की एकता को उजागर किया और हुक्मरानों द्वारा इस एकता को तोड़ने की कोशिशों की निंदा की।

कई राजनीतिक पार्टियों और संगठनों के कार्यकर्ताओं, नौजवानों, छात्रों और महिला कार्यकर्ताओं के साथ-साथ कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के साथियों ने भी रैली को संबोधित किया।

सभी वक्ताओं ने कहा कि हमारे देश के लोगों के दिलों में पुलवामा में हुए आतंकी हमले को लेकर कई सवाल हैं जिनका जवाब हम चाहते हैं - सी.आर.पी,एफ. के जवानों का दस्ता इस जोखिम भरे रास्ते पर बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के क्यों ले जाया जा रहा था, जबकि सभी जानते थे इस रास्ते पर हमले की संभावना है, राज्य की खुफिया एजेंसियां इस कदर क्यों नाकामयाब रहीं, इत्यादि। हमले के तुरंत बाद राज्य द्वारा चलाये गए राजनीतिक आतंक और नफ़रत के अभियान की सभी वक्ताओं ने कड़ी निंदा की। पुलवामा में हुए आतंकी हमले का इस्तेमाल भाजपा की सरकार ने मुसलमान लोगों और खास तौर से कश्मीरी लोगों को “आतंकवादी” और “देशद्रोही” करार देने के लिए किया है। सभी वक्ताओं ने याद दिलाया कि किस तरह से हमले के तुरंत बाद देश के कई हिस्सों में कश्मीरी छात्रों और लोगों पर गुंडों ने हमला किया और जिनको पुलिस का पूरा समर्थन हासिल था। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि किस तरह से राज्य द्वारा शिक्षा संस्थानों पर दबाव डाला गया कि वे कश्मीरी छात्रों को अपने संस्थानों में प्रवेश न दें।

सभी वक्ताओं ने राज्य द्वारा मुसलमानों को निशाना बनाकर उन्हें “देशद्रोही” करार देने की सुनियोजित नीति की भी कड़ी निंदा की। उन्होंने बताया कि किस तरह से लोग सी.ए.ए., एन.आर.सी., एन.पी.आर. के खि़लाफ़ उठ खड़े हो रहे हैं, जिसके तहत लोगों से धर्म के आधार पर भेदभाव किया जा रहा है, और उनकी नागरिकता पर शक किया जा रहा है। जुलूस के दौरान “हम सब एक है!”, “लोगों की एकता को तोड़ने की कोशिश मुर्दाबाद!”, “सी.ए.ए. को वापस लो, एन.आर.सी. और एन.पी.आर. करना बंद करो!” इत्यादि नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।

Tag:   

Share Everywhere

Mar 1-15 2020    Voice of the Party    Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

(Click thumbnail to download PDF)

5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

(Click thumbnail to download PDF)

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

(Click thumbnail to download PDF)

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)