राज्य द्वारा आयोजित हिंसा के ख़िलाफ़ दिल्ली के वकीलों का प्रदर्शन

6 मार्च को सैकड़ों की तादाद में वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट से चलते हुए जंतर-मंतर तक एक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। फरवरी के अंतिम सप्ताह में दिल्ली में राज्य द्वारा आयोजित हिंसा के खि़लाफ़ वकीलों ने यह प्रदर्शन किया। इस हिंसा में खास तौर से मुस्लिम समुदाय के लोगों को निशाना बनाया गया था और पुलिस ने पीड़ित लोगों की रक्षा करने की बजाय, हमलावर कातिलाना भीड़ की हमले करने में सहायता की। इस विरोध प्रदर्शन में वकीलों के कई संगठनों ने हिस्सा लिया। वकीलों के अलावा कई और संगठनों के सदस्यों ने भी इस प्रदर्शन के बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जो राज्य द्वारा आयोजित हिंसा और राजकीय आतंक के खि़लाफ़ और लोगों के हितों की हिफ़ाज़त में लगातार संघर्ष करते रहे हैं।

Lawyers against Delhi violence

“लायर्स फॉर डेमोक्रेसी - लायर्स मार्च फॉर पीस अगेंस्ट दिल्ली रायट्स” (जनतंत्र के समर्थन में वकील- दिल्ली में दंगों के खि़लाफ़ और शांति के लिए वकीलों का जुलूस” इस बैनर के तले वकील और अन्य संगठनों के सदस्य सुप्रीम कोर्ट के सामने इकट््ठा हुये। उनके हाथों में बैनर और तख्तियां थीं जिनपर लिखा था “राज्य द्वारा आयोजित हिंसा, मुर्दाबाद!”, “दिल्ली में हुई हिंसा में राज्य की भूमिका की निंदा करें!”, “दिल्ली में हिंसा - दंगे नहीं बल्कि राज्य आयोजित गुनाह है!”, “”गृह मंत्री इस्तीफा दो!”, “सी.ए.ए.और एन.आर.सी. को ठुकराओं!”, “हमें धर्म के आधार पर बांटना बंद करो!” इत्यादि। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने हिंसा में राज्य और पुलिस की भूमिका की निंदा की और हिंसा के षिकार लोगों के साथ एकजुटता जताते हुए नारे बुलंद किये। उन्होंने लोगों की एकता को पुनस्र्थापित करने वाले गीत भी गए और हुक्मरानों द्वारा हमें बांटने की तमाम साज़िशों का डटकर मुक़ाबला करने का फै़सला किया।

मुसलाधार बारिश का सामना करते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से लेकर जंतर-मंतर तक का 3.5 किलोमीटर का लंबा रास्ता तय किया। जुलूस के दौरान पूरे रास्ते वे दिल्ली के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में राज्य, दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों की नाकामी के खि़लाफ़़ बुलंद नारे लगाते रहे। सरकार के ख़िलाफ़ और लोगों के अधिकारों और एकता की हिफ़ाज़त में वकीलों के इस जुलूस को देखने के लिए सैकड़ों लोग सड़कों के किनारे इकट््ठा हो गए।

जंतर-मंतर पहुंचकर यह जुलूस एक आम सभा में बदल गया। बारिश लगातार होती रही और जुलूस में शामिल सभी लोग पूरी तरह से भीग चुके थे, लेकिन वे लोगों की एकता के समर्थन में और हुक्मरानों द्वारा लोगों को बांटने के खि़लाफ़ लगातार नारे लगते रहे।

आम सभा को वकीलों और मानव अधिकार कार्यकर्ताओं ने संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने फरवरी महीने में दिल्ली में जो हिंसा का मंजर देखा गया उसे राज्य द्वारा आयोजित हिंसा करार दिया, जहां पुलिस ने हुक्मरानों के आदेश पर कातिलाना सांप्रदायिक भीड़ को नहीं रोका। यह कातिलाना भीड़ पत्थर, लाठियां, तलवारें, पेट्रोल बम और यहां तक की बंदूकों से लैस थी और उन्होंने कानून के किसी प्रकार से डर के बगैर हमलों को अंजाम दिया, जबकि पुलिस मूक दर्शक बनकर यह सब देखती रही। उन्होंने घरों, पूजा के स्थलों, वाहनों, दुकानों और संस्थानों और यहां तक कि स्कूलों को भी आग लगा दी, और ख़ास तौर से मुस्लिम लोगों को निशाना बनाया। लेकिन उन्होंने इस दौरान हिन्दू परिवारों को भी नहीं बक्शा। कई ठिकानों पर पुलिस ने खुद लोगों पर हमला करने में हमलावरों की मदद की। जब लोगों ने पुलिस से मदद की गुहार लगायी तो पुलिस ने उन्हें नज़रंदाज़ कर दिया, बाहरी सहायता सामग्री और राहत को लोगों तक पहुंचाने में रुकावट खड़ी की और हिंसा में घायल लोगों को अस्पताल ले जाने से रोका। सत्ताधारी पार्टी के नेताओं ने खुलेआम सांप्रदायिक बयान दिए, धमकियां और गालियां दीं, और हमलावरों को भड़काया। सभी वक्ताओं ने बताया कि किस तरह से सभी मज़हब के लोगों ने घायल लोगों तक मेडिकल और कानूनी सहायता, खाद्य पदार्थ पहुंचाने और उनके सिर पर छत देने की पूरी कोश्ािश की। सभी वक्ताओं ने सी.ए.ए. को विभाजनकारी करार देते हुए, धर्म के आधार पर नागरिकता तय करने पर सवाल उठाये। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और अन्य अदालतों पर लोगों के अधिकारों की हिफ़ाज़त करने से इंकार करने का भी आरोप लगाया।

दिल्ली में वकीलों और मानव अधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध प्रदर्शन यह दिखाता है कि राज्य द्वारा आयोजित हिंसा और राजकीय आतंक और देश के हुक्मरानों द्वारा लोगों की एकता को तोड़ने की कोषिषों के खि़लाफ़ लोगों का गुस्सा बढ़ता ही जा रहा है। यह दिखाता है कि लोग अब इस बात को समझने लगे हैं कि वे अपनी सुरक्षा और अधिकारों की हिफाज़त के लिए कोर्ट और राज्य की मशीनरी पर भरोसा नहीं कर सकते।     

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Punish the Guilty    Mar 16-31 2020    Struggle for Rights    Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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