आल इंडिया गार्ड्स कौंसिल की सभा

12 फरवरी, 2020 को आल इंडिया गाड्र्स कौंसिल (ए.आई.जी.सी.) की ई.सी.आर. जोनल सभा धनबाद डिवीज़न की गोमोह लाबी में संपन्न हुई।

Railway Guard Council

सभा का उद्घाटन करते हुए ए.आई.जी.सी. के अध्यक्ष ने बताया कि भारतीय रेल को बड़े पूंजीपतियों के हाथों में सौंपा जा रहा है। हम रेल गार्ड अकेले इसका सामना नहीं कर सकते और हमें लोको रनिंग स्टाफ और अन्य रेल मज़दूरों के साथ एकजुट होकर संघर्ष करने की ज़रूरत है। इस एकता से हमारा संघर्ष मजबूत होगा। मज़दूर वर्ग के अन्य तबकों के साथ रेल मज़दूरों की एकता, रेल प्रशासन को  भारतीय रेल के निजीकरण को वापस लेने पर मजबूर कर देगा।

उन्होंने ऐलान किया कि ए.आई.जी.सी. अन्य रेल मज़दूरों के संगठनों के साथ मिलकर जंतर-मंतर पर एक दिवसीय धरना आयोजित करने जा रहा है। रेल गार्ड अपने संघर्ष को केवल वेतन में बढ़ोतरी तक सीमित नहीं रख सकते हैं। उन्हें अपने देश के मज़दूर वर्ग के अन्य लड़ाकू तबकों के साथ मिलकर रेल और सार्वजनिक क्षेत्र की अन्य कंपनियों के निजीकरण के खि़लाफ़ मिलकर लड़ना होगा। उन्होंने आगे बताया कि 1853 में कार्ल मार्क्स ने कहा था कि रेल हिन्दोस्तान में क्रांति का रास्ता खोल देगी। भारतीय रेल का निजीकरण करने की सरकार की कोशिश सभी रेल मज़दूरों को एकजुट कर देगी और इससे हिन्दोस्तान में क्रांति का रास्ता खुल जायगे। रेल मज़दूर इस आंदोलन में सबसे आगे होंगे।

सभा में हिस्सा लेते हुए आल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (ए.आई.एल.आर.एस.ए.) के प्रतिनिधि ने कहा कि रेल प्रशासन बड़ी तेज़ी के साथ हिन्दोस्तान के पूंजीपतियों के हितों में काम कर रहा है और साथ ही मज़दूर-विरोधी नीतियों को लागू कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सबसे पहले केवल दो गाड़ियों का निजीकरण किया और अब 150 गाड़ियों का निजीकरण करने का ऐलान कर दिया है। यदि हम इस वक्त इसका विरोध नहीं करते हैं तो सरकार रेल के सभी कार्यों का निजीकरण कर देगी। आज एकजुट होकर लड़ने की सख्त ज़रूरत है। इस मक़सद के लिए ए.आई.एल.आर.एस.ए., ए.आई.जी.सी. के साथ मिलकर संयुक्त प्रदर्शन करने जा रहा है।

मज़दूर एकता कमेटी के कामरेड कुमार ने सभा में हिस्सा ले रहे सभी रेल गाड्र्स को लाल सलाम करते हुए कहा कि यह सभा ऐसे वक्त पर आयोजित की जा रही है जब सरकार तेज़ी के साथ निजीकरण के रास्ते पर चल रही है। उन्होंने सभी रेल मज़दूरों से आह्वान किया कि वे अपने क्रांतिकारी नेता बिरसा मुंडा के नक्शे-क़दम पर चलें, जिन्होंने बर्तानवी बस्तीवादियों के खि़लाफ़ संघर्ष को अगुवाई दी थी। कामरेड कुमार ने देशभर में चल रहे मज़दूरों और किसानों के कई संघर्षों का जिक्र किया जैसे कि नाशिक से मुंबई तक किसानों का “लॉन्ग मार्च” और सरकार की नीतियों के खि़लाफ़ आज़ाद मैदान में लाखों मज़दूरों का प्रदर्शन। उन्होंने बताया कि 8 जनवरी, 2020 को देशभर में 25 करोड़ से अधिक मज़दूरों ने देशव्यापी हड़ताल में हिस्सा लिया, जिसमें न्यूनतम वेतन 21,000 रुपये और सभी के लिया काम की मांग की गयी थी। 

उन्होंने आगे बताया कि हमारे देश के लोग बेहद मेहनती और ईमानदार हैं। उनकी कड़ी मेहनत के बल पर भारतीय रेल चलती है। भारतीय रेल से हर रोज़ 2.4 करोड़ लोग यात्रा करते हैं, जो कि पूरी ऑस्ट्रेलिया की आबादी के बराबर है। इतनी कड़ी मेहनत के बावजूद, रेल अधिकारी और सरकार को रेल मज़दूरों की कोई परवाह नहीं है। उन्होंने बताया कि हम जिस इलाके में यह सभा कर रहे हैं, इसी इलाके से 1857 के ग़दर की शुरुआत हुयी थी, जिसने बर्तानवी हुकूमत को उखाड़ फेंकने की चुनौती ली थी। 1857 के क्रांतिकारियों ने धर्म और जाति से ऊपर उठकर अपनी एकता बनायी थी। आज वक्त हमें एक बार फिर पुकार रहा है कि इस इलाके के लोग काले अंग्रेजों के राज को उखाड़ फेंकने के लिए एकजुट हों। अंत में उन्होंने सभी मज़दूरों से आह्वान किया कि वह मज़दूर एकता लहर ज़रूर पढ़ें। यह एक ऐसा अख़बार है जिसने पिछले 40 वर्षों से हिन्दोस्तान के सभी मज़दूरों, किसानों और तमाम मेहनतकश लोगों की एकता को मज़बूत करने के कार्य में खुद को समर्पित किया है।

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Defeat Privatisation    Mar 16-31 2020    Struggle for Rights    Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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