दिल्ली हिंसा के शिकार लोगों के साथ हमदर्दी में:

पाकिस्तान में हिंदू धर्म के लोगों ने होली का त्योहार नहीं मनाया

8 मार्च, 2020 को पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दू लोगों ने उत्तर पूर्व दिल्ली की हिंसा में पीड़ित मुसलमान लोगों से सहानुभूति में एक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। पिछले महीने राज्य द्वारा आयोजित साम्प्रदायिक हिंसा में दिल्ली के मुसलमान लोगों को निशाना बनाया गया था। उन्होंने घोषणा की कि मुसलमान भाइयों पर हिन्दोस्तान में हिंसा का विरोध करने के लिये वे इस साल 10 मार्च को होली का त्यौहार नहीं मनायेंगे।

पाकिस्तान की 21 करोड़ आबादी का करीब दो प्रतिशत हिन्दू धर्म के अनुयायी हैं और इनमें से अधिकांश सिंध प्रांत के दक्षिण में रहते हैं। होली जो वसंत ऋतु के आने की द्योतक है कराची में बहुत ही उत्साह के साथ मनाई जाती है।

एक प्रदर्शनकारी ने मीडिया से बताया कि ”दिल्ली में हमारे मुसलमान भाइयों का दमन हो रहा है और उनकी सम्पत्ति को बर्बाद किया गया है। इससे हमें बहुत चोट पहुंची है और इसने हमें आज के इस जुलूस को करने के लिये प्रेरित किया है। इस बार हम होली का त्योहार सिर्फ धार्मिक मर्यादाओं को पूरा करने के लिये मनायेंगे - परन्तु इसमें रंगों का इस्तेमाल व हर्षो-उल्लास नहीं होगा। अपने त्योहार मनाने में हमारे लिये मुसलमान भाई कभी भी बाधा नहीं रहे हैं,। बल्कि उन्होंने हमें सुरक्षा प्रदान की है। वे भी इस मेले में हमारे साथ शरीक होते हैं।“

हिन्दू समुदाय के एक व्यक्ति ने कहा कि उन्होंने त्योहार से संबंधित सभी प्रमुख गतिविधियों पर रोक लगाई है। आयोजकों ने कहा ”इस बार हम गुलाल व रंग, गाना-बजाना व अपनी खुशी जाहिर नहीं करेंगो।“

पाकिस्तान के हिन्दू लोगों ने हिन्दोस्तानी लोगों के नागरिकता संशोधन कानून 2019 (सी.ए.ए.) विरोधी संघर्ष को समर्थन दिया है। उनके प्रवक्ताओं ने हिन्दोस्तानी सरकार द्वारा इसे कुचलने के लिये ”सबसे बुरी तरह की हिंसा पर उतरने“ की कड़ी निंदा की है।

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Mar 16-31 2020    Struggle for Rights    Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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