डोनाल्ड ट्रप की हिन्दोस्तान यात्रा का विरोध

24 फरवरी, 2020 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रप की हिन्दोस्तान यात्रा के खि़लाफ़ कम्युनिस्ट पार्टियों, ट्रेड यूनियनों, प्रगतिशील जन संगठनों और मानवाधिकार संगठनों ने मिलकर धरना आयोजित किया।

यह धरना आल इंडिया पीस एंड सोलिडेरीटी ऑरगेनाइजेशन के तहत किया गया था।

धरने में शामिल लोगों ने अपने हाथों में काला झंडा लेकर डोनाल्ड ट्रप ‘गो बैक!’, ‘डोनाल्ड ट्रप वापस जाओ!’ का नारा लगाया।  प्रदर्शनकारियों के हाथों में रंग-बिरंगे बैनर और प्लाकार्ड थे जिन पर लिखा था - ‘हिन्दोस्तान-अमरीका रणनैतिक गठबंधन मुर्दाबाद!’ ‘दक्षिण एशिया में शांति के लिये संघर्ष ज़िन्दाबाद!’, ‘बढ़ते फौजीकरण और जंग की नीति बंद करें!’, ‘अमरीकी साम्राज्यवाद मुर्दाबाद!’, ‘मुस्लिम लोगों पर बढ़ते हमले मुर्दाबाद!’, ‘दुनियाभर में आतंकवाद का सरगना अमरीकी साम्राज्यवाद मुर्दाबाद!’, इत्यादि।

Demo of communist parties
Against Trumps visit

इस धरने को कई वक्ताओं ने संबोधित किया।

वक्ताओं ने हिन्दोस्तान और दक्षिणी एशिया में अमरीकी साम्राज्यवाद के बढ़ते हस्तक्षेप की निंदा की। हिन्दोस्तानी राज्य और अमरीकी के बीच सैनिक-रणनैतिक गठबंधन के चलते, अमरीका हिन्दोस्तान पर पूरा दबाव डाल रहा है कि अमरीकी इजारेदार हथियार निर्माण कंपनियों से हिन्दोस्तान आधुनिक से आधुनिक और घातक से घातक हथियार खरीदे तथा अपनी सैनिक व्यवस्था को पूरी तरह अमरीकी सैनिक रणनीति के साथ तालमेल में लाए।

हिन्दोस्तान का हुक्मरान वर्ग, हमारे बड़े-बड़े इजारेदार पूंजीपति, खुद एक साम्राज्यवादी ताक़त बनने के मंसूबे रखते हैं और यह सोच रहे हैं कि अमरीकी साम्राज्यवाद के साथ गठबंधन बनाकर वे अपने मंसूबों को पूरा करने में कामयाब होंगे। इसीलिए आज देश के मज़दूर-किसान के हितों को दांव पर रखकर हमारी सरकार ट्रंप का इतना शानदार स्वागत समारोह आयोजित कर रही है और खुद को अमरीका का सबसे बड़ा दोस्त बता रही है। परंतु अमरीका आज दुनिया में सबसे ख़तरनाक जंगफरोश ताक़त और आतंकवाद का सरगना है। अमरीका के साथ यह दोस्ती दक्षिण एशिया में जंग और आतंकवाद का ख़तरा और बढ़ाती है। अमरीका के साथ हमारे हुक्मरानों की यह दोस्ती हमारे सभी लोगों के लिए बहुत महंगी पड़ेगी।

प्रदर्शन को संबोधित करने वाले वक्ता थे - कामरेड सीताराम येचुरी, कामरेड डी. राजा, कामरेड संतोष कुमार, कामरेड शत्रुजीत, कामरेड आर.के. शर्मा, कामरेड धर्मेन्दर, सुचेता डे, तिरूमलई, आदि।

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Mar 1-15 2020    Voice of the Party    Economy     Rights     War & Peace     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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